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by-Ravindra Sikarwar

भारत सरकार मौजूदा चार-स्लैब वाली जीएसटी प्रणाली को सरल बनाने के लिए एक बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। इस प्रस्तावित बदलाव के तहत जीएसटी को दो-स्तरीय संरचना में बदला जाएगा, जिसमें 5% और 18% की दरें होंगी। इसके अलावा, लग्जरी और ‘सिन गुड्स’ (जैसे तंबाकू और शराब) के लिए 40% की एक अलग दर होगी। इस कदम का उद्देश्य घरेलू खपत को बढ़ावा देना, व्यवसायों के लिए अनुपालन को आसान बनाना और मुकदमों को कम करना है। यह बदलाव दिवाली 2025 तक लागू होने की संभावना है।

प्रस्तावित दो-स्तरीय जीएसटी संरचना का विवरण:

वर्तमान संरचना: वर्तमान जीएसटी में चार कर स्लैब हैं: 5%, 12%, 18% और 28%

प्रस्तावित नई संरचना:

  • 5% स्लैब: आवश्यक वस्तुएं, दैनिक उपयोग की चीजें, भोजन और कपड़े जैसी वस्तुओं पर यह दर लागू होगी।
  • 18% स्लैब: यह एक मानक दर होगी, जिसमें अधिकांश वस्तुएं और सेवाएं शामिल होंगी जो वर्तमान में 12% और 28% के दायरे में आती हैं।
  • 40% स्लैब: लग्जरी और ‘सिन गुड्स’ पर यह विशेष उच्च दर लगाई जाएगी, जो वर्तमान के 28% स्लैब में कुछ वस्तुओं की जगह लेगी।

स्लैब में बदलाव:

  • वर्तमान में 12% के दायरे में आने वाली लगभग 99% वस्तुएं 5% स्लैब में चली जाएंगी।
  • 28% के दायरे में आने वाली लगभग 90% वस्तुओं के 18% स्लैब में जाने की उम्मीद है।

सरलीकरण के लक्ष्य:

  • घरेलू खपत को बढ़ावा: रोजमर्रा की वस्तुओं पर कम कर दरों से उपभोक्ता खर्च बढ़ने की उम्मीद है।
  • अनुपालन को सरल बनाना: कर स्लैब की संख्या कम होने से वस्तुओं के वर्गीकरण संबंधी विवाद कम होंगे, कर प्रशासन आसान होगा और मुकदमेबाजी में कमी आएगी।
  • व्यापार करने में सुगमता: इस सरल संरचना का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए परिचालन को आसान बनाना है।
  • विसंगतियों को कम करना: इस सुधार का लक्ष्य ड्यूटी इनवर्जन को खत्म करना और पूरे अप्रत्यक्ष कर शासन को सुव्यवस्थित करना है।

संभावित प्रभाव:

  • जीडीपी वृद्धि: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के विश्लेषण के अनुसार, कर में कमी से एक साल के भीतर नॉमिनल जीडीपी वृद्धि में लगभग 0.6 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी हो सकती है।
  • सरकारी राजस्व: सरकार को संभावित राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन वह उम्मीद करती है कि बढ़े हुए खर्च और बेहतर अनुपालन से इन कमियों की भरपाई हो जाएगी।
  • बाजार पर प्रभाव: खुदरा विक्रेता और उपभोक्ता कम कीमतों की उम्मीद कर रहे हैं, और कुछ खरीदार आने वाले त्योहारी सीजन में नई दरों का लाभ उठाने के लिए अपनी खरीदारी टाल रहे हैं।

यह प्रस्तावित बदलाव न केवल उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए महत्वपूर्ण राहत ला सकता है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी एक नई गति प्रदान कर सकता है।

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