by-Ravindra Sikarwar
दर अस सलाम (तंजानिया): पूर्वी अफ्रीकी देश तंजानिया में 29 अक्टूबर 2025 को हुए राष्ट्रीय चुनावों के बाद हालात बेकाबू हो गए हैं। विपक्षी दलों ने दावा किया है कि चुनाव परिणामों में धांधली के खिलाफ भड़की हिंसा में अब तक 700 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों घायल हैं। राजधानी दर अस सलाम, म्वांजा, अरुशा और कई अन्य शहरों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच खूनी संघर्ष जारी है। सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं, रात में कर्फ्यू लागू है और सड़कें सेना के कब्जे में हैं।
राष्ट्रपति समिया सुलुहू हसन, जिन्हें 97.66% वोट (करीब 3.19 करोड़) मिले हैं, ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की है। लेकिन विपक्षी दल ‘चाडेमा’ और अन्य विपक्षी समूहों ने इसे “फर्जी चुनाव” करार देते हुए नए चुनावों की मांग की है।
चुनाव विवाद की पृष्ठभूमि:
तंजानिया की सत्तारूढ़ पार्टी – चामा चा मापिंडुजी (CCM) 1961 से सत्ता पर काबिज है।
राष्ट्रपति समिया सुलुहू हसन, जो 2021 से इस पद पर हैं, ने अपने कार्यकाल को मजबूत करने के लिए समय से पहले चुनाव कराए। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि उन्होंने राजनीतिक विरोध को कुचलने, मीडिया पर नियंत्रण, और विपक्षी उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराने की रणनीति अपनाई।
मुख्य घटनाएं:
- प्रमुख विपक्षी दल चाडेमा (CHADEMA) को आचार संहिता न साइन करने पर चुनाव से बाहर कर दिया गया।
- विपक्षी नेता तुंडू लिस्सू को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
- एसीटी-वाजालेंडो पार्टी के नेता लुहागा म्पिना को भी कानूनी तकनीकी आधार पर निर्वाचन से प्रतिबंधित किया गया।
- चुनाव से पहले 200 से अधिक विपक्षी कार्यकर्ता लापता बताए गए।
मतदान प्रतिशत: लगभग 87% (3.76 करोड़ मतदाताओं में से)।
परिणामस्वरूप, हसन लगभग निर्विरोध विजेता घोषित हुईं।
हिंसा की घटनाओं की समयरेखा:
| तारीख | मुख्य घटनाक्रम |
| 29 अक्टूबर (बुधवार) | मतदान के दिन ही दर अस सलाम और अरुशा में झड़पें शुरू। कई मतदान केंद्रों पर फायरिंग |
| 30 अक्टूबर (गुरुवार) | हिंसा फैलती गई। सरकार ने कर्फ्यू और इंटरनेट ब्लैकआउट लागू किया। केन्या सीमा के नामांगा इलाके में टीयर गैस का इस्तेमाल। |
| 31 अक्टूबर (शुक्रवार) | तीसरे दिन राजधानी के मबागाला और गोंगो लाम्बोटो इलाकों में आगजनी और पुलिस फायरिंग। सेना को सड़कों पर उतारा गया। |
| 1 नवंबर (शनिवार) | परिणाम घोषित; राष्ट्रपति हसन की भारी जीत का ऐलान। संयुक्त राष्ट्र ने जांच की मांग की। |
मौतों के आंकड़े: अलग-अलग दावे:
| स्रोत | मौतों की संख्या | विवरण |
| चाडेमा (विपक्ष) | लगभग 700 | दर अस सलाम में 350, म्वांजा में 200+; अस्पतालों में भीड़, दर्जनों लापता। |
| कूटनीतिक सूत्र (BBC रिपोर्ट) | 500+ | विदेशी दूतावासों की पुष्टि। |
| सुरक्षा सूत्र | 700-800 | देशभर में झड़पें, फायरिंग और लापता लोगों की खबरें। |
| एमनेस्टी इंटरनेशनल | 100+ पुष्ट मौतें | सीमित जांच के आधार पर। |
| संयुक्त राष्ट्र | कम से कम 10 | आधिकारिक पुष्टि के अनुसार। |
| सरकार | सीमित घटनाएं | विदेश मंत्री ने विपक्ष के दावों को “अतिरंजित” बताया। |
दरअसल, स्थानीय मीडिया और अस्पताल सूत्रों का कहना है कि वास्तविक आंकड़ा कहीं अधिक हो सकता है।
मॉर्चरी और अस्पतालों में शवों की भीड़ है, और घायल लोगों को इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं।
सरकारी और विपक्षी पक्ष:
सरकार का रुख:
- विदेश मंत्री महमूद थाबित कोम्बो ने कहा, “देश में केवल सीमित वेंडलिज्म (तोड़फोड़) हुई है। इंटरनेट बंद करना शांति बहाली के लिए आवश्यक था।”
- सेना प्रमुख जनरल जैकब जॉन म्कुंडा ने कहा, “सेना कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए मैदान में है, लेकिन नागरिकों को डरने की जरूरत नहीं।”
विपक्ष का आरोप:
- चाडेमा प्रवक्ता जॉन किटोका ने कहा, “रात में भी गोलीबारी हो रही है। घरों से लोगों को घसीटकर ले जाया जा रहा है। यह लोकतंत्र नहीं, सैन्य शासन जैसा माहौल है।”
- जंजीबार स्थित ACT-वाजालेंडो पार्टी ने आरोप लगाया कि “बैलट बॉक्स भर दिए गए थे”** और “चुनाव आयोग सरकार के नियंत्रण में था।”
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं:
- संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि “तंजानिया में अत्यधिक बल प्रयोग की स्वतंत्र जांच जरूरी है” और “नागरिकों के मानवाधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।”
- यूके, कनाडा, नॉर्वे जैसे देशों ने भी हिंसा की निंदा करते हुए सरकार से “संयम बरतने और संवाद शुरू करने” की अपील की।
- ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने तंजानिया सरकार पर “विपक्ष की आवाज़ दबाने और मीडिया सेंसरशिप लागू करने” का आरोप लगाया।
- केन्या की सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण है; नामांगा बॉर्डर टाउन में भी प्रदर्शन फैल गया है।
मौजूदा हालात:
1 नवंबर 2025 तक तंजानिया के हालात सामान्य नहीं हुए हैं।
- जंजीबार क्षेत्र में सन्नाटा है, लेकिन सड़कों पर भारी सैन्य तैनाती बनी हुई है।
- दर अस सलाम में पर्यटक होटल और विदेशी नागरिक अपने दूतावासों से सहायता मांग रहे हैं।
- इंटरनेट सेवाएं अब भी बंद हैं और स्थानीय मीडिया रिपोर्टिंग पर पाबंदी है।
- सरकार ने जांच आयोग गठित करने का वादा किया है, लेकिन विपक्ष को उस पर भरोसा नहीं है।
विशेषज्ञों और पर्यवेक्षकों की राय:
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह हिंसा अफ्रीका के लोकतंत्र की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाती है।
तंजानिया, जो अब तक स्थिर शासन का उदाहरण माना जाता था, अब लोकतांत्रिक पतन के खतरे में दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञ टिप्पणी:
“अगर स्वतंत्र जांच नहीं हुई तो तंजानिया भी उन देशों की कतार में शामिल हो जाएगा जहां सत्ता परिवर्तन केवल नाम के लिए होता है।”
तंजानिया में 2025 का चुनाव लोकतंत्र बनाम सत्ता के संघर्ष का प्रतीक बन गया है।
जहां सरकार इसे ‘स्थिरता बनाए रखने की कार्रवाई’ कह रही है, वहीं विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इसे ‘मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन’ बता रही हैं।
सैकड़ों मौतों, इंटरनेट ब्लैकआउट और कर्फ्यू के बीच तंजानिया आज एक राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है।
दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या राष्ट्रपति हसन सरकार वास्तव में पारदर्शी जांच और संवाद के रास्ते पर चलेगी या देश एक और दीर्घकालिक अस्थिरता की ओर बढ़ेगा।
