by-Ravindra Sikarwar
मॉस्को: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुडापेस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रस्तावित शिखर सम्मेलन की अचानक स्थगिति के ठीक बाद रूस के रणनीतिक परमाणु बलों के बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास का निर्देश जारी किया है। यह कदम यूक्रेन युद्ध को लेकर दोनों देशों के बीच बढ़ते वैश्विक तनाव को दर्शाता है, जहां शांति वार्ताओं की उम्मीदें धूमिल पड़ रही हैं। क्रीमलिन ने स्पष्ट किया है कि यह अभ्यास पहले से निर्धारित था, लेकिन समय संयोग ने इसे और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रूस की सैन्य ताकत का प्रदर्शन है, जो पश्चिमी देशों को चेतावनी देने का प्रयास हो सकता है।
घटना का पृष्ठभूमि और समयरेखा:
यह घटना 22 अक्टूबर 2025 को सामने आई, जब पुतिन ने वीडियो लिंक के माध्यम से मॉस्को से रूसी सेना के जनरल स्टाफ प्रमुख वलेरी गेरासिमोव को परमाणु अभ्यास शुरू करने का आदेश दिया। अभ्यास में भूमि, समुद्र और हवाई दलों के संयुक्त संचालन शामिल थे, जहां मिसाइल प्रक्षेपणों का अभ्यास किया गया। गेरासिमोव ने पुतिन को बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य “परमाणु हथियारों के उपयोग की अनुमति देने की प्रक्रियाओं का अनुकरण” करना है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने जारी वीडियो फुटेज में दिखाया गया कि कैसे विभिन्न इकाइयां परमाणु हमले की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया की तैयारी कर रही हैं।
यह आदेश उसी दिन जारी हुआ जब ट्रंप ने घोषणा की कि बुडापेस्ट में पुतिन के साथ उनकी प्रस्तावित तेजी से बैठक को स्थगित कर दिया गया है। ट्रंप ने कहा, “मैं ऐसा कोई सम्मेलन नहीं चाहता जो समय की बर्बादी साबित हो।” यह निर्णय अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच सोमवार को हुई फोन वार्ता के बाद लिया गया। ट्रंप ने पिछले सप्ताह ही इस बैठक की घोषणा की थी, जो यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने पर केंद्रित होने वाली थी। लेकिन रूस ने तत्काल युद्धविराम का विरोध किया है, जबकि ट्रंप पूरे वर्ष अपनी नीतियों में बदलाव करते रहे हैं—कभी युद्धविराम को प्राथमिकता देते हुए, तो कभी यूक्रेन की खोई हुई जमीन वापसी की संभावना पर सवाल उठाते हुए।
क्रीमलिन की प्रतिक्रिया और तैयारी की मांग:
क्रीमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों से कहा, “पुतिन-ट्रंप शिखर सम्मेलन के लिए गहन तैयारी जरूरी है। न तो ट्रंप और न ही पुतिन समय बर्बाद करना चाहते हैं। ये दोनों राष्ट्रपति उच्च दक्षता और उत्पादकता के साथ काम करने के आदी हैं।” पेस्कोव ने जोर दिया कि बैठक तब ही होगी जब दोनों पक्ष वास्तविक प्रगति सुनिश्चित कर सकें। रूस ने यूक्रेन पर लगातार अपनी स्थिति स्पष्ट की है कि कोई भी समझौता मॉस्को के हितों के अनुरूप होना चाहिए, और लावरोव ने मंगलवार को पुनः दोहराया कि तत्काल युद्धविराम रूसी सुरक्षा के लिए खतरा है।
ट्रंप, जो अपने दूसरे कार्यकाल के नौ महीने पूरे कर चुके हैं, यूक्रेन संघर्ष को यूरोप के द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे घातक युद्ध मानते हैं। उन्होंने पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की दोनों की आलोचना की है, लेकिन अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने से परहेज किया है। इस संदर्भ में, परमाणु अभ्यास को रूस की ओर से एक अप्रत्यक्ष संदेश के रूप में देखा जा रहा है, खासकर जब यूक्रेन युद्ध के चार वर्ष पूरे होने को हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और विशेषज्ञ विश्लेषण:
यह विकास वैश्विक कूटनीति में नई अनिश्चितता पैदा कर रहा है। यूरोपीय संघ और नाटो ने रूस के अभ्यास पर चिंता जताई है, जबकि अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि यह “अस्थिरता बढ़ाने वाला कदम” है। विशेषज्ञों के अनुसार, पुतिन का यह निर्णय यूक्रेन पर रूसी कब्जे वाली जमीनों को मान्यता दिलाने की दिशा में दबाव बनाने का हिस्सा हो सकता है। इतिहास में भी, यूक्रेन संकट के महत्वपूर्ण मोड़ों पर रूस ने अपनी परमाणु क्षमता का जिक्र कर पश्चिम को चेताया है।
ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी ने गुमनाम रूप से कहा कि बैठक की स्थगिति दोनों नेताओं के बीच विश्वास की कमी को उजागर करती है। एक ओर ट्रंप शांति के लिए जल्दबाजी में हैं, वहीं पुतिन लंबी अवधि की रणनीति पर जोर दे रहे हैं। इस बीच, यूक्रेन ने अंतरराष्ट्रीय समर्थन की अपील की है, दावा करते हुए कि रूस की कार्रवाइयां शांति प्रयासों को कमजोर कर रही हैं।
शांति की राह में बाधाएं:
यह घटना यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की आशाओं पर पानी फेर रही है, जहां लाखों लोग प्रभावित हो चुके हैं। पुतिन का परमाणु अभ्यास, भले ही पूर्व-नियोजित हो, ट्रंप के साथ संबंधों में तनाव को बढ़ा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब यह सोचना होगा कि कैसे इन शक्तिशाली नेताओं के बीच संवाद को पुनर्जीवित किया जाए। क्या यह स्थगिति एक अस्थायी रुकावट है या लंबे संघर्ष का संकेत? समय ही बताएगा।
