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By: Ravindra Sikarwar

कोलकाता/नादिया: पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शारीरिक रूप से उपस्थित होने का मौका नहीं मिला, लेकिन उन्होंने कोलकाता एयरपोर्ट से वर्चुअली जनसभा को संबोधित किया। घने कोहरे और खराब मौसम के कारण उनका हेलीकॉप्टर ताहिरपुर में लैंड नहीं कर सका। इसके बावजूद पीएम ने राज्य की जनता से सीधा संवाद किया और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए विकास कार्यों में सहयोग न करने का मुद्दा उठाया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल में विकास के लिए केंद्र सरकार की तरफ से धन की कोई कमी नहीं है, लेकिन राज्य सरकार कमीशनखोरी के चक्कर में उलझी हुई है। इसके कारण हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं लंबित पड़ी हैं। उन्होंने अफसोस जताया कि राज्य सरकार अगर मोदी या भाजपा का विरोध करना चाहती है तो हजारों बार करे, लेकिन इसका नुकसान बंगाल की निर्दोष जनता क्यों उठाए? पीएम ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक विरोध अलग बात है, लेकिन राज्य के विकास को बाधित करना जनता के साथ अन्याय है।

मौसम की वजह से कार्यक्रम में बाधा आने पर पीएम ने भावुक अंदाज में कहा कि वे इसे राजनीतिक रंग नहीं देना चाहते। हेलीकॉप्टर काफी देर तक आसमान में चक्कर काटता रहा, लेकिन लैंडिंग संभव नहीं हुई। इस पर उन्होंने जनता से वादा किया कि आज नहीं आ पाए तो क्या, वे जल्द ही बंगाल आएंगे और बार-बार आएंगे। यह संबोधन कोलकाता एयरपोर्ट से फोन के माध्यम से किया गया, जिसे जनसभा स्थल पर बड़े स्क्रीन के जरिए दिखाया गया।

हालांकि शारीरिक उपस्थिति नहीं हो सकी, लेकिन प्रधानमंत्री ने बंगाल को बड़ी सौगात दी। उन्होंने करीब 3,200 करोड़ रुपये की लागत वाले राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें एनएच-34 के विस्तार का काम प्रमुख है, जिससे कोलकाता और सिलीगुड़ी के बीच यात्रा का समय लगभग दो घंटे कम हो जाएगा। यह परियोजना राज्य में कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी। अन्य प्रोजेक्ट्स भी क्षेत्रीय विकास से जुड़े हैं, जो रोजगार और व्यापार के नए अवसर पैदा करेंगे।

पीएम के इन आरोपों पर तृणमूल कांग्रेस ने तुरंत पलटवार किया। पार्टी ने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए केंद्र सरकार को ही जिम्मेदार ठहराया। TMC का कहना है कि राज्य की समस्याओं की जड़ केंद्र की नीतियां हैं। केंद्र ने जीएसटी और अन्य करों के रूप में बंगाल से 6.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक वसूले हैं, लेकिन राज्य का करीब 2 लाख करोड़ रुपये का हिस्सा अभी तक नहीं दिया गया। पार्टी ने केंद्र पर बंगाल की संस्कृति और पहचान का अपमान करने का भी आरोप लगाया। TMC नेताओं का दावा है कि विकास कार्यों में बाधा केंद्र की तरफ से ही आ रही है।

यह घटना एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकार के बीच चल रहे तनाव को उजागर करती है। बंगाल में राजनीतिक माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है, और ऐसे बयान दोनों पक्षों के बीच की खाई को और गहरा कर सकते हैं। वहीं, जनता की नजर में विकास परियोजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन महत्वपूर्ण है। पीएम का वादा और नई परियोजनाओं की शुरुआत से राज्य में उम्मीद की किरण जगी है, लेकिन सहयोग की कमी इसे प्रभावित कर रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बहस होने की संभावना है।

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