by-Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। एक 22 वर्षीय युवा इंजीनियर, उदित गायकवाड़, अपनी पहली नौकरी मिलने की खुशी में दोस्तों के साथ पार्किंग क्षेत्र में छोटा-सा जश्न मना रहा था, तभी दो पुलिसकर्मियों ने उन पर छापा मारा। कथित तौर पर 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगने पर विवाद होने के बाद उन्होंने उदित को बेरहमी से पीटा, जिससे उसकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पाया गया कि उसके शरीर पर दर्जनों चोटें थीं, जिसमें अग्न्याशय (पैनक्रियास) को गंभीर क्षति पहुंची थी। यह हादसा 10 अक्टूबर की अंधेरी रात को इंद्रापुरी इलाके में हुआ, जहां सीसीटीवी फुटेज ने इस क्रूरता को उजागर कर दिया है।
उदित गायकवाड़ कंप्यूटर साइंस और साइबर सिक्योरिटी में बी.टेक की डिग्री हासिल करने वाला एक होनहार छात्र था, जो भोपाल के वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (वीआईटी) के सिहोर कैंपस से पढ़ाई पूरी कर चुका था। वह बैंगलोर की एक आईटी कंपनी में नौकरी पा चुका था, जहां उसे सालाना 10 से 15 लाख रुपये का पैकेज मिलना था। उदित का सपना था कि वह अपनी पढ़ाई के बाद अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करे, लेकिन किस्मत ने उसके उज्ज्वल भविष्य को हमेशा के लिए छीन लिया।
घटना की पूरी कथा इस प्रकार है: 9 अक्टूबर को उदित अपने दोस्तों के साथ सिहोर स्थित कॉलेज गया, जहां उसने अपनी डिग्री प्रमाणपत्र प्राप्त किया। यह प्रमाणपत्र उसे नई नौकरी जॉइन करने के लिए जरूरी था। डिग्री मिलने के बाद वह दोस्तों संग भोपाल लौटा और इंद्रापुरी क्षेत्र के एक पार्किंग स्पॉट पर कार खड़ी कर छोटी-सी पार्टी करने लगा। रात करीब 11 बजे शुरू हुई यह पार्टी में सात दोस्त शामिल थे, जिनमें से एक ने बताया कि वे बीयर पी रहे थे और नई जॉब की सफलता पर हंस-बोल रहे थे। उदित ने अपने पिता राजकुमार गायकवाड़ को फोन पर बताया था कि वह “कॉलेज का कुछ काम” निपटा रहा है, लेकिन असल में वह जश्न मना रहा था। राजकुमार, जो मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड में असिस्टेंट इंजीनियर हैं, ने कहा, “मैंने सोचा था कि वह जल्दी लौट आएगा। हम दिवाली साथ मनाने वाले थे।”
रात करीब 1:30 बजे, जब दोस्त उदित को घर छोड़ने के लिए कार में बैठे ही थे, तभी गश्त पर तैनात दो कांस्टेबल, संतोष बामनिया और सौरभ आर्या, वहां पहुंचे। दोस्तों के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने कार में सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने का आरोप लगाते हुए उनसे 10 हजार रुपये की मांग की, ताकि मामला “सुलझ” जाए। दोस्तों ने इसे घटाकर 1-2 हजार रुपये तक लाने की कोशिश की, लेकिन बात बिगड़ गई। उदित डर गया और अंधेरी गली में भागने लगा। दोनों पुलिसकर्मी उसके पीछे दौड़े और उसे पकड़ लिया।
सीसीटीवी वीडियो में साफ दिखाई देता है कि एक पुलिसकर्मी उदित को लाठी से पीट रहा है, जबकि दूसरा उसे पकड़े हुए है। वीडियो में उदित बिना शर्ट के पार्किंग लॉट में खड़ा नजर आता है, जहां वह दर्द से कराह रहा है। दोस्तों ने जब वहां पहुंचा, तो उदित की शर्ट फटी हुई थी और उसके सिर, कंधों, कमर, पेट और आंखों के आसपास गहरी चोटें थीं। एक दोस्त ने बताया, “हमने पुलिसवालों से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने सिर्फ पैसे की मांग जारी रखी। उदित बेहोश हो चुका था।” उदित को कार में बिठाकर दोस्त आनंद नगर पुलिस चौकी ले गए, जहां एक परिचित पुलिस अधिकारी से मदद मांगी। रास्ते में उदित को कई बार उल्टी हुई, लेकिन उसने दर्द का जिक्र नहीं किया। चौकी पर पहुंचते ही वह बेहोश हो गया।
दोस्त उसे तुरंत एक निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने अपनी असमर्थता व्यक्त की। फिर वे उसे भोपाल के एम्स अस्पताल ले गए, जहां सुबह करीब 4 बजे डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, जो एम्स के पांच डॉक्टरों की टीम ने तैयार की, ने खुलासा किया कि उदित के शरीर पर 12 से अधिक चोटें थीं। मौत का कारण “ट्रॉमा से प्रेरित शॉक” और अग्न्याशय में गंभीर क्षति बताई गई। चोटें लाठी के वारों से लगी प्रतीत होती हैं, जिसमें आंखों के पास गहरे निशान, सिर के पीछे सूजन और पेट में आंतरिक रक्तस्राव शामिल था।
उदित परिवार का इकलौता बेटा था। उसके पिता राजकुमार मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड में इंजीनियर हैं, जबकि मां सरकारी स्कूल में शिक्षिका। उदित की दो बड़ी बहनें हैं, जो इंजीनियरिंग पूरी कर शादीशुदा हैं। परिवार में इंजीनियरों और शिक्षकों की परंपरा रही है—उदित के तीन चाचा भी इंजीनियर हैं। उदित का जीजा बालाघाट में एंटी-नक्सल यूनिट में डीएसपी के पद पर तैनात है। राजकुमार ने आंसुओं भरी आवाज में कहा, “मेरा बेटा किसी जानवर की तरह मारा गया। हमने सोचा था कि वह बैंगलोर जाकर अपना करियर बनाएगा। अब मेरी पत्नी सदमे में है, बेटियां टूट चुकी हैं।” उन्होंने मांग की है कि जांच या तो स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) या सीबीआई से होनी चाहिए, क्योंकि “पुलिस खुद आरोपी है, तो निष्पक्ष जांच कैसे होगी?” परिवार ने आरोपी पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा देने की भी मांग की है।
पुलिस कार्रवाई: घटना के तुरंत बाद दोनों कांस्टेबलों को निलंबित कर दिया गया। 11 अक्टूबर को भोपाल पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। डीसीपी विवेक सिंह ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज जब्त कर लिया गया है और उदित के दोस्तों के बयान दर्ज हो रहे हैं। हालांकि, आरोपी अभी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है। जांच में वीडियो साक्ष्य और चश्मदीदों के बयानों को आधार बनाया जा रहा है।
यह घटना पुलिस की कथित बर्बरता का एक और उदाहरण बन गई है, जिसने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है। उदित के दोस्तों ने बताया कि वह फुटबॉल का शौकीन था, एडवेंचर पसंद करता था और हाल ही में इंदौर-पचमढ़ी ट्रिप पर गया था। उसके स्कूल के पूर्व सहपाठी उसे हमेशा फॉरवर्ड खिलाड़ी के रूप में याद करते हैं। उदित की मौत ने न केवल उसके परिवार को बर्बाद कर दिया, बल्कि पूरे समाज में न्याय की पुकार तेज कर दी है। पुलिस ने वादा किया है कि दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी, लेकिन परिवार को अब भी संदेह है।
यह दर्दनाक कहानी हमें याद दिलाती है कि युवाओं के सपनों को कुचलने वाली ऐसी लापरवाही और हिंसा कब रुकेगी। उदित जैसे होनहारों की मौत से समाज का नुकसान होता है, और न्याय मिलना ही एकमात्र सांत्वना हो सकता है।
