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By: Ravindra Sikarwar

मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के शहरी विकास ढांचे को राष्ट्रीय स्तर के मानकों तक पहुँचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में संकेत दिया कि जबलपुर और ग्वालियर को जल्द ही महानगरीय क्षेत्र का दर्जा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि महानगरीय क्षेत्रों में विकास का दायरा बढ़ाने के लिए सड़क संपर्क, राजमार्ग घनत्व और शहरी-ग्रामीण समन्वय पर विशेष ध्यान जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शहरी विकास की एकीकृत नीति तैयार करते समय लोक निर्माण विभाग की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीण, शहरी और औद्योगिक सभी क्षेत्रों में विकास का संतुलन बना रहे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महानगरीय सीमाओं के विस्तार के साथ आसपास के गाँवों, कस्बों और औद्योगिक इलाकों को भी योजनाबद्ध लाभ मिलना चाहिए।

राजमार्ग घनत्व बढ़ाने और ग्रीन बिल्डिंग मॉडल अपनाने के निर्देश
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजमार्ग नेटवर्क को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर के सड़क संपर्क के बराबर पहुँचाने के लिए प्रमुख शहरों और महानगरीय क्षेत्रों में राजमार्गों का घनत्व बढ़ाना आवश्यक है। इस कार्य के लिए स्थानीय सुझावों पर आधारित विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।

ऊर्जा और पानी की बचत को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सूरत के डायमंड पार्क की तर्ज पर ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट लागू करने पर बल दिया। भवन निर्माण में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, वास्तु-विज्ञान और ऊर्जा दक्षता को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई।

एक्सप्रेस-वे में ग्रामीण सुविधाओं को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक समय में एक्सप्रेस-वे तीव्र गति वाले विकास की आवश्यकता बन चुके हैं। लेकिन इनके विकास में ग्रामीण सुविधाएँ उपेक्षित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आवश्यकतानुसार फ्लाईओवर, अंडरपास, सर्विस लेन, हरियाली और बेहतर प्रकाश व्यवस्था जैसे घटकों को प्रस्तावों में अनिवार्य रूप से शामिल करने के निर्देश दिए।

सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर मानक अनुसार सुरक्षा मार्कर्स और सतत संधारण की आवश्यकता पर भी उन्होंने विभाग को आगाह किया।

सिंहस्थ 2028 की तैयारियाँ: जून 2027 तक सभी कार्य पूरे करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ 2028 से जुड़े निर्माण और विकास कार्यों को उच्च प्राथमिकता पर रखने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि दिसंबर 2025 तक सभी परियोजनाओं की शुरुआत कर दी जाए और जून 2027 तक उन्हें पूरा करना अनिवार्य है, ताकि सिंहस्थ के आयोजन से पहले अधोसंरचना पूरे रूप में तैयार हो सके।

हर नागरिक को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता
पीएचई विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन और सीवरेज जल को किसी भी परिस्थिति में जल स्रोतों में न जाने देने के लिए कड़ी योजना बनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने जल जीवन मिशन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सरपंचों और महिला समूहों को राज्य, संभाग, जिला और ग्राम स्तर पर सम्मानित करने की बात कही। लक्ष्य है कि मार्च 2027 तक मिशन के सभी कार्य पूरे कर एक राष्ट्रीय उदाहरण प्रस्तुत किया जाए।

जल संकट वाले क्षेत्रों के लिए विशेष योजना
पिछले दस वर्षों में जिन ग्रामों में लगातार जल संकट देखने को मिला है, उनकी सूची तैयार करने और समस्या का स्थायी समाधान खोजने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे निजी ट्यूबवेल चिह्नित किए जाएँ जिनमें सालभर पानी उपलब्ध रहता हो और मालिक सेवाभाव रखते हों। आवश्यकता पड़ने पर इनसे गाँवों में पानी की आपूर्ति की जाएगी।

एमपीआरडीसी और बीडीसी की बैठक में वित्तीय प्रगति की समीक्षा
बैठक में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) और भवन विकास निगम (बीडीसी) की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि वर्ष 2024–25 में 12,990 करोड़ रुपये का व्यय कर 92.89% वित्तीय लक्ष्य हासिल किया गया, जबकि 2025–26 में 30 सितंबर तक 35.11% प्रगति दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री ने विभागों को तेज गति से कार्य करने और गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी न आने देने के निर्देश दिए।

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