by-Ravindra Sikarwar
प्रधानमंत्री मोदी का SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेना एक महत्वपूर्ण घटना है, जहां उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जैसे नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें की हैं। वैश्विक और क्षेत्रीय गतिशीलता पर इन बैठकों के निहितार्थों को करीब से देखा जा रहा है।
SCO शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जो वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण घटना है। इस सम्मेलन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है।
इस दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात की, जिनमें सबसे अहम बैठकें चीन और रूस के शीर्ष नेताओं के साथ थीं।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक:
प्रधानमंत्री मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक पर दुनिया भर की नजरें टिकी थीं। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दे मौजूद हैं। इस बैठक का मुख्य फोकस सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने और आपसी सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और सकारात्मक संवाद शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत:
प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी विस्तृत चर्चा की। भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी पुरानी है, जो रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्रों पर आधारित है।
इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर समन्वय पर विशेष ध्यान दिया गया। रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर, भारत की तटस्थ और संतुलित स्थिति की सराहना हुई है। इस मुलाकात ने दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों को और गहरा करने का काम किया।
इन द्विपक्षीय बैठकों के परिणाम आने वाले समय में न केवल इन देशों के आपसी संबंधों बल्कि वैश्विक और क्षेत्रीय गतिशीलता को भी प्रभावित कर सकते हैं। यह दर्शाता है कि भारत विश्व मंच पर एक प्रमुख और प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है।
