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by-Ravindra Sikarwar

हेग, नीदरलैंड्स: हेग में नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने एकत्र होकर गठबंधन की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इन प्रदर्शनों का मुख्य उद्देश्य नाटो के सैन्य विस्तार, हथियारों पर बढ़ते खर्च और संघर्षों में इसकी भूमिका पर सवाल उठाना था। प्रदर्शनकारियों ने शांति, कूटनीति और वैश्विक सहयोग की वकालत की।

विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य:
हेग में नाटो मुख्यालय के पास आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में विभिन्न शांति समूहों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार संगठनों और युद्ध-विरोधी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने कई बैनर और पोस्टर पकड़े हुए थे, जिन पर “युद्ध नहीं, शांति चाहिए”, “नाटो भंग करो”, “हथियारों पर खर्च बंद करो”, और “कूटनीति ही समाधान है” जैसे नारे लिखे हुए थे।

इन प्रदर्शनों का केंद्रीय बिंदु नाटो के बढ़ते सैन्य बजट पर चिंता व्यक्त करना था, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया भर में गरीबी, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य सेवा जैसी महत्वपूर्ण समस्याओं के लिए धन की कमी है। प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि नाटो का सैन्य विस्तार केवल तनाव बढ़ाता है और संघर्षों को बढ़ावा देता है, जबकि वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और कूटनीति की आवश्यकता है।

प्रमुख माँगें और चिंताएँ:
विरोध प्रदर्शनों में कई प्रमुख माँगें उठाई गईं:

  1. सैन्य खर्च में कटौती: प्रदर्शनकारियों ने नाटो सदस्य देशों से हथियारों और सैन्य अभियानों पर खर्च कम करने और उस धन को सामाजिक कार्यक्रमों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और पर्यावरण संरक्षण में लगाने की मांग की।
  2. नाटो का विस्तार रोको: कई प्रदर्शनकारियों ने नाटो के पूर्वी यूरोप में लगातार विस्तार पर चिंता व्यक्त की, जिसे वे रूस के साथ अनावश्यक तनाव का कारण मानते हैं। उन्होंने कहा कि यह विस्तार सुरक्षा के बजाय अस्थिरता पैदा कर रहा है।
  3. कूटनीति को प्राथमिकता: प्रदर्शनकारियों ने सरकारों से सैन्य हस्तक्षेप के बजाय बातचीत और कूटनीति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय विवादों को हल करने का आग्रह किया। उनका मानना था कि नाटो की सैन्य-केंद्रित नीतियां अक्सर संघर्षों को बढ़ाती हैं।
  4. युद्ध-विरोधी संदेश: कई वक्ताओं ने यूक्रेन और गाजा सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संघर्षों की निंदा की और नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय सहायता पर जोर दिया।

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की भूमिका:
हेग में शिखर सम्मेलन के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नाटो मुख्यालय के एक सुरक्षित दूरी पर रखा, ताकि सम्मेलन की कार्यवाही बाधित न हो। हालांकि, प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को अपना विरोध दर्ज कराने की अनुमति दी, लेकिन यह सुनिश्चित किया कि सार्वजनिक व्यवस्था बनी रहे।

निष्कर्ष:
हेग में नाटो शिखर सम्मेलन के खिलाफ हुए ये विरोध प्रदर्शन इस बात को रेखांकित करते हैं कि दुनिया के कई हिस्सों में लोग सैन्यवादी दृष्टिकोणों पर सवाल उठा रहे हैं और शांतिपूर्ण समाधान, कूटनीति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की ओर बढ़ने का आह्वान कर रहे हैं। इन आवाजों को सुनना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति से ही नहीं, बल्कि समझ, संवाद और साझा मानवीय मूल्यों से भी आती है।

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