Bastar: बस्तर संभाग में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की बदहाली सामने आ रही है। गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक समय पर राशन नहीं पहुंच पा रहा, जबकि गोदामों में रखा अनाज लापरवाही के कारण सड़ता रहा। पीडीएस दुकानों पर कालाबाजारी के आरोप लग रहे हैं और जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता ने हालात और खराब कर दिए हैं।
Bastar: चिंतलनार और गीदम में करोड़ों का अनाज बर्बाद
सुकमा जिले के चिंतलनार गोदाम में करीब 35 लाख रुपये मूल्य का राशन वर्षों तक पड़ा रहा और अंततः खराब हो गया। वहीं दंतेवाड़ा जिले के गीदम वेयरहाउस में लगभग 18 करोड़ रुपये का चावल उचित रखरखाव न होने से नष्ट होने की स्थिति में पहुंच गया। इन दोनों मामलों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Bastar: जांच अधूरी, जिम्मेदारी तय नहीं
हैरानी की बात यह है कि दो साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह तय नहीं हो पाया कि इतनी बड़ी मात्रा में राशन खराब होने के लिए कौन जिम्मेदार है। सुकमा जिले में दो कलेक्टर बदले जा चुके हैं, लेकिन जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी। सड़े चावल की लैब जांच में उसे मानव उपयोग के अयोग्य बताया गया, जिसके बाद उसे नीलाम करने की कोशिशें भी असफल रहीं।
अमानक चावल का वितरण और शिकायतें
बस्तर जिले की कई राशन दुकानों में घटिया और फफूंद लगे चावल बांटे जाने के आरोप हैं। बकावंड ब्लॉक सहित कई इलाकों में कार्डधारकों ने अमानक चावल को लेकर आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन उनकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई। कुछ राइस मिलों से आए चावल को गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं पाया गया, जबकि नमक के पैकेटों पर पैकिंग तिथि तक दर्ज नहीं है।
कार्रवाई के दावे, जमीन पर असर नहीं
सरकार और प्रशासन की ओर से लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका असर नजर नहीं आता। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बार-बार राशन घोटाले और कालाबाजारी की शिकायतें उठाईं, पर अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। फिलहाल नए कलेक्टर को मामला सौंपा गया है और जल्द जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे गरीबों के हक की सुरक्षा की उम्मीद की जा रही है।
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