By: Ravindra Sikarwar
Prayagraj news: नए साल के साथ ही उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 44 दिवसीय माघ मेला 2026 का भव्य शुभारंभ हो गया है। पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व पर संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे हैं।
संगम तट पर आस्था और संस्कृति का महासंगम
गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। माघ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सनातन परंपरा, भारतीय संस्कृति और आधुनिक व्यवस्थाओं का अद्भुत संगम है। पहले स्नान पर्व पर सनातनी किन्नर अखाड़े ने अमृत स्नान किया। अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्या नंद गिरी (टीना मां) ने संगम में स्नान कर लोक कल्याण की कामना की।
पौष पूर्णिमा स्नान पर रिकॉर्ड भीड़
मेला अधिकारी ऋषि राज के अनुसार, पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व पर सुबह 8 बजे तक करीब 6.5 लाख श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके थे। पूरे दिन में 25 से 30 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। श्रद्धालुओं ने प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं को बेहतर और सुचारू बताया।
श्रद्धालुओं के लिए पुख्ता इंतजाम
मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि स्नान घाटों पर चेंजिंग रूम, मेडिकल सुविधा और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने अनुमानित 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन को ध्यान में रखते हुए मेला क्षेत्र को पूरी तरह तैयार किया है।
माघ मेले में हेलीकॉप्टर सेवा और पैरा ग्लाइडिंग
इस बार माघ मेला 2026 में धार्मिक आयोजन के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा और पैरा ग्लाइडिंग की शुरुआत की गई है। इसके अलावा सांस्कृतिक संध्याओं में देश के प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
मेले की सुरक्षा के लिए
- 17 अस्थायी थाने
- 42 पुलिस चौकियां
- ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी
- वॉच टावर और बैरिकेडिंग
की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 3800 रोडवेज बसें, 75 ई-बसें और 500 से अधिक ई-रिक्शा चलाए जा रहे हैं। साथ ही 17 फायर स्टेशन और लगभग 3300 सफाईकर्मी तैनात हैं।
माघ मेला 2026 के प्रमुख स्नान पर्व
- 3 जनवरी
- 14 जनवरी
- 18 जनवरी
- 23 जनवरी
- 1 फरवरी
- 15 फरवरी
श्रद्धालुओं के लिए सुविधा केंद्र, होल्डिंग एरिया और मेडिकल सेवाएं पूरी तरह सक्रिय हैं, ताकि मेला शांतिपूर्ण और सुरक्षित रूप से संपन्न हो सके।
