by-Ravindra Sikarwar
जयपुर: राजस्थान के एक निजी अस्पताल में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक नर्स ने कथित तौर पर गुस्से में मरीज को गलत तरीके से IV ड्रिप (नस में सुई) लगाई, जिसके कारण मरीज का हाथ कटने के गंभीर खतरे में पड़ गया है। इस घटना ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सा कर्मियों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मरीज, जिसकी पहचान 42 वर्षीय रमेश सैनी के रूप में हुई है, को तत्काल गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में भर्ती किया गया है, और विशेषज्ञ उसका हाथ बचाने की कोशिश में जुटे हैं।
घटना का विवरण:
यह घटना जयपुर के वैशाली नगर स्थित एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में सोमवार दोपहर की है। रमेश सैनी को बुखार और डिहाइड्रेशन की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था। उनके परिवार के अनुसार, रमेश को सामान्य सलाइन ड्रिप दी जानी थी, लेकिन ड्यूटी पर तैनात नर्स, जिसका नाम प्रीति शर्मा (बदला हुआ नाम) बताया जा रहा है, ने मरीज के साथ बहस के बाद गुस्से में IV सुई गलत तरीके से लगाई। प्रत्यक्षदर्शियों और मरीज के परिजनों का कहना है कि नर्स ने सुई को बार-बार गलत नस में डालने की कोशिश की, जिससे रमेश को असहनीय दर्द हुआ और वह चीखने लगा।
रमेश की पत्नी, ममता सैनी, ने बताया, “नर्स बहुत गुस्से में थी। मेरे पति ने बस इतना पूछा था कि सुई क्यों बार-बार लगाई जा रही है, लेकिन नर्स ने चिल्लाते हुए कहा कि वह अपना काम जानती है। इसके बाद उसने सुई को इतनी जोर से और गलत तरीके से डाला कि रमेश का हाथ सूजने लगा।” कुछ ही घंटों में रमेश का हाथ नीला पड़ गया, और उन्हें तेज दर्द के साथ-साथ सुन्नपन की शिकायत होने लगी।
चिकित्सकीय जटिलताएं:
डॉक्टरों की प्रारंभिक जांच में पता चला कि IV सुई गलत नस में लगने से रक्त प्रवाह बाधित हो गया, जिसके कारण ऊतकों को ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक गई। इससे हाथ में गैंग्रीन (ऊतक सड़न) का खतरा पैदा हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय रहते रक्त प्रवाह बहाल नहीं हुआ, तो रमेश का दाहिना हाथ काटना पड़ सकता है। मरीज को तुरंत ICU में स्थानांतरित किया गया, जहां वैस्कुलर सर्जन की एक टीम उनकी स्थिति पर नजर रख रही है। डॉ. अजय मेहता, जो इस मामले को देख रहे हैं, ने बताया, “गलत IV इंसर्शन से नस में रुकावट और ऊतक क्षति हुई है। हम सर्जरी और दवाओं के जरिए हाथ बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन स्थिति गंभीर है।”
परिवार का गुस्सा और कानूनी कार्रवाई:
रमेश के परिवार ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने स्थानीय पुलिस स्टेशन में नर्स और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। परिवार का कहना है कि नर्स की लापरवाही और गैर-पेशेवर व्यवहार के कारण रमेश की जान खतरे में है। ममता ने कहा, “मेरे पति एक मजदूर हैं, और उनका दाहिना हाथ उनके लिए सब कुछ है। अगर उनका हाथ कट गया, तो हमारा परिवार बर्बाद हो जाएगा।”
पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है और नर्स से पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि नर्स को उस दिन ड्यूटी के दौरान कई मरीजों से उलझने की शिकायत मिली थी। अस्पताल प्रशासन ने इस घटना पर खेद जताया है और आंतरिक जांच शुरू करने का दावा किया है। अस्पताल के निदेशक डॉ. संजय अग्रवाल ने कहा, “हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। मरीज की स्थिति की निगरानी की जा रही है, और हम हर संभव मदद प्रदान करेंगे।”
विशेषज्ञों की राय:
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि IV ड्रिप लगाना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इसे सावधानी और प्रशिक्षण के साथ करना जरूरी है। गलत तरीके से सुई लगाने से नसों को नुकसान, रक्त प्रवाह में रुकावट, या गंभीर मामलों में ऊतक सड़न जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। डॉ. राकेश शर्मा, एक वैस्कुलर सर्जन, ने बताया, “नर्सों को तनाव में भी धैर्य रखना चाहिए। गलत इंसर्शन से मरीज की जान को खतरा हो सकता है, जैसा कि इस मामले में देखने को मिला।”
सामाजिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया:
इस घटना ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। कई लोगों ने निजी अस्पतालों में कर्मचारियों के प्रशिक्षण और कार्यभार पर सवाल उठाए हैं। राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींसर ने इस मामले का संज्ञान लिया है और जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा, “यह एक गंभीर लापरवाही का मामला है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, और हम सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।”
आगे की राह:
रमेश की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है, और अगले 48 घंटे उनके लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। परिवार ने जनता से आर्थिक मदद की अपील की है, क्योंकि इलाज का खर्च बढ़ता जा रहा है। इस बीच, यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में पेशेवर व्यवहार और मरीजों की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती है। यह समाज के लिए एक चेतावनी है कि चिकित्सा क्षेत्र में मानवीय संवेदनशीलता और तकनीकी सटीकता दोनों का समन्वय जरूरी है।
जयपुर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं, और दोषी नर्स के खिलाफ जल्द ही कड़ी कार्रवाई की उम्मीद है।
