by-Ravindra Sikarwar
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण राजनयिक वार्ताओं में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं, जिन्होंने भारत के विदेशी संबंधों में महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को चिह्नित किया है। इन व्यस्तताओं में संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक महत्वपूर्ण फोन कॉल, क्रोएशिया की ऐतिहासिक यात्रा और कनाडा के साथ राजनयिक सेवाओं की बहाली पर एक समझौता शामिल है।
डोनाल्ड ट्रंप के साथ स्पष्टीकरण:
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री मोदी की टेलीफोन पर हुई बातचीत एक महत्वपूर्ण विषय रही है। इस बातचीत के दौरान, पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से यह स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष विराम में संयुक्त राज्य अमेरिका की कोई मध्यस्थता भूमिका नहीं थी। यह स्पष्टीकरण उन अटकलों को खारिज करने के लिए महत्वपूर्ण था जो अमेरिका की संभावित भूमिका का सुझाव दे रही थीं। इसके अतिरिक्त, पीएम मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बातचीत के दौरान किसी भी व्यापार समझौते पर कोई चर्चा नहीं हुई। यह कॉल मुख्य रूप से आतंकवाद विरोधी प्रयासों और हाल की आतंकी घटनाओं पर भारत की प्रतिक्रिया पर केंद्रित थी, जो भारत की सुरक्षा चिंताओं पर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाती है।
क्रोएशिया की ऐतिहासिक यात्रा:
प्रधान मंत्री मोदी ने क्रोएशिया का दौरा कर एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है, क्योंकि यह किसी भारतीय प्रधान मंत्री द्वारा बाल्कन राष्ट्र की पहली यात्रा थी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना था। इस दौरान, व्यापार, प्रौद्योगिकी और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया। क्रोएशिया के साथ संबंधों को गहरा करके, भारत यूरोपीय संघ और बाल्कन क्षेत्र में अपनी रणनीतिक पहुंच का विस्तार करना चाहता है, जिससे नई आर्थिक और तकनीकी साझेदारी के अवसर खुल सकें। यह यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के पूरक के रूप में भी देखी जा रही है, जो भारत के राजनयिक पदचिह्न को विविध भौगोलिक क्षेत्रों में विस्तारित करती है।
भारत-कनाडा राजनयिक सेवाओं की बहाली:
हाल ही में, भारत और कनाडा ने अपनी राजनयिक सेवाओं को पूरी तरह से बहाल करने पर सहमति व्यक्त की है। यह समझौता दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों की अवधि के बाद आया है, जो संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतीक है। राजनयिक सेवाओं की बहाली से दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग के लिए मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और लोगों से लोगों के बीच संबंधों में सुधार की उम्मीद है। यह कदम संकेत देता है कि दोनों देश अपने संबंधों में स्थिरता और निरंतरता की दिशा में आगे बढ़ने को उत्सुक हैं, भले ही अतीत में कुछ चुनौतियां रही हों।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी की ये हालिया राजनयिक व्यस्तताएँ भारत की सक्रिय विदेश नीति को दर्शाती हैं, जो विभिन्न देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक मंच पर भारत के हितों की रक्षा करने पर केंद्रित है।
