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by-Ravindra Sikarwar

जैसलमेर: राजस्थान के जैसलमेर जिले में एक भयानक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। यहां जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक प्राइवेट यात्री बस में अचानक भीषण आग लगने से कम से कम 12 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। बस में सवार लगभग 57 यात्रियों में से कई गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। यह हादसा थियत गांव के पास युद्ध संग्रहालय (वॉर म्यूजियम) के निकट दोपहर करीब 3:30 बजे हुआ, जब बस राजमार्ग पर तेज गति से दौड़ रही थी। प्रारंभिक जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट या इलेक्ट्रिकल खराबी माना जा रहा है, लेकिन विस्तृत जांच जारी है।

हादसे की पूरी कहानी:
बस, जो जैसलमेर शहर से जोधपुर के लिए रवाना हुई थी, में क्षमता से अधिक यात्री भरे हुए थे। यात्रियों के मुताबिक, बस के पिछले हिस्से से अचानक धुआं निकलने लगा, और चालक ने वाहन को सड़क किनारे रोक दिया। लेकिन इससे पहले ही पूरी बस लपटों से घिर गई। आग इतनी तेज रफ्तार से फैली कि यात्री दरवाजे-खिड़कियों से बाहर निकलने के प्रयास में फंस गए। कई यात्रियों ने खिड़कियों से कूदकर अपनी जान बचाई, लेकिन कुछ लोग आग की चपेट में आ गए।

मौके पर मौजूद एक स्थानीय निवासी ने बताया, “धुएं की गंध आते ही हम सब दौड़ पड़े। बस के आसपास धुआं-धुंधलका छा गया था, और चीखें गूंज रही थीं। आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लपटें इतनी ऊंची थीं कि नजदीक जाना नामुमकिन था।” हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण, राहगीर, पुलिस और अग्निशमन दल घटनास्थल पर पहुंचे। सेना की यूनिट ‘आर्म्ड फोर्सेस बैटल एक्स डिवीजन’ ने भी त्वरित सहायता प्रदान की। हालांकि, आग पर काबू पाने में करीब एक घंटा लग गया, और तब तक कई यात्रियों की जिंदगियां बचाई नहीं जा सकीं। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल होने की आशंका है, हालांकि सटीक संख्या की पुष्टि अभी बाकी है।

घायलों का इलाज और बचाव कार्य:
हादसे में घायल यात्रियों को प्राथमिक रूप से जैसलमेर के जवाहर अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, कई घायलों को 50-70 प्रतिशत तक जलन की चोटें आई हैं, और उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। कम से कम 10-15 घायलों को जोधपुर के एम्स अस्पताल रेफर किया गया है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उनका उपचार कर रही है। जिला कलेक्टर ने राहत शिविर स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, और डीएनए जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों को बुलाया गया है ताकि शवों की पहचान हो सके। फिलहाल, कुछ मृतकों के नाम सामने आए हैं, जैसे राजेंद्र सिंह, हसीना बी और इरफान खान, लेकिन अधिकांश की पहचान लंबित है।

प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर (02992-250101) जारी किया है, जिसके माध्यम से परिजन जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। चूंकि क्षेत्र में सैन्य अभ्यास चल रहा था, सेना के वाहनों की अनुपलब्धता के कारण बीएसएफ के साधनों से घायलों को स्थानांतरित किया गया। जिला प्रशासन ने मृतकों के परिवारों के लिए तत्काल 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है।

नेताओं की प्रतिक्रिया और सहायता:
इस दुखद घटना पर राष्ट्रीय स्तर पर शोक व्यक्त किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, “जैसलमेर में हुए इस हादसे से गहरा दुख हुआ है। पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना।” उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि की घोषणा की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी शोक संदेश जारी कर घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर से विशेष विमान द्वारा जैसलमेर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने कलेक्टर और एसपी से विस्तृत चर्चा की तथा स्वास्थ्य मंत्री के साथ जोधपुर जाकर घायलों से मुलाकात की। सीएम ने कहा, “यह हादसा बेहद दर्दनाक है। हम हर संभव सहायता सुनिश्चित करेंगे।” भाजपा के पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी ने आग के कारण शॉर्ट सर्किट बताते हुए वाहनों की सुरक्षा जांच को और सख्त करने की मांग की। विपक्षी नेताओं ने भी एकजुट होकर सहानुभूति जताई।

जांच और भविष्य के उपाय:
पुलिस और परिवहन विभाग आग के सटीक कारणों की गहन जांच कर रहे हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट में एसी सिस्टम में शॉर्ट सर्किट या इलेक्ट्रिकल फॉल्ट को मुख्य वजह माना गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी बसों में नियमित रखरखाव की कमी ऐसी घटनाओं को न्योता देती है। इस हादसे ने सड़क परिवहन सुरक्षा पर फिर से बहस छेड़ दी है, खासकर राजमार्गों पर चलने वाली प्राइवेट बसों के लिए। जिला प्रशासन ने सभी बस ऑपरेटरों को निर्देश दिए हैं कि वे वाहनों की विद्युतीय प्रणाली की जांच करवाएं।

यह घटना राजस्थान के सड़क हादसों के इतिहास में एक काला अध्याय जोड़ती है, जो यात्रा सुरक्षा के प्रति जागरूकता की सख्त जरूरत बताती है। प्रशासन राहत कार्यों को तेज कर रहा है, और घायलों के पूर्ण इलाज के लिए सभी संसाधन जुटाए जा रहे हैं। परिजनों से अपील की गई है कि वे पीड़ितों की सूचना साझा करें ताकि सहायता पहुंचाई जा सके।

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