By: Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: वीर बाल दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में एक भव्य समारोह आयोजित किया गया, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के 20 असाधारण बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया। ये बच्चे 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुने गए हैं और उन्होंने साहस, खेल, कला-संस्कृति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा तथा पर्यावरण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इस पुरस्कार के माध्यम से बच्चों की प्रतिभा और साहस को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाती है, जो पूरे देश के युवाओं को प्रेरित करता है।
समारोह की विशेषता और राष्ट्रपति का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुरस्कार वितरण के दौरान बच्चों को बधाई दी और कहा कि ये पुरस्कार न केवल विजेताओं के परिवार और समुदाय को गौरवान्वित करते हैं, बल्कि देश भर के बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने वीर बाल दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिन सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों की शहादत की याद में मनाया जाता है। विशेष रूप से छोटे साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की बहादुरी को याद करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उनका बलिदान सदियों से लोगों को सत्य और न्याय के लिए लड़ने की प्रेरणा देता है।
यह पुरस्कार बच्चों में छिपी प्रतिभा को उजागर करने और उन्हें प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। विजेताओं को मेडल, नकद पुरस्कार, प्रमाण पत्र के साथ-साथ किताबें और अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।
उल्लेखनीय विजेताओं की कहानियां
इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं में कई ऐसे बच्चे शामिल हैं जिनकी कहानियां पूरे देश को प्रेरित कर रही हैं।
- साहस की मिसाल: मरणोपरांत सम्मान – बच्चों को उनके असाधारण साहस के लिए मरणोपरांत पुरस्कार दिया गया। तमिलनाडु की 8 वर्षीय व्योमा प्रिया ने अपने अपार्टमेंट के पार्क में बिजली के करंट लगे स्लाइड से एक छोटे बच्चे को बचाने की कोशिश में अपनी जान गंवा दी। इसी तरह बिहार के 11 वर्षीय कमलेश कुमार ने दुर्गावती नदी में डूबते एक अन्य बच्चे को बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी, लेकिन खुद की जान नहीं बचा सके। इनके पुरस्कार उनके माता-पिता ने ग्रहण किए। राष्ट्रपति ने इन बच्चों की बहादुरी को सलाम करते हुए कहा कि उनका बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा।
- खेल जगत की उभरती प्रतिभा: वैभव सूर्यवंशी – बिहार के 14 वर्षीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को खेल श्रेणी में सम्मानित किया गया। वैभव ने उम्र स्तर की क्रिकेट में कई रिकॉर्ड तोड़े हैं। उन्होंने आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए तेज शतक लगाया और विजय हजारे ट्रॉफी में भी शानदार प्रदर्शन किया। पुरस्कार समारोह में शामिल होने के कारण वे एक मैच से चूक गए, लेकिन यह सम्मान उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है। राष्ट्रपति ने उनके प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे युवा भारत को क्रिकेट की विश्व शक्ति बनाए रखेंगे।
- सीमा पर सैनिकों की सेवा: श्रवण सिंह – पंजाब के फिरोजपुर के 10 वर्षीय श्रवण सिंह को सामाजिक सेवा और साहस के लिए पुरस्कृत किया गया। 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब सीमा पर तनाव चरम पर था, श्रवण ने जोखिम उठाते हुए सैनिकों को दूध, चाय, लस्सी और पानी पहुंचाया। उन्होंने कहा कि सैनिकों की सेवा करना उनका कर्तव्य था। इस नन्हे योद्धा की बहादुरी ने पूरे देश का दिल जीत लिया है।
- कला और संस्कृति की नन्ही स्टार: एस्तेर लालदुहावमी हनामते – मिजोरम की 9 वर्षीय एस्तेर लालदुहावमी हनामते को कला एवं संस्कृति श्रेणी में पुरस्कार मिला। वे एक गायिका हैं जिनके यूट्यूब चैनल पर लाखों फॉलोअर्स हैं। उनके गाए गीतों की गृह मंत्री ने भी सराहना की थी। उनके पिता लोहार हैं, लेकिन एस्तेर की प्रतिभा ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
- मगरमच्छ से पिता को बचाने वाला बहादुर: अजय राज – उत्तर प्रदेश के 9 वर्षीय अजय राज ने साहस श्रेणी में पुरस्कार जीता। उन्होंने मगरमच्छ के हमले से अपने पिता को बचाने के लिए लकड़ी से वार किया और जानवर को भगा दिया। उनकी यह बहादुरी देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया।
वीर बाल दिवस का ऐतिहासिक महत्व
वीर बाल दिवस हर वर्ष 26 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन गुरु गोबिंद सिंह जी के चार पुत्रों – अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह – की शहादत की स्मृति में समर्पित है। 1705 में मुगल सेना ने इन साहिबजादों की हत्या कर दी थी, लेकिन उनकी बहादुरी आज भी लोगों को प्रेरित करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 में इस दिन को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की घोषणा की थी।
इस वर्ष भी वीर बाल दिवस पर बच्चों के सम्मान से यह संदेश दिया गया कि आज के युवा भी साहिबजादों की तरह साहस और समर्पण दिखा रहे हैं। पुरस्कार विजेता बच्चों को प्रधानमंत्री से मिलने और दिल्ली दर्शन का अवसर भी मिलेगा।
ये कहानियां बताती हैं कि भारत का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। ऐसे होनहार बच्चे न केवल अपने परिवार को गौरवान्वित कर रहे हैं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा स्रोत बन रहे हैं। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में और अधिक बच्चे ऐसे कीर्तिमान स्थापित करेंगे।
