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By: Ravindra Sikarwar

प्रयागराज की पावन धरती एक बार फिर करोड़ों श्रद्धालुओं को अपनी गोद में समेटने को तैयार है। महाकुंभ 2025 की भव्य स्मृतियाँ अभी ताज़ा हैं और अब त्रिवेणी संगम के तट पर देश का सबसे बड़ा वार्षिक धार्मिक आयोजन माघ मेला 2026 शुरू होने में महज़ एक महीना बचा है। आगामी 3 जनवरी 2026 से शुरू हो रहे इस मेले में करीब 15 करोड़ लोगों के आने की संभावना है। मकर संक्रांति से लेकर मौनी अमावस्या तक पड़ने वाले प्रमुख स्नानों में संगम की लहरें भक्तिमय जयकारों से गूंजेंगी। इस बार मेला प्रशासन ने थीम रखी है – “स्वच्छ, सुरक्षित, सुगम और सुलभ कुंभ”, ताकि हर आने वाला यात्री बिना किसी परेशानी के पुण्य लाभ ले सके।

मेला क्षेत्र की तैयारियाँ ज़ोर-शोर से चल रही हैं। पूरे 800 हेक्टेयर में फैले मेले को सात सेक्टरों में बाँटा गया है। हर सेक्टर में अलग-अलग पुलिस चौकियाँ, स्वास्थ्य केंद्र, पेयजल व्यवस्था और शौचालय बनाए जा रहे हैं। पिछले महाकुंभ के अनुभवों से सबक लेते हुए इस बार पार्किंग को शहर से बहुत दूर बनाया जा रहा है, ताकि मेला क्षेत्र में वाहनों का दबाव कम रहे। श्रद्धालुओं को संगम तक पहुँचाने के लिए मुफ्त इलेक्ट्रिक शटल बसें, बैटरी रिक्शा और विशेष पुलों का जाल बिछाया जा रहा है। भीड़ प्रबंधन के लिए AI आधारित कैमरे और ड्रोन निगरानी का भी इस्तेमाल होगा। मोबाइल नेटवर्क की समस्या न हो, इसके लिए सभी बड़ी टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर सैकड़ों अस्थायी टावर लगाए जा रहे हैं।

माघ मेले का औपचारिक शुभारंभ गंगा पूजन के साथ हो चुका है। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस आयुक्त जोगेन्द्र कुमार और जिलाधिकारी मनीष वर्मा सहित तमाम आला अधिकारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माँ गंगा से मेले के निर्विघ्न संपन्न होने की प्रार्थना की। मेलाधिकारी ऋषि राज ने बताया कि इस बार अखाड़ों की संख्या भी बढ़ाई गई है और साधु-संतों के लिए अलग से भव्य कैंप तैयार किए गए हैं। कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष कल्पवास क्षेत्र बनाया गया है, जहाँ बिजली, पानी, सुरक्षा और चिकित्सा की चौबीसों घंटे व्यवस्था रहेगी।

महाकुंभ 2025 के बाद यह पहला बड़ा धार्मिक आयोजन होने के कारण उत्तर प्रदेश सरकार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। संगम तट को चौड़ा और गहरा करने का काम पूरा हो चुका है, जिससे एक साथ लाखों लोग स्नान कर सकें। स्वच्छता के लिए जगह-जगह डस्टबिन, बायो-टॉयलेट और सफाई कर्मियों की बड़ी टीम तैनात की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि इस बार माघ मेला न सिर्फ आध्यात्मिक बल्कि तकनीकी और व्यवस्थागत रूप से भी विश्व स्तर का आयोजन होगा। आस्था, संस्कृति और आधुनिकता का यह अनुपम संगम एक बार फिर दुनिया को भारत की सनातन परंपरा का दर्शन कराएगा।

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