By: Ravindra Sikarwar
नए साल के आगमन से ठीक पहले भारतीय रेलवे ने यात्रियों को बड़ा झटका दिया है। रेलवे ने यात्री ट्रेनों के किराए में संशोधन करने का निर्णय लिया है, जो 26 दिसंबर 2025 से प्रभावी होगा। इस फैसले का असर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा, जबकि रोजाना सफर करने वाले लोकल ट्रेन यात्रियों और मंथली पास धारकों को इससे राहत दी गई है। रेलवे के अनुसार, यह बढ़ोतरी बेहद सीमित और संतुलित रखी गई है, ताकि आम यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
जनरल से एसी तक बढ़े किराए
रेलवे द्वारा जारी नई व्यवस्था के तहत जनरल श्रेणी से लेकर एसी कोच तक के किराए में आंशिक बढ़ोतरी की गई है। 215 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने पर जनरल क्लास के यात्रियों को प्रति किलोमीटर 1 पैसा अतिरिक्त चुकाना होगा। वहीं, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की नॉन एसी श्रेणी में यात्रा करने वालों के लिए किराया 2 पैसे प्रति किलोमीटर बढ़ाया गया है। एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों को भी प्रति किलोमीटर 2 पैसे अधिक देने होंगे। हालांकि, इसका कुल असर बहुत ज्यादा नहीं पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर 500 किलोमीटर की नॉन एसी यात्रा पर यात्रियों को लगभग 10 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे।
किन यात्रियों को राहत
रेलवे ने नए किराया ढांचे में आम और दैनिक यात्रियों का विशेष ध्यान रखा है। लोकल ट्रेनों में सफर करने वालों और मंथली सीजन टिकट धारकों के किराए में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। इसके अलावा, साधारण श्रेणी में 215 किलोमीटर तक की यात्रा करने वाले यात्रियों से भी पुराना किराया ही लिया जाएगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य रोजमर्रा के यात्रियों को किसी तरह की परेशानी से बचाना है।
रेलवे को मिलेगा अतिरिक्त राजस्व
किराए में इस सीमित बढ़ोतरी से रेलवे को चालू वित्त वर्ष में लगभग 600 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व की उम्मीद है। रेलवे का मानना है कि यह अतिरिक्त आमदनी यात्री सुविधाओं में सुधार, ट्रेनों की समयबद्धता, सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के विस्तार में खर्च की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों से ली जाने वाली यह मामूली राशि रेलवे के बढ़ते खर्चों को संतुलित करने में मदद करेगी।
किराया बढ़ाने की वजह क्या है
रेलवे अधिकारियों ने किराया बढ़ाने के पीछे की वजह भी स्पष्ट की है। बीते दस वर्षों में भारतीय रेलवे का नेटवर्क और संचालन काफी विस्तृत हुआ है। नई लाइनों का निर्माण, आधुनिक ट्रेनों की शुरुआत और स्टेशनों के पुनर्विकास पर बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। इसके साथ ही कर्मचारियों पर होने वाला खर्च बढ़कर करीब 1.15 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे का कुल संचालन खर्च लगभग 2.63 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।
वित्तीय दबाव और संतुलन की कोशिश
रेलवे का कहना है कि बढ़ते वित्तीय दबाव को देखते हुए किराया युक्तिकरण (रैशनलाइजेशन) जरूरी हो गया था। हालांकि, यात्रियों पर अधिक बोझ न पड़े, इसलिए माल ढुलाई से आय बढ़ाने के साथ-साथ यात्री किराए में न्यूनतम संशोधन का रास्ता अपनाया गया है। रेलवे का दावा है कि यह फैसला दीर्घकालिक रूप से रेलवे की सेवाओं को बेहतर बनाने और देशभर में रेल नेटवर्क को मजबूत करने में सहायक होगा।
नए साल से पहले रेलवे के इस फैसले से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को थोड़ी अतिरिक्त राशि चुकानी होगी, लेकिन यह बढ़ोतरी बेहद सीमित है। वहीं, लोकल ट्रेन यात्रियों और दैनिक सफर करने वालों को राहत दी गई है। कुल मिलाकर, रेलवे ने संतुलन बनाने की कोशिश की है, ताकि उसकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत रहे और यात्रियों पर बोझ भी न्यूनतम पड़े।
