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by-Ravindra Sikarwar

सागर (मध्य प्रदेश): शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूलों में व्याप्त अनियमितताओं ने एक बार फिर सिर उठा लिया है। मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में स्थित सीएम राइज स्कूल में प्राचार्य और एक शिक्षक को शराब पीते हुए एक वायरल वीडियो में पकड़ा गया, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू कर दी है। यह घटना शनिवार, 1 नवंबर 2025 को सामने आई, जब सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से फैला। वीडियो में दोनों आरोपी व्यक्ति स्कूल परिसर के अंदर ही शराब का सेवन करते और हंसते-मजाक करते नजर आ रहे हैं। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर आक्रोश पैदा किया है, बल्कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘सीएम राइज स्कूल’ योजना की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग ने दोनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा की है, जबकि अभिभावक संगठनों ने पूरे प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग की है।

घटना का पूरा ब्यौरा: स्कूल परिसर में शराब पार्टी का वीडियो वायरल
यह शर्मनाक घटना बंडा के सीएम राइज स्कूल में दोपहर के समय घटी, जब स्कूल में पढ़ाई का समय चल रहा था। वायरल वीडियो की अवधि लगभग 45 सेकंड की है, जिसमें प्राचार्य (नाम गोपनीय) और एक सहायक शिक्षक (नाम अज्ञात) स्कूल के एक कमरे में बैठे शराब के गिलास थामे हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में वे एक-दूसरे से बातचीत करते हुए हंस रहे हैं, और पृष्ठभूमि में शराब की बोतलें भी नजर आ रही हैं। वीडियो को किसी सहकर्मी या स्टाफ सदस्य ने ही शूट किया लगता है, जो बाद में सोशल मीडिया पर अपलोड हो गया। फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो में प्राचार्य कहते सुने जा सकते हैं, “यहां तो सब कुछ हमारा ही है,” जो उनकी लापरवाही को उजागर करता है।

स्कूल में उस समय छात्र मौजूद थे, हालांकि वीडियो में वे दिखाई नहीं दे रहे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यह घटना स्कूल के प्रशासनिक ब्लॉक में हुई, जहां आमतौर पर मीटिंग या आराम के लिए उपयोग होता है। वीडियो वायरल होते ही स्थानीय लोगों और अभिभावकों में रोष फैल गया। कई अभिभावकों ने स्कूल पहुंचकर विरोध दर्ज कराया, और शिक्षा विभाग को शिकायत भेजी। पुलिस ने वीडियो को साक्ष्य के रूप में दर्ज किया है, और अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पूछताछ जारी है। सागर जिला पुलिस अधीक्षक ने पुष्टि की कि मामला संज्ञेय अपराध के दायरे में आता है, क्योंकि यह सरकारी संपत्ति पर शराब का सेवन है।

सीएम राइज स्कूल योजना: क्या है यह, और क्यों है यह विवादास्पद?
सीएम राइज स्कूल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की एक प्रमुख पहल है, जो राज्य के पिछड़े क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने के लिए शुरू की गई। यह योजना 2023 में लॉन्च हुई, जिसमें 700 से अधिक स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। सागर का यह स्कूल भी इसी योजना का हिस्सा है, जहां नवीनतम लैब, स्मार्ट क्लासरूम और खेल सुविधाएं उपलब्ध हैं। योजना का उद्देश्य ग्रामीण बच्चों को शहरी स्तर की शिक्षा देना है, और इसके लिए केंद्र सरकार से भी सहायता ली गई है।

हालांकि, इस घटना ने योजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठा दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षकों की भर्ती और निगरानी में ढील ऐसी अनियमितताओं को जन्म दे रही है। सागर जिले में पिछले एक वर्ष में ही तीन ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां शिक्षकों पर शराब या अन्य नशे के सेवन का आरोप लगा। अभिभावक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजेश शर्मा ने कहा, “शिक्षक बच्चे बनते हैं, लेकिन यहां तो उल्टा हो रहा है। सरकार को तत्काल जांच करवानी चाहिए।”

पुलिस और विभागीय कार्रवाई: जांच के दायरे में क्या-क्या?
सागर पुलिस ने वीडियो के आधार पर आईपीसी की धारा 510 (सार्वजनिक स्थान पर नशा) और 294 (अश्लील कृत्य) के तहत मामला दर्ज किया है। थाना प्रभारी ने बताया कि दोनों आरोपियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं, और सोमवार को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। यदि दोष सिद्ध हुआ, तो नौकरी से बर्खास्तगी के साथ-साथ आपराधिक मुकदमा भी चलेगा। शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने दोनों को तत्काल निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया है। विभागीय जांच समिति गठित की गई है, जो स्कूल के अन्य स्टाफ से बयान लेगी और वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि करेगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी संज्ञान लिया है, और शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने ट्वीट कर कहा, “शिक्षकों की गरिमा बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।” विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस ने इसे सरकार की विफलता बताया, और विधानसभा में चर्चा की मांग की। स्थानीय स्तर पर स्कूल के बाहर प्रदर्शन हुए, जहां अभिभावकों ने “शिक्षक सुधारो, स्कूल बचाओ” के नारे लगाए।

समाजिक प्रतिक्रिया और व्यापक प्रभाव: शिक्षा पर खतरा
यह घटना सोशल मीडिया पर तूफान ला चुकी है। ट्विटर पर #SharabInSchool ट्रेंड कर रहा है, जहां हजारों यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कीं। एक अभिभावक ने लिखा, “हम बच्चे स्कूल भेजते हैं सीखने के लिए, नशा सिखाने के लिए नहीं।” विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं छात्रों के मनोबल को तोड़ती हैं और ड्रॉपआउट रेट बढ़ाती हैं। मध्य प्रदेश में पहले भी सागर, कटनी और सीहोर जैसे जिलों में समान मामले सामने आ चुके हैं, जहां शिक्षकों को नशे की लत ने विवादों में डाला।

शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. राकेश पांडे ने कहा, “शिक्षकों के लिए नियमित ट्रेनिंग और मनोवैज्ञानिक जांच जरूरी है। सीएम राइज जैसे प्रोजेक्ट्स की सफलता प्रशिक्षकों पर निर्भर है।” अभिभावकों ने मांग की है कि स्कूलों में सीसीटीवी अनिवार्य हो और रैंडम चेकअप शुरू किए जाएं। यह घटना राज्य के शिक्षा तंत्र को झकझोर रही है, और उम्मीद है कि इससे सबक लेकर सख्त कदम उठाए जाएंगे। सागर के इस स्कूल में अब अस्थायी प्राचार्य नियुक्त किया गया है, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो। यह त्रासदी एक चेतावनी है कि शिक्षा के रखवाले ही यदि लापरवाह हों, तो भविष्य अंधकारमय हो सकता है।

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