by-Ravindra Sikarwar
भारत के पूर्व RBI गवर्नर, रघुराम राजन ने अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 50% टैरिफ को भारत के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ बताया है। उन्होंने कहा है कि यह कदम भारत को अपने व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाने और अपनी आर्थिक नीतियों पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर करेगा। राजन ने कहा कि अमेरिका का यह फैसला अप्रत्याशित नहीं था, क्योंकि भारत लगातार रूसी तेल की खरीद कर रहा था, जिसे अमेरिका और उसके सहयोगी पसंद नहीं कर रहे थे।
प्रमुख मुद्दे और राजन का दृष्टिकोण:
राजन के अनुसार, इस टैरिफ के पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं:
- भू-राजनीतिक दबाव: अमेरिका का मानना है कि भारत रूस से तेल खरीद कर यूक्रेन में युद्ध को बढ़ावा दे रहा है। हालांकि, भारत का कहना है कि वह अपने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देगा और जहां से उसे सबसे अच्छी डील मिलेगी, वहां से तेल खरीदेगा। राजन का मानना है कि भारत को इन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के प्रति अधिक संवेदनशील होना चाहिए।
- आर्थिक निर्भरता: राजन ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का अमेरिका पर निर्यात की दृष्टि से अत्यधिक निर्भर होना एक बड़ी कमजोरी है। अमेरिका, भारत के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। इस टैरिफ ने इस निर्भरता की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। राजन के अनुसार, भारत को अब चीन, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और मध्य-पूर्व जैसे नए बाजारों की तलाश करनी चाहिए।
आगे की राह: भारत के लिए सुझाव
राजन ने इस संकट को अवसर में बदलने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं:
- व्यापार साझेदारों में विविधता: भारत को सिर्फ अमेरिका और यूरोप पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए। हमें नए बाजारों में प्रवेश के लिए गहन अध्ययन करना चाहिए।
- घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा: भारत को ‘मेक इन इंडिया’ पहल को और मजबूत करना चाहिए। हमें न केवल निर्यात के लिए, बल्कि अपनी घरेलू जरूरतों के लिए भी उत्पादन बढ़ाना चाहिए, जिससे हम बाहरी झटकों से कम प्रभावित हों।
- तकनीकी और नवाचार पर ध्यान: हमें ऐसे उत्पादों का विकास करना चाहिए जिनकी वैश्विक मांग हो और जो कम प्रतिस्पर्धी हों।
- कूटनीतिक बातचीत: भारत को अमेरिका के साथ इस मुद्दे को सुलझाने के लिए लगातार कूटनीतिक बातचीत जारी रखनी चाहिए।
राजन का मानना है कि यह टैरिफ भारत के लिए एक बड़ा सबक है। यदि भारत इस पर सही तरीके से प्रतिक्रिया करता है तो यह भारत की आर्थिक नीतियों को और अधिक मजबूत बना सकता है।
