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by-Ravindra Sikarwar

संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिन भी विपक्ष ने “वोट चोरी” के आरोपों को लेकर अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। सत्र के समापन की कार्यवाही के दौरान भी विपक्षी सांसद तख्तियां लेकर सदन में नारेबाजी करते रहे, जिससे राजनीतिक गहमागहमी बनी रही।

क्या है “वोट चोरी” का आरोप?
विपक्षी दलों ने हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया है। “वोट चोरी” शब्द का इस्तेमाल करते हुए, विपक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में हेरफेर, मतदाता सूचियों में गड़बड़ी और सत्ताधारी दल द्वारा अनुचित तरीकों से चुनाव जीतने का दावा किया है। उनका मानना है कि इन अनियमितताओं ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।

संसद के अंदर विरोध का स्वरूप:
सत्र के आखिरी दिन विपक्षी सांसद हाथों में “लोकतंत्र बचाओ” और “वोट चोरी बंद करो” जैसे नारे लिखी तख्तियां लिए हुए थे। उन्होंने सदन की कार्यवाही के दौरान भी इन मुद्दों पर चर्चा की मांग की, लेकिन हंगामे के चलते कार्यवाही बाधित होती रही। विपक्षी दलों का यह कदम इस बात को दर्शाता है कि वे इस मुद्दे को संसदीय मंच पर पूरी मजबूती से उठाना चाहते हैं।

विपक्ष की मुख्य मांगें:
इस विरोध प्रदर्शन के माध्यम से विपक्ष ने सरकार और चुनाव आयोग से कई मांगें रखी हैं:

  1. स्वतंत्र जाँच: विपक्ष इन आरोपों की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, ताकि चुनावों में हुई कथित धांधली का सच सामने आ सके।
  2. मतदान पत्र की वापसी: कई विपक्षी नेता ईवीएम के बजाय पुरानी मतदान पत्र (बैलेट पेपर) प्रणाली पर वापस लौटने की मांग कर रहे हैं, उनका तर्क है कि यह प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय है।
  3. चर्चा की अनुमति: विपक्ष ने सदन में इस गंभीर मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग की थी, लेकिन सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताकर चर्चा से इनकार कर दिया।

संसद सत्र के आखिरी दिन भी यह विरोध जारी रहना यह संकेत देता है कि विपक्ष इस मुद्दे को आसानी से छोड़ने वाला नहीं है और आने वाले समय में भी यह राजनीतिक बहस का एक प्रमुख मुद्दा बना रहेगा।

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