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by-Ravindra Sikarwar

संसद की एक स्थायी समिति ने गरीब और जरूरतमंद अल्पसंख्यक छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्तियों के वितरण में हो रही देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समिति ने पाया है कि इस विलंब के कारण हजारों छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है।

समिति के निष्कर्ष और चिंताएँ:
समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएँ, जैसे मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति, मैट्रिक-उपरांत छात्रवृत्ति और मेरिट-सह-साधन छात्रवृत्ति, अपने उद्देश्यों को पूरा करने में असफल हो रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, छात्रवृत्ति राशि का समय पर वितरण नहीं हो पा रहा है।

यह देरी कई कारणों से हो रही है, जिनमें प्रशासनिक लापरवाही, फंड जारी करने में विलंब और आवेदन पत्रों के सत्यापन की धीमी प्रक्रिया प्रमुख हैं। समिति ने इस बात पर जोर दिया कि इन छात्रवृत्तियों का उद्देश्य गरीब छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है ताकि वे अपनी शिक्षा बिना किसी बाधा के जारी रख सकें। समय पर राशि न मिलने से यह उद्देश्य विफल हो रहा है।

छात्रों पर पड़ने वाला प्रभाव:
छात्रवृत्ति में देरी का सबसे बुरा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कई छात्र अपने अध्ययन के खर्च, जैसे किताबें, स्टेशनरी और ट्यूशन फीस का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। इस वित्तीय तंगी के कारण उन्हें पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला है कि ऐसे छात्र, जो आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं, उनके लिए यह छात्रवृत्ति ही शिक्षा का एकमात्र सहारा होती है। विलंब से न सिर्फ उनका मनोबल गिर रहा है, बल्कि शैक्षिक असमानता भी बढ़ रही है। समिति ने सरकार से इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने और आवश्यक कदम उठाने की सिफारिश की है।

समिति की सिफारिशें और आगे की राह:
इस समस्या को हल करने के लिए, संसदीय समिति ने कई सुझाव दिए हैं:

  1. प्रक्रिया में तेजी: समिति ने मंत्रालय से छात्रवृत्ति वितरण की पूरी प्रक्रिया को डिजिटलाइज करने और उसमें तेजी लाने को कहा है, ताकि राशि सीधे छात्रों के बैंक खातों में समय पर पहुंच सके।
  2. समन्वय: विभिन्न सरकारी विभागों और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की जरूरत है ताकि सत्यापन और फंड ट्रांसफर में कोई रुकावट न आए।
  3. जवाबदेही: समिति ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी सिफारिश की है ताकि इस तरह की देरी के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा सके।

समिति ने उम्मीद जताई है कि सरकार इन सिफारिशों पर गंभीरता से विचार करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि गरीब अल्पसंख्यक छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति उनके लिए एक सहारा बने, न कि एक और समस्या।

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