by-Ravindra Sikarwar
भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह दोहराया है कि राज्य सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27% आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, जहाँ 22 सितंबर, 2025 से इस मुद्दे पर दैनिक सुनवाई शुरू होगी।
इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर आम सहमति बनाने के लिए मुख्यमंत्री आवास पर एक सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से ओबीसी को 27% आरक्षण का समर्थन करने का प्रस्ताव पारित किया। यह भी तय किया गया कि विभिन्न दलों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील 10 सितंबर से पहले मिलकर अपने तर्कों का समन्वय करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी राजनीतिक दल राज्य में ओबीसी को 27% आरक्षण देने के अपने संकल्प में एकजुट हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि अंतरिम न्यायिक आदेशों के कारण नियुक्ति पत्र से वंचित उम्मीदवारों को विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के सामूहिक प्रयास से न्याय दिलाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जहाँ भी कानूनी रूप से संभव है, राज्य सरकार ने पहले ही 27% आरक्षण लागू कर दिया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लोक निर्माण जैसे विभागों में, जहाँ कोई रोक नहीं थी, पूर्ण ओबीसी आरक्षण दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य अदालत में एक मजबूत बचाव सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की जाति-आधारित जनगणना की पहल से ओबीसी को उनका सही प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।
बैठक में उपस्थित प्रमुख नेता:
सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी, विपक्ष के नेता श्री उमंग सिंघार, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष श्री अरुण यादव, बसपा प्रदेश अध्यक्ष श्री रामकांत पिप्पल, सपा प्रदेश अध्यक्ष श्री मनोज यादव, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के अध्यक्ष श्री तालेश्वर सिंह मरकाम, आप प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती रानी अग्रवाल, सीपीआई नेता श्री जे.पी. दुबे, पूर्व मंत्री श्री कमलेश्वर पटेल, अधिवक्ता श्री वरुण ठाकुर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, ओबीसी और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, ओबीसी आयोग के अध्यक्ष श्री रामकृष्णा कुसमारिया, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल, सतना सांसद श्री गणेश सिंह और विधायक श्री प्रदीप सहित अन्य नेता भी मौजूद थे। महाधिवक्ता श्री प्रशांत सिंह वर्चुअली शामिल हुए।
पृष्ठभूमि: मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण
- 8 मार्च 2019: मध्य प्रदेश सरकार ने शिक्षा और सेवाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% करने के लिए एक अध्यादेश जारी किया।
- 14 अगस्त 2019: विधानसभा ने एक विधेयक पारित किया, जिससे यह कानून बन गया।
- वर्तमान स्थिति: डब्ल्यूपी 5901/2019 (अशिता दुबे बनाम मध्य प्रदेश राज्य) सहित 40 से अधिक मामले उच्च न्यायालयों में लंबित हैं। अंतरिम आदेशों के माध्यम से अध्यादेश/अधिनियम के तहत 14% से अधिक आरक्षण के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी गई है। हालांकि, अधिनियम की वैधता पर कोई सवाल नहीं उठाया गया है।
- सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: उच्च न्यायालय से संबंधित सभी मामले सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली को स्थानांतरित कर दिए गए हैं। रिट याचिका (सिविल) संख्या 606/2025 में अंतिम सुनवाई 22 सितंबर 2025 से शुरू होने वाली है।
- 50% आरक्षण की सीमा: राज्य सरकार महाधिवक्ता के माध्यम से अधिनियम का प्रभावी ढंग से बचाव करने के लिए मजबूत प्रयास कर रही है।
- ओबीसी कल्याण आयोग: 2 सितंबर 2021 को, मध्य प्रदेश ओबीसी कल्याण आयोग का गठन किया गया, जिसे पिछड़ेपन के कारणों की पहचान करने और सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक डेटा एकत्र करने का काम सौंपा गया है। यह कार्य डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय (महू) और मध्य प्रदेश जनअभियान परिषद के माध्यम से किया जा रहा है। आयोग द्वारा एक अनुभवजन्य और विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।
- स्थानीय निकाय चुनाव: 18 मई 2022 को, सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी के लिए 35% तक आरक्षण के साथ चुनाव कराने की अनुमति दी, जो ओबीसी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए एक ऐतिहासिक कदम था।
