Spread the love

By: Ravindra Sikarwar

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कोलार रोड क्षेत्र में स्थित सिंगापुर सिटी आवासीय कॉलोनी में लंबे समय से चली आ रही सीवेज की गंभीर समस्या ने आखिरकार नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का ध्यान आकर्षित किया। ट्रिब्यूनल ने कॉलोनी के बिल्डर पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के लिए 5 लाख 35 हजार रुपये का जुर्माना ठोका है। साथ ही, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को ठीक करने के लिए मात्र दो सप्ताह की मोहलत दी गई है। यदि समयसीमा में सुधार नहीं हुआ तो आगे और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की गई है।

यह मामला उस समय सामने आया जब कॉलोनी में लगभग 107 दिनों तक गंदा पानी खुले में बहता रहा। एसटीपी लंबे समय से खराब पड़ा था और बिल्डर ने इसे repar करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। नतीजतन, सीवेज सड़कों पर, खाली प्लॉटों में और नालियों से बहकर पूरे इलाके में फैल गया। इससे उठने वाली दुर्गंध ने निवासियों का जीना मुहाल कर दिया था। घरों के अंदर रहना तक दूभर हो गया था, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ गए थे। सांस की तकलीफें, त्वचा संक्रमण और अन्य बीमारियां आम हो गईं। बरसात के मौसम में तो हालात और भी विकट हो जाते थे, क्योंकि पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ता था और संक्रमण का खतरा कई गुना हो जाता था।

कॉलोनी के निवासी लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे थे। उन्होंने बिल्डर और स्थानीय प्रशासन से बार-बार शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आखिरकार, कॉलोनी के एक निवासी डॉक्टर अभिषेक परसाई ने हार नहीं मानी और मामले को एनजीटी के सामने रखा। उन्होंने ट्रिब्यूनल में आवेदन दायर कर बिगड़ते पर्यावरण और स्वास्थ्य जोखिमों का विस्तार से जिक्र किया। सुनवाई के दौरान जांच में पाया गया कि बिल्डर की स्पष्ट लापरवाही से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और जल प्रदूषण नियंत्रण नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा था। अनट्रिटेड सीवेज का बहाव न केवल स्थानीय जल स्रोतों को दूषित कर रहा था, बल्कि भूमिगत जल को भी प्रभावित करने की आशंका थी।

एनजीटी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बिल्डर को जिम्मेदार ठहराया। ट्रिब्यूनल का कहना था कि आवासीय परियोजनाओं में एसटीपी का रखरखाव अनिवार्य है और इसकी अनदेखी पर्यावरणीय अपराध की श्रेणी में आती है। जुर्माने की राशि पर्यावरण क्षति की भरपाई के लिए उपयोग की जाएगी। साथ ही, एसटीपी को तुरंत चालू हालत में लाने का सख्त निर्देश दिया गया है। ट्रिब्यूनल ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में काम पूरा नहीं हुआ तो जुर्माना बढ़ाया जा सकता है और अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

यह फैसला भोपाल जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में आवासीय कॉलोनियों की बढ़ती समस्याओं पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी है। शहर के कई इलाकों में पुरानी कॉलोनियां एसटीपी की कमी या खराबी से जूझ रही हैं, जिससे सीवेज ओवरफ्लो आम बात हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिल्डरों को परियोजना सौंपते समय रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय करनी चाहिए और निवासी संघों को मजबूत बनाना जरूरी है। एनजीटी के इस कदम से अन्य बिल्डरों को भी सबक मिलेगा कि पर्यावरण नियमों की अनदेखी महंगी पड़ सकती है।

कॉलोनी निवासियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। डॉक्टर अभिषेक परसाई ने कहा कि यह उनकी और पूरे समुदाय की जीत है। अब उम्मीद है कि जल्द ही समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा और कॉलोनी में स्वच्छ वातावरण बहाल होगा। प्रशासन को भी ऐसे मामलों पर स्वत: संज्ञान लेने की जरूरत है ताकि निवासियों को अदालतों के चक्कर न काटने पड़ें।

भोपाल में पर्यावरण संरक्षण के लिए एनजीटी पहले भी सक्रिय रहा है। शहर की झीलों और नदियों में सीवेज डिस्चार्ज पर बड़े जुर्माने लगा चुका है। यह ताजा मामला एक बार फिर साबित करता है कि पर्यावरण की रक्षा के लिए सख्ती जरूरी है। आने वाले समय में शहर की बढ़ती आबादी को देखते हुए सीवेज प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था विकसित करना समय की मांग है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *