By: Ravindra Sikarwar
भारत और रूस के संबंधों के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चार साल बाद भारत पहुंचे। उनके स्वागत में राष्ट्रपति भवन में राजकीय सम्मान के साथ 21 तोपों की सलामी दी गई और इस अवसर पर औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी प्रस्तुत किया गया।
समारोह के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, सेना के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।
नई दिल्ली में हुआ भव्य स्वागत
पुतिन 4 दिसंबर की शाम दिल्ली के पालम एयरबेस पहुंचे। एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्मजोशी से उन्हें गले लगाकर स्वागत किया, जिसने दोनों देशों की मित्रता और राजनयिक संबंधों का संदेश दुनिया को दिया।
इसके बाद पीएम मोदी ने उनके सम्मान में एक विशेष निजी रात्रिभोज आयोजित किया जहां दोनों नेताओं ने अनौपचारिक बातचीत की और द्विपक्षीय संबंधों, निवेश तथा वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा किए।
महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि
राष्ट्रपति भवन में औपचारिक समारोह के बाद व्लादिमीर पुतिन ने राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उनके साथ उच्च स्तरीय रूसी प्रतिनिधिमंडल मौजूद था जिसमें सात मंत्री शामिल थे।
भारत-रूस रणनीतिक वार्ताओं की शुरुआत
इस दौरे में पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच दो महत्वपूर्ण बैठकें निर्धारित हैं, जिनमें से एक बंद कमरे में होगी। यह बैठकें रक्षा, व्यापार, अंतरिक्ष सहयोग, ऊर्जा, शिक्षा, नवाचार, बुनियादी ढांचे और तकनीकी विकास पर केंद्रित रहेंगी।
संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देशों के बीच 25 से अधिक समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिनसे व्यापार और निवेश में तेजी आएगी।
भारत-रूस बिजनेस फोरम का आयोजन
पुतिन की यात्रा के दौरान भारत-रूस बिजनेस फोरम का आयोजन भी किया गया जिसमें देश के शीर्ष उद्योगपति और कारोबारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। यहां दोनों देशों ने ऊर्जा, रक्षा उत्पादन, आईटी, मशीन निर्माण, औद्योगिक विकास और कृषि तकनीक के साझा सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
फोरम का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती देना और अगले दशक के लिए विकास रोडमैप तैयार करना है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा भोज
शाम को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने व्लादिमीर पुतिन के सम्मान में भोज आयोजित किया, जिसमें राजनीतिक, सैन्य और औद्योगिक जगत की हस्तियां शामिल हुईं। इस अवसर पर दोनों देशों के सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों की झलक दिखाई दी।
भारत-रूस संबंधों के लिए अहम दौरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत और रूस के लंबे समय से चले आ रहे भरोसे भरे रिश्तों में नई ऊर्जा का संचार करेगी। खास तौर पर रक्षा सौदों, अंतरिक्ष सहयोग और व्यापारिक साझेदारी को इस दौरे से बड़ा लाभ मिलेगा।
समारोहों और बैठकों के बाद पुतिन देर रात मॉस्को के लिए प्रस्थान कर गए।
यह दौरा संकेत देता है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद भारत और रूस आज भी रणनीतिक साझेदार हैं और आने वाले वर्षों में यह सहयोग और मजबूत होने के आसार हैं।
