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by-Ravindra Sikarwar

मुंबई: महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) ने 27 अक्टूबर 2025 को पुणे के कोंढवा इलाके से 35 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर जुबैर हंगारगेकर को गिरफ्तार किया। उन पर पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-कायदा के साथ संबंध रखने और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने का गंभीर आरोप है। एटीएस ने विशेष अदालत को बताया कि आरोपी के पास से बरामद सामग्री से साबित होता है कि वह महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में आतंकी हमलों की योजना बना रहा था। इस गिरफ्तारी से पुणे में सक्रिय एक बड़े कट्टरपंथी नेटवर्क का पर्दाफाश होने की संभावना है, जो 2023 के मालेगांव बम विस्फोट साजिश से जुड़ा हो सकता है। कोर्ट ने हंगारगेकर को 4 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया, जबकि उनके एक साथी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।

गिरफ्तारी का पूरा ब्योरा: चेन्नई से लौटते ही ट्रेन स्टेशन पर धर दबोचा
एटीएस की यह कार्रवाई पिछले एक महीने से चली आ रही निगरानी का नतीजा है। हंगारगेकर पर नजर रखी जा रही थी, क्योंकि खुफिया इनपुट्स में उनके नाम का जिक्र आया था। 27 अक्टूबर को वह चेन्नई से एक सामाजिक आयोजन में भाग लेकर पुणे रेलवे स्टेशन पर लौटे। एटीएस की टीम ने वहां उनका इंतजार किया और उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया। साथ ही, उनके एक करीबी मित्र को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।

  • स्थान: पुणे रेलवे स्टेशन से गिरफ्तारी, उसके बाद कोंढवा स्थित उनके घर पर छापेमारी।
  • समय: शाम करीब 6 बजे, जब ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रुकी।
  • साथी की भूमिका: मित्र को संदेह है कि वह हंगारगेकर के साथ चेन्नई गया था। पूछताछ में खुलासा हो सकता है कि दोनों ने वहां कट्टर साहित्य का आदान-प्रदान किया।
  • तकनीकी ट्रैकिंग: एटीएस ने मोबाइल लोकेशन, ईमेल और सोशल मीडिया एक्टिविटी का विश्लेषण कर आरोपी को ट्रैक किया।

एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हंगारगेकर का नाम 9 अक्टूबर को पुणे के विभिन्न इलाकों में की गई छापेमारियों से जुड़ा। तब 19 लैपटॉप और 40 मोबाइल फोन जब्त किए गए थे, जिनकी फॉरेंसिक जांच में अल-कायदा से संबंधित डिजिटल सामग्री मिली।”

आरोपी का प्रोफाइल: सोलापुर से पुणे तक का सफर
जुबैर हंगारगेकर सोलापुर (महाराष्ट्र) के मूल निवासी हैं और बी.टेक की डिग्री धारक हैं। वह पुणे के कल्याणीनगर स्थित एक निजी आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर टेस्टर और डेटाबेस डेवलपर के रूप में कार्यरत थे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, वह एक शांत स्वभाव के व्यक्ति थे, जो पत्नी और दो बच्चों के साथ कोंढवा में रहते थे। लेकिन एटीएस की जांच में पता चला कि वह ऑनलाइन कट्टरपंथी सर्कल में सक्रिय थे।

विवरणजानकारी
नामजुबैर हंगारगेकर
उम्र35 वर्ष
पेशासॉफ्टवेयर टेस्टर और डेटाबेस डेवलपर (कल्याणीनगर आईटी फर्म)
निवासकोंढवा, पुणे (पत्नी और दो बच्चों के साथ)
शिक्षाबी.टेक
मूल स्थानसोलापुर, महाराष्ट्र

एटीएस के अनुसार, हंगारगेकर ने 2023 में पुणे के ही कुछ अन्य गिरफ्तार आतंकवादियों से संपर्क विकसित किया था, जो मुंबई, पुणे और गुजरात में बम विस्फोट की साजिश रच रहे थे। एनआईए की जांच में सामने आया था कि यह गिरोह कोल्हापुर और सतारा के जंगलों में ड्रोन बम प्रशिक्षण ले रहा था। हंगारगेकर का नाम सौराष्ट्र मॉड्यूल से भी जुड़ाव का संदेह है, जो अल-कायदा की भारतीय शाखा है।

बरामद सामग्री: कट्टर साहित्य और डिजिटल सबूत
हंगारगेकर के घर और डिवाइसों की तलाशी में एटीएस को कई आपत्तिजनक चीजें मिलीं:

  • अल-कायदा साहित्य: प्रिंटेड किताबें और ब्रोशर, जो जिहादी विचारधारा को बढ़ावा देते हैं।
  • डिजिटल फाइलें: लैपटॉप और मोबाइल से रिकवर की गई वीडियो, ऑडियो और पीडीएफ, जो युवाओं को कट्टर बनाने के लिए इस्तेमाल होती थीं।
  • संचार रिकॉर्ड: सोशल मीडिया चैट्स और ईमेल, जो सीरिया स्थित हैंडलर से जुड़े लगते हैं।
  • अन्य जब्ती: इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, दस्तावेज और नोट्स, जो आतंकी हमलों की योजना दर्शाते हैं।

ये सामग्रियां फॉरेंसिक लैब भेजी गई हैं। एटीएस का कहना है कि हंगारगेकर इनका इस्तेमाल स्थानीय युवाओं को ऑनलाइन प्रभावित करने के लिए कर रहा था। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या वह अल-कायदा के अन्य सदस्यों से सीधे संपर्क में था या अन्य चरमपंथी समूहों से जुड़ा।

कानूनी कार्रवाई: यूएपीए के तहत मुकदमा, हिरासत में भेजा

  • धारा: गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज।
  • कोर्ट सुनवाई: गिरफ्तारी के तुरंत बाद विशेष यूएपीए कोर्ट में पेश। एटीएस ने तर्क दिया कि आरोपी के पास से मिले सबूतों से साबित होता है कि वह राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में लिप्त था।
  • हिरासत: 4 नवंबर तक पुलिस रिमांड, ताकि गहन पूछताछ हो सके।
  • जांच का दायरा: डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार। संभावित रूप से और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

एटीएस ने अदालत को बताया, “आरोपी महाराष्ट्र और अन्य शहरों में हमलों की साजिश रच रहा था। उसके पास से बरामद सामग्री युवाओं को भड़काने के लिए थी।”

बड़े संदर्भ में: पुणे का कट्टरपंथी नेटवर्क और राष्ट्रीय खतरा
यह गिरफ्तारी पुणे में बढ़ते ऑनलाइन कट्टरपंथ के सिलसिले का हिस्सा है। 9 अक्टूबर को एटीएस ने कोंढवा, वानवड़ी और भोसरी में 10 स्थानों पर छापे मारे थे, जहां से जब्त सामग्री ने एक बड़े नेटवर्क का संकेत दिया। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, आईएसआईएस और अल-कायदा जैसे संगठन भारत में भौतिक आधार न होने पर भी डिजिटल माध्यम से युवाओं को भड़का रहे हैं। सीरिया से संचालित ये ऑपरेशन 2025 में 115 हमलों के साथ मजबूत हो चुके हैं, जबकि 2024 में 72 थे।

पुणे पहले भी आतंकी साजिशों का केंद्र रहा है। 2023 में एनआईए ने इसी इलाके से एक गिरोह पकड़ा था, जो ड्रोन से बम गिराने का प्रशिक्षण ले रहा था। हाल ही में दिल्ली और भोपाल से आईएस से जुड़े दो युवाओं की गिरफ्तारी ने राष्ट्रीय चिंता बढ़ाई है। एटीएस का यह अभियान ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

आगे की जांच और चिंताएं:
एटीएस अब हंगारगेकर के डिजिटल फुटप्रिंट का गहन विश्लेषण कर रही है। क्या वह अन्य आईटी प्रोफेशनल्स को निशाना बना रहा था? क्या पुणे में एक ‘डिजिटल सेल’ सक्रिय है? ये सवाल जांच के केंद्र में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी हब जैसे शहरों में युवा पेशेवरों का कट्टर होना चिंताजनक है, क्योंकि उनकी तकनीकी जानकारी हमलों को आसान बना सकती है।

यह मामला भारत की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत पर जोर देता है। एटीएस ने अपील की है कि संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों की सूचना दी जाए। जांच जारी है, और जल्द ही और खुलासे हो सकते हैं।

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