Spread the love

By: Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में खिलचीपुर थाना क्षेत्र के तीन गांवों—गादिया लुहार, छीपीपुरा और नेगडिया—में सोमवार देर रात एक धार्मिक कथा कार्यक्रम के बाद वितरित प्रसादी खाने से बड़ी संख्या में लोग बीमार हो गए। करीब 50 ग्रामीणों को फूड पॉयजनिंग की शिकायत हुई, जिनमें महिलाएं, बच्चे और युवा शामिल हैं। इनमें से 10 से अधिक की हालत गंभीर होने पर उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घटना की शुरुआत तब हुई जब गांवों में आयोजित धार्मिक कथा के समापन पर प्रसादी के रूप में भोजन वितरित किया गया। ग्रामीणों ने उत्साह से प्रसादी ग्रहण की, लेकिन कुछ ही घंटों बाद समस्या शुरू हो गई। सबसे पहले पेट में तेज जलन, बार-बार उल्टियां आने और दस्त लगने की शिकायतें सामने आईं। एक ग्रामीण ने बताया कि उनके गांव में ही 20-25 लोग एक साथ बीमार पड़ गए। बच्चों और बुजुर्गों की हालत देखकर पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। कई लोग रात में ही दर्द से कराहने लगे।

स्थानीय लोगों ने तुरंत स्वास्थ्य विभाग और 108 एम्बुलेंस सेवा को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक साथ पांच एम्बुलेंस गांवों की ओर रवाना की गईं। एम्बुलेंस टीम में ईएमटी राजेश दांगी, श्रीनाथ दांगी, दिनेश दांगी, रामलाल तंवर तथा पायलट भंवरलाल, लव कुमार, भारत दांगी, सज्जन सौंधिया और गोविंद परिहार शामिल थे। इनकी त्वरित कार्रवाई से सभी बीमार ग्रामीणों को समय पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खिलचीपुर पहुंचाया जा सका। रात में ही आपातकालीन वार्ड में मरीजों का इलाज शुरू हो गया।

अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सक डॉ. विशाल सिसोदिया के नेतृत्व में टीम ने सभी मरीजों को प्राथमिक उपचार प्रदान किया। इसमें इंजेक्शन, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) और आवश्यक दवाएं दी गईं। डॉक्टर ने बताया कि अधिकांश मरीजों में डिहाइड्रेशन और पेट की गंभीर जलन के लक्षण थे, लेकिन समय पर इलाज शुरू होने से सभी की हालत अब स्थिर है। गंभीर मरीजों को निगरानी में रखा गया है, जबकि कुछ को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने पूरी टीम को अलर्ट पर रखा है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने की तैयारी की है।

प्रारंभिक जांच में चिकित्सकों और अधिकारियों ने प्रसादी में उपयोग किए गए भोजन या सामग्री के दूषित होने की आशंका जताई है। अक्सर ऐसे सामूहिक भोजन में रखरखाव की कमी, पुरानी सामग्री या अस्वच्छ तरीके से तैयारी के कारण फूड पॉयजनिंग होती है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रसादी के सैंपल एकत्र करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि लैब जांच से सटीक कारण पता चल सके। प्रशासन ने आयोजकों से भी पूछताछ शुरू की है कि भोजन की तैयारी और वितरण में किन मानकों का पालन किया गया था।

यह घटना एक बार फिर सामुदायिक भोज और धार्मिक आयोजनों में खाद्य सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े स्तर पर भोजन तैयार करते समय साफ-सफाई, ताजा सामग्री और उचित भंडारण का ध्यान रखना जरूरी होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण ऐसे मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने गांवों में लोगों को सलाह दी है कि यदि किसी को भी हल्की शिकायत हो तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

फिलहाल सभी मरीज खतरे से बाहर हैं और उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। उम्मीद है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसे आयोजनों में खाद्य सुरक्षा के सख्त नियम लागू किए जाएंगे। यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग अब प्रसादी ग्रहण करने से पहले सतर्कता बरतने की बात कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× Whatsapp