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by-Ravindra Sikarwar

पटना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बिहार में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत, 75 लाख महिला लाभार्थियों को स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पहली किश्त के रूप में ₹10,000 हस्तांतरित किए गए। यह महत्वाकांक्षी योजना, जो विधानसभा चुनावों से पहले शुरू की गई है, बिहार की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

योजना का उद्देश्य:
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का मुख्य लक्ष्य बिहार की महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना और उनकी आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है। इस योजना के तहत, महिलाओं को छोटे व्यवसाय, जैसे सिलाई, ब्यूटी पार्लर, किराना दुकान, और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में अपना उद्यम शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।

पहली किश्त का हस्तांतरण:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वर्चुअल समारोह के दौरान 75 लाख महिला लाभार्थियों के बैंक खातों में ₹10,000 की पहली किश्त हस्तांतरित की। इस समारोह में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, अन्य वरिष्ठ मंत्री, और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल थे। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में जमा की गई, जिससे पारदर्शिता और त्वरित वितरण सुनिश्चित हुआ। इस योजना के तहत, लाभार्थियों को कुल ₹30,000 तक की सहायता तीन किश्तों में दी जाएगी, जो उनके व्यवसाय को शुरू करने और स्थापित करने में मदद करेगी।

लाभार्थियों का चयन:
लाभार्थियों का चयन एक पारदर्शी और व्यवस्थित प्रक्रिया के माध्यम से किया गया। बिहार सरकार ने इसके लिए एक व्यापक सर्वेक्षण किया, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली, और स्वरोजगार शुरू करने की इच्छुक महिलाओं को प्राथमिकता दी गई। लाभार्थियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, और अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाएं भी शामिल हैं। आवेदन प्रक्रिया को सरल रखा गया, और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पंजीकरण की सुविधा प्रदान की गई।

योजना का महत्व:
यह योजना बिहार के आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है। बिहार, जहां महिलाओं की आर्थिक भागीदारी राष्ट्रीय औसत से कम रही है, इस योजना से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की उद्यमशीलता को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल महिलाओं की आय बढ़ाएगा, बल्कि परिवारों और समुदायों की समग्र आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करेगा। इसके अलावा, यह योजना बिहार में छोटे और मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

राजनैतिक और सामाजिक संदर्भ:
यह योजना विधानसभा चुनावों से ठीक पहले शुरू की गई है, जिसे राजनैतिक हलकों में एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। बिहार में महिलाएं मतदाता आधार का एक बड़ा हिस्सा हैं, और उनकी आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित यह योजना सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, विपक्ष ने इसकी टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं, लेकिन योजना की व्यापक स्वीकार्यता और तत्काल प्रभाव ने इसे जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया है।

लाभार्थियों की प्रतिक्रिया:
लाभार्थियों ने इस योजना को जीवन बदलने वाला बताया है। पटना की एक लाभार्थी, रीता देवी ने कहा, “इस ₹10,000 की मदद से मैं एक छोटा सिलाई केंद्र शुरू कर सकती हूं। यह मेरे परिवार के लिए एक नई शुरुआत है।” मुजफ्फरपुर की एक अन्य लाभार्थी, शबनम खातून ने बताया कि वह इस राशि से एक किराना दुकान शुरू करना चाहती हैं, ताकि अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा सकें।

सरकार की प्रतिबद्धता:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह योजना बिहार की बेटियों और बहनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हमारा लक्ष्य है कि हर महिला अपने सपनों को साकार करे और देश के विकास में योगदान दे।” बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस योजना को राज्य के विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और इसे लागू करने में केंद्र सरकार के सहयोग की सराहना की।

भविष्य की योजनाएं:
बिहार सरकार ने संकेत दिया है कि इस योजना का दायरा भविष्य में और बढ़ाया जाएगा। इसके तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम, विपणन सहायता, और तकनीकी समर्थन प्रदान करने की योजना है ताकि महिलाएं अपने व्यवसाय को लंबे समय तक चला सकें। साथ ही, सरकार ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ साझेदारी की है ताकि लाभार्थियों को कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध हो सके।

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना बिहार की महिलाओं के लिए एक नई उम्मीद की किरण है। 75 लाख महिलाओं को ₹10,000 की पहली किश्त का हस्तांतरण इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना न केवल आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देगी, बल्कि बिहार में सामाजिक बदलाव और समावेशी विकास को भी गति देगी। चुनावों से पहले शुरू की गई यह पहल बिहार की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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