by-Ravindra Sikarwar
कर्नाटक सरकार ने महिलाओं के स्वास्थ्य और कार्यस्थल पर समानता को मजबूत करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने 9 अक्टूबर 2025 को ‘मासिक धर्म अवकाश नीति-2025’ को मंजूरी प्रदान कर दी, जिसके तहत सभी सरकारी और निजी क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं को हर महीने एक दिन की सशुल्क छुट्टी का अधिकार मिलेगा। यह नीति न केवल महिलाओं की शारीरिक असुविधा को मान्यता देती है, बल्कि कार्यबल में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करने का एक प्रगतिशील प्रयास भी है। यह निर्णय राज्य में महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जो राष्ट्रीय स्तर पर अन्य राज्यों के लिए मिसाल कायम कर सकता है।
नीति की प्रमुख विशेषताएं और कार्यान्वयन:
मासिक धर्म अवकाश नीति-2025 के तहत महिलाएं वर्ष में कुल 12 सशुल्क छुट्टियां ले सकेंगी, जो प्रति माह एक दिन के हिसाब से उपलब्ध होंगी। महिलाएं अपनी मासिक चक्र के अनुसार इन छुट्टियों का उपयोग कर सकती हैं—या तो हर महीने एक-एक दिन या आवश्यकता अनुसार एक साथ। यह छुट्टी सभी प्रकार के कार्यरत महिलाओं पर लागू होगी, जिसमें सरकारी कार्यालयों, गारमेंट फैक्टरियों, आईटी कंपनियों, बहुराष्ट्रीय निगमों (एमएनसी) और अन्य निजी क्षेत्रों की कर्मचारी शामिल हैं।
कर्नाटक के श्रम मंत्री संतोष लाड ने कहा, “यह हमारी सरकार का सबसे प्रगतिशील कानून है। हम महिलाओं की भलाई के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह नीति सभी क्षेत्रों में लागू होगी, चाहे सरकारी हो या निजी।” नीति का कार्यान्वयन श्रम विभाग के माध्यम से किया जाएगा, जो नियोक्ताओं को निर्देश जारी करेगा कि वे इस छुट्टी को अनिवार्य रूप से प्रदान करें। यदि कोई नियोक्ता इसका पालन नहीं करता, तो उसके खिलाफ जुर्माना या अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह नीति महिलाओं को बिना किसी भेदभाव के लाभ पहुंचाएगी, ताकि वे कार्यस्थल पर तनावमुक्त रह सकें।
नीति का पृष्ठभूमि: समिति की सिफारिश और सरकार का प्रयास
यह नीति राज्य सरकार द्वारा गठित एक 18 सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर आधारित है, जिसका गठन महिलाओं के मासिक धर्म स्वास्थ्य और कार्यस्थल अधिकारों पर विचार-विमर्श के लिए किया गया था। समिति ने शुरू में वर्ष में छह दिनों की छुट्टी की सिफारिश की थी, लेकिन श्रम विभाग ने इसे बढ़ाकर 12 दिनों तक करने का निर्णय लिया, ताकि यह महिलाओं की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप हो। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता वाली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें उत्पादकता पर प्रभाव और महिलाओं की कार्यक्षमता को ध्यान में रखा गया।
कर्नाटक श्रम विभाग ने 2024 में ‘महिलाओं के मासिक धर्म अवकाश और मासिक स्वास्थ्य उत्पादों तक मुफ्त पहुंच के अधिकार विधेयक’ का मसौदा तैयार किया था, जो अब इस नीति के रूप में साकार हो रहा है। यह कदम राज्य की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और महिलाओं के सशक्तिकरण कार्यक्रमों से जुड़ा है, जो कार्यस्थल पर लिंग समानता को बढ़ावा देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति गारमेंट और आईटी जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की संख्या बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी, जहां मासिक धर्म से जुड़ी असुविधा अक्सर कार्य छोड़ने का कारण बनती है।
महिलाओं के स्वास्थ्य और कार्यस्थल समावेशिता पर लाभ:
मासिक धर्म के दौरान होने वाली शारीरिक पीड़ा, थकान और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह नीति महिलाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करेगी। कार्यस्थल पर समावेशिता को बढ़ावा देकर, यह नीति महिलाओं की उत्पादकता में वृद्धि करेगी और लिंग आधारित असमानता को कम करेगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक में लगभग 12 लाख महिलाएं इस नीति से सीधे लाभान्वित होंगी, विशेष रूप से बेंगलुरु जैसे शहरी केंद्रों में जहां आईटी और विनिर्माण क्षेत्र प्रमुख हैं।
महिला अधिकार कार्यकर्ता ब्रिंदा अडिगे ने कहा, “यह निर्णय कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा और कल्याण को मान्यता देता है। यह सतत विकास का एक अभिन्न हिस्सा है।” नीति न केवल छुट्टी प्रदान करती है, बल्कि मासिक धर्म स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार के रूप में स्थापित करती है, जो भविष्य में मुफ्त सैनिटरी उत्पादों की उपलब्धता जैसी योजनाओं का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
भारत में अन्य राज्यों की नीतियां: कर्नाटक का अनोखा कदम
कर्नाटक यह नीति लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है, जो सभी क्षेत्रों—सरकारी और निजी दोनों—को कवर करती है। इससे पहले, अन्य राज्यों में ऐसी नीतियां सीमित दायरे तक ही थीं:
- बिहार: 1992 से सरकारी कर्मचारियों को प्रति माह दो दिनों की सशुल्क मासिक धर्म छुट्टी।
- ओडिशा: सरकारी कर्मचारियों के लिए वर्ष में 12 दिनों की छुट्टी।
- केरल: औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) की महिला प्रशिक्षुओं के लिए प्रति माह दो दिनों की छुट्टी।
- सिक्किम: सरकारी क्षेत्र में सीमित प्रावधान।
ये नीतियां मुख्य रूप से सरकारी कर्मचारियों तक सीमित हैं, जबकि कर्नाटक की नीति निजी क्षेत्र को भी शामिल करके एक मिसाल कायम करती है। राष्ट्रीय स्तर पर, 2017 में अरुणाचल प्रदेश के सांसद निनोंग एरिंग द्वारा प्रस्तुत ‘मासिक धर्म लाभ विधेयक’ में प्रति माह दो दिनों की छुट्टी का प्रस्ताव था, लेकिन यह अभी तक पारित नहीं हुआ है। कई निजी कंपनियां, जैसे स्विगी और जोमाटो, अपनी महिला डिलीवरी कर्मचारियों को ऐसी छुट्टी दे रही हैं, जो इस नीति को मजबूत बनाएगा।
महिलाओं के सशक्तिकरण की नई दिशा:
कर्नाटक की मासिक धर्म अवकाश नीति-2025 महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए कार्यस्थल संस्कृति में एक सकारात्मक परिवर्तन लाएगी। यह न केवल शारीरिक कष्ट को कम करेगी, बल्कि महिलाओं को अधिक आत्मविश्वास के साथ कार्यबल में योगदान देने का अवसर प्रदान करेगी। राज्य सरकार का यह कदम अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा और राष्ट्रीय स्तर पर लिंग समानता को मजबूत करेगा। उम्मीद है कि यह नीति जल्द ही पूरे देश में फैलेगी, ताकि हर महिला को सम्मानजनक और स्वस्थ कार्य वातावरण मिल सके।
