by-Ravindra Sikarwar
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक महत्वपूर्ण टेलीफोनिक वार्ता की, जिसमें मध्य पूर्व में शांति प्रयासों के केंद्र में रहे गाजा संघर्ष के समाधान योजना पर विशेष जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ‘ऐतिहासिक गाजा शांति योजना’ की सफलता पर बधाई दी और इसकी पहली अवस्था के क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त किया। इसके अलावा, भारत-अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं में हुई प्रगति की समीक्षा की गई, जो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब वैश्विक कूटनीति में तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच शांति और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
बातचीत का पृष्ठभूमि और मुख्य बिंदु:
प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से अपनी बातचीत में गाजा क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए ट्रंप प्रशासन की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत बंधकों की रिहाई और गाजा के लोगों के लिए मानवीय सहायता में वृद्धि पर पहुंचे समझौते का स्वागत किया जाता है। ट्रंप ने इस योजना को अपनी ’20-सूत्री गाजा शांति योजना’ का हिस्सा बताया, जिसकी पहली अवस्था में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी है। भारतीय पक्ष ने इस कदम को मध्य पूर्व में स्थिरता बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना।
इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी बात की और उन्हें गाजा शांति योजना में प्रगति पर बधाई दी। उन्होंने दोनों नेताओं को संयुक्त रूप से शुभकामनाएं दीं और भारत की ओर से इस प्रयास में पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। यह वार्ता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर ट्रंप की प्रशंसा के बाद हुई, जहां मोदी ने योजना की सफलता पर खुशी जताई थी। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के किसी भी रूप की निंदा की और क्षेत्रीय शांति के लिए निरंतर संवाद बनाए रखने पर सहमति जताई।
गाजा शांति योजना: विवरण और भारत की भूमिका
ट्रंप द्वारा प्रस्तुत गाजा शांति योजना एक बहु-चरणीय कार्यक्रम है, जो संघर्षग्रस्त क्षेत्र में तत्काल राहत से लेकर दीर्घकालिक पुनर्निर्माण तक फैला हुआ है। इसकी पहली अवस्था में बंधकों की रिहाई, मानवीय सहायता की आपूर्ति और सीमित युद्धविराम शामिल है। इजरायल सरकार ने शुक्रवार को इस युद्धविराम को औपचारिक रूप से मंजूरी दी, जिससे उम्मीद जगी है कि हिंसा में कमी आएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने इस योजना को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया और कहा कि यह न केवल गाजा के निवासियों के लिए राहत लाएगी, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करेगी।
भारत ने हमेशा से मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया में संतुलित भूमिका निभाई है। इस वार्ता में मोदी ने जोर दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाता है और किसी भी हिंसक गतिविधि का समर्थन नहीं करता। उन्होंने ट्रंप से आग्रह किया कि योजना के अगले चरणों में आर्थिक सहायता और पुनर्वास पर अधिक ध्यान दिया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह सक्रिय कूटनीति न केवल क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उसकी स्थिति को मजबूत करती है, बल्कि वैश्विक मंचों पर उसकी विश्वसनीयता को भी बढ़ाती है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में प्रगति:
बातचीत का दूसरा प्रमुख एजेंडा भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं की समीक्षा था। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों पक्षों ने ‘अच्छी प्रगति’ हासिल की है और आगामी सप्ताहों में एक और दौर की चर्चा होने की संभावना है। ट्रंप प्रशासन ने भारत पर लगे टैरिफ को कम करने के लिए सद्भावना दिखाई है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि की उम्मीद है। वर्तमान में, भारत-अमेरिका व्यापार का मूल्य लगभग 200 अरब डॉलर से अधिक है, लेकिन टैरिफ और बाजार पहुंच की बाधाओं के कारण यह और बढ़ सकता है।
मोदी ने ट्रंप को बताया कि भारत डिजिटल व्यापार, कृषि उत्पादों और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। ट्रंप ने भी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और कहा कि एक मजबूत व्यापार समझौता दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाएगा। विश्लेषकों के अनुसार, गाजा योजना पर प्रशंसा से व्यापार वार्ताओं में सौहार्दपूर्ण वातावरण बना है, जो संभावित समझौते को तेज कर सकता है।
वैश्विक संदर्भ और भविष्य की संभावनाएं:
यह वार्ता ऐसे समय हुई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं से जूझ रही है। गाजा संघर्ष ने न केवल मानवीय संकट पैदा किया है, बल्कि ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी प्रभावित किया है। भारत और अमेरिका के बीच मजबूत साझेदारी इन चुनौतियों का सामना करने में सहायक सिद्ध हो सकती है। दोनों नेताओं ने जलवायु परिवर्तन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और रक्षा सहयोग जैसे अन्य मुद्दों पर भी संक्षिप्त चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप को भारत यात्रा के लिए आमंत्रित किया, ताकि व्यक्तिगत मुलाकात में इन मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हो सके। यह आमंत्रण द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकेत है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि यह बातचीत न केवल मध्य पूर्व शांति के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करती है।
शांति और समृद्धि की दिशा में कदम:
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की यह वार्ता वैश्विक कूटनीति में सकारात्मकता का संचार करती है। गाजा शांति योजना की सफलता पर बधाई और व्यापार वार्ताओं में प्रगति से पता चलता है कि दोनों देश चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट हैं। भारत की कूटनीतिक सक्रियता ने एक बार फिर साबित किया है कि वह वैश्विक शांति और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उम्मीद है कि ये प्रयास न केवल क्षेत्रीय स्थिरता लाएंगे, बल्कि वैश्विक समुदाय को भी प्रेरित करेंगे।
