by-Ravindra Sikarwar
न्यूयॉर्क में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) को संबोधित करते हुए भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अगले पांच वर्षों में भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता को वर्तमान 250 गीगावाट (GW) से बढ़ाकर 550 गीगावाट तक करने की महत्वाकांक्षी योजना पर जोर दिया। अपने भाषण में, गोयल ने भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में स्थिरता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया, साथ ही स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के क्षेत्र में भारत की प्रगति को रेखांकित किया। इस घोषणा ने वैश्विक मंच पर भारत की पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं और आर्थिक सहयोग की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में ध्यान आकर्षित किया।
स्वच्छ ऊर्जा में भारत की प्रगति और लक्ष्य:
भारत ने हाल के वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। गोयल ने बताया कि भारत ने 2014 में केवल 35 गीगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता से शुरुआत की थी, जो अब 250 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। इसमें सौर, पवन, हाइड्रो और बायोमास ऊर्जा का योगदान शामिल है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य 2030 तक 550 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता हासिल करना है, जो भारत को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेता बनाएगा।” यह लक्ष्य भारत की नेट-जीरो उत्सर्जन की दिशा में प्रतिबद्धता और पेरिस समझौते के तहत जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों का हिस्सा है।
गोयल ने इस दौरान भारत की सौर ऊर्जा पहल, जैसे कि इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में सौर मॉड्यूल और बैटरी भंडारण प्रणालियों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे न केवल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि रोजगार सृजन भी होगा।
यूएस-इंडिया साझेदारी और व्यापारिक स्थिरता:
USISPF में अपने संबोधन में, गोयल ने भारत और अमेरिका के बीच मजबूत व्यापारिक और निवेश संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार 2024-25 में $200 बिलियन को पार कर गया है, और इसे अगले कुछ वर्षों में दोगुना करने का अवसर है। गोयल ने स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, जैसे कि हरित हाइड्रोजन और उन्नत बैटरी सिस्टम, में अमेरिकी निवेश की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, “भारत और अमेरिका एक-दूसरे के पूरक हैं। जहां भारत के पास विशाल बाजार, कुशल कार्यबल और नवाचार की क्षमता है, वहीं अमेरिका के पास उन्नत प्रौद्योगिकी और पूंजी है।” गोयल ने अमेरिकी कंपनियों को भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया, विशेष रूप से सौर पैनल निर्माण, पवन टरबाइन और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में।
भारत की नीतिगत पहल और चुनौतियां:
गोयल ने भारत सरकार की नीतियों, जैसे कि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और मेक इन इंडिया पहल, का उल्लेख किया, जो स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने बताया कि भारत ने हाल ही में हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत $19 बिलियन का निवेश स्वीकृत किया है, जिससे 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि, गोयल ने चुनौतियों को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के लिए बड़े पैमाने पर वित्तपोषण, तकनीकी नवाचार और बुनियादी ढांचे का विकास आवश्यक है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुंच सुनिश्चित करना और ग्रिड स्थिरता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
वैश्विक मंच पर भारत की छवि:
गोयल के भाषण ने भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक खिलाड़ी के रूप में पेश किया, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “भारत न केवल अपने लिए, बल्कि वैश्विक दक्षिण के लिए एक मॉडल प्रस्तुत कर रहा है।” USISPF में मौजूद उद्योगपतियों और नीति निर्माताओं ने भारत की इस दृष्टि की सराहना की, और कई ने इसे भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया अध्याय बताया।
पीयूष गोयल का USISPF में दिया गया भाषण भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्रांति और वैश्विक साझेदारी में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। 550 गीगावाट का लक्ष्य न केवल पर्यावरणीय, बल्कि आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। भारत और अमेरिका के बीच सहयोग इस दिशा में एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
