By: Ravindra Sikarwar
रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर आई है। भारतीय रेल मंत्रालय ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला किया है। अब ट्रेन टिकट बुक करते समय वरिष्ठ नागरिक, 45 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं और गर्भवती महिलाएं निचली बर्थ की मांग करें या न करें—उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निचली बर्थ ही आवंटित की जाएगी। रेलवे ने इसके लिए सभी मेल, एक्सप्रेस, राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेनों में बर्थों का विशेष आरक्षण तय किया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह सुविधा उन यात्रियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लागू की गई है जिन्हें ऊपर की बर्थ पर चढ़ने-उतरने में कठिनाई होती है। खासतौर पर बुजुर्ग यात्रियों, गर्भवती महिलाओं और शारीरिक रूप से विशेष यात्रियों को यात्रा के दौरान असुविधा न हो, इसी उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है।
कितनी श्रेणी में कितनी निचली बर्थ आरक्षित होंगी?
नए नियमों के अनुसार अलग-अलग कोच में इस प्रकार निचली बर्थ आरक्षित रहेगी:
| कोच श्रेणी | निचली बर्थ आरक्षित |
| स्लीपर कोच | 6–7 बर्थ |
| 3 एसी | 4–5 बर्थ |
| 2 एसी | 3–4 बर्थ |
| 3ई और 2एस, चेयर कार | 4 सीटों को प्राथमिकता |
इसके अलावा, राजधानी और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों में भी वरिष्ठ और दिव्यांग यात्रियों के लिए बर्थ आरक्षण लागू रहेगा। चार्ट बनाते समय स्वचालित प्रणाली ऐसे यात्रियों को पहचानकर प्राथमिकता के साथ निचली बर्थ आवंटित करेगी।
दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष सुविधा
रेलवे ने दिव्यांगजन को ध्यान में रखते हुए अब लगभग सभी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में विशेष कोच उपलब्ध कराए हैं। इन कोचों में सुविधाएं कुछ इस प्रकार हैं:
- चौड़ा प्रवेश द्वार
- व्हीलचेयर पार्किंग की व्यवस्था
- बड़े आकार के शौचालय
- चौड़ी बर्थ और आसान मूवमेंट की व्यवस्था
- दीवारों पर मजबूत सपोर्ट रेल
- उपयुक्त ऊंचाई पर वॉशबेसिन और दर्पण
दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए ब्रेल साइन बोर्ड भी लगाए गए हैं, जिससे वे आसानी से बर्थ नंबर, गेट और अन्य दिशा-निर्देशों को पहचान सकें।
वंदे भारत ट्रेनों में भी इन सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पहले और अंतिम कोच दिव्यांग-अनुकूल बनाए गए हैं। यहां व्हीलचेयर मूवमेंट के लिए पर्याप्त जगह और विशेष टॉयलेट उपलब्ध हैं।
बिना विकल्प चुने भी मिलेगी सुविधा
अक्सर यात्रियों को टिकट बुकिंग के समय अपनी प्राथमिकता चुननी होती थी, लेकिन अब यह बाध्यता समाप्त हो गई है। यदि कोई योग्य यात्री विकल्प नहीं चुनता है, तो टिकट चार्ट तैयार होते समय सिस्टम स्वतः उसे निचली बर्थ आवंटित करेगा।
रेल मंत्रालय का आधिकारिक बयान
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने बताया कि रेलवे लगातार यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है और यह पहल उसी दिशा का हिस्सा है।
पश्चिम मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी नवल अग्रवाल के अनुसार, यह कदम उन यात्रियों के लिए काफी मददगार साबित होगा जिन्हें यात्रा के दौरान चढ़ने-उतरने में कठिनाई होती है।
यह नई व्यवस्था भारतीय रेल के करोड़ों यात्रियों के लिए एक बड़ा बदलाव है। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दिव्यांग यात्रियों के लिए अब ट्रेन यात्रा न केवल आरामदायक बल्कि सुरक्षित भी होगी। रेलवे का यह कदम सामाजिक संवेदनशीलता और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
