रिपोर्टर: रंजन कुमार
Patna : बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार और पारदर्शिता लाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने पटना हाईकोर्ट के माननीय न्यायमूर्ति हरीश कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय ‘परीक्षा सुधार एक्सपर्ट कमेटी’ का गठन किया है। ‘छात्र सत्याग्रह’ संगठन ने इसे राज्य सरकार का एक स्वागतयोग्य और ऐतिहासिक निर्णय करार दिया है। संगठन के संस्थापक प्रभात कुमार चंद्रवंशी ने छात्रों की समस्याओं पर ध्यान देने के लिए सरकार का आभार व्यक्त किया और इसे एक सकारात्मक पहल बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अभ्यर्थियों की कई अन्य महत्वपूर्ण मांगें अब भी विचाराधीन हैं।
युवा सलाहकार बोर्ड के गठन की मांग
Patna छात्र सत्याग्रह की प्रमुख मांगों में राज्य स्तर पर एक ‘युवा सलाहकार बोर्ड’ की स्थापना शामिल है। संगठन का मानना है कि नीति-निर्माण में छात्रों, शिक्षकों और शिक्षाविदों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए यह बोर्ड अत्यंत आवश्यक है। इससे सरकार और युवाओं के बीच संवाद बेहतर होगा और शैक्षणिक सुधारों को गति मिलेगी।
BSSC को संवैधानिक दर्जा देने पर जोर
Patna अभ्यर्थियों ने बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) को BPSC या UPSC की तर्ज पर संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत संवैधानिक दर्जा दिए जाने की मांग उठाई है। छात्रों का तर्क है कि संवैधानिक सुरक्षा मिलने से आयोग की कार्यप्रणाली में स्वायत्तता आएगी, जिससे भर्तियां अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से संपन्न हो सकेंगी।
BPSC इंटरव्यू तक पहुंचे अभ्यर्थियों को फेलोशिप में वरीयता
Patna एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव में BPSC मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण कर साक्षात्कार तक पहुंचने वाले गैर-चयनित अभ्यर्थियों के अनुभव का लाभ उठाने की बात कही गई है। संगठन का सुझाव है कि इन प्रतिभावान युवाओं को राज्य सरकार की आगामी ‘मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फेलोशिप’ योजना में विशेष वरीयता दी जानी चाहिए, ताकि उनकी क्षमता का उपयोग लोककल्याणकारी और प्रशासनिक कार्यों में किया जा सके।
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