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By: Ravindra Sikarwar

ग्वालियर में तैयार की गई भगवान श्रीराम के वनवासी स्वरूप की 51 फीट विशाल प्रतिमा अब मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के एंती पर्वत स्थित शनिधाम में स्थापित की जाएगी। यह प्रतिमा मूल रूप से छत्तीसगढ़ के चंद्रखुरी स्थित कौशल्या माता मंदिर के लिए बनाई गई थी, जहां इसे भव्य रूप से स्थापित किया जाना था। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार तथा जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा तय किए गए लगभग 70 लाख रुपये का भुगतान नहीं किए जाने के कारण स्थिति जटिल हो गई। भुगतान विवाद लंबा चलता गया, और अंततः मूर्तिकार व निर्माण से जुड़े कलाकारों ने प्रतिमा को नई जगह देने का फैसला किया। लगभग एक वर्ष की मेहनत और लागत से तैयार यह प्रतिमा अब मध्यप्रदेश में अपनी नई पहचान हासिल करेगी।

चंद्रखुरी से मुरैना तक की कहानी: विवाद, इंतज़ार और नया अध्याय
वनवासी स्वरूप में निर्मित यह प्रतिमा भगवान श्रीराम के शांत, धैर्यवान और संयमित रूप को प्रकट करती है। ग्वालियर के अनुभवी मूर्तिकारों की टीम ने इसे तैयार किया था, और शुरूआती योजना के अनुसार इसे छत्तीसगढ़ सरकार के अधीन कौशल्या माता मंदिर परिसर में स्थापित किया जाना था। मूर्ति तैयार होने के बाद इसे चंद्रखुरी भेजने के लिए अंतिम औपचारिकताएँ भी शुरू हो गई थीं, लेकिन तभी भुगतान से जुड़ा विवाद सामने आ गया। मूर्तिकार के अनुसार, परियोजना की कुल लागत में से लगभग 70 लाख रुपये लंबे समय तक लंबित रहे, कई बार अधिकारियों से संपर्क किया गया, पर समाधान नहीं निकल सका। धीरे-धीरे स्थिति ऐसी बन गई कि मूर्ति की स्थापना ही अटक गई।

इधर मूर्तिकार व सहयोगियों ने मूर्ति के रख-रखाव, सुरक्षा और आगे की प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि इतने बड़े आकार की प्रतिमा को लंबे समय तक बिना उचित व्यवस्था के रखना जोखिम भरा है और इससे कलाकृति को नुकसान भी हो सकता है। कई महीनों बाद जब छत्तीसगढ़ की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तब कलाकारों ने प्रतिमा को नए स्थान पर स्थापित करने का निर्णय लिया। यहीं से मुरैना के शनिधाम का नाम सामने आया, जहां धार्मिक गतिविधियाँ लगातार विस्तार ले रही हैं और मंदिर परिसर को विकसित किया जा रहा है।

मुरैना के शनिधाम में नई शुरुआत: भक्तों के लिए बनेगा नया आकर्षण केंद्र
जैसे ही यह जानकारी मिली कि प्रतिमा नए स्थान पर स्थापित होगी, मुरैना के एंती पर्वत स्थित शनिधाम के प्रबंधकों ने रुचि दिखाई। पर्वत शिखर पर स्थित शनिधाम पहले से ही अपनी आध्यात्मिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है, और यहाँ भक्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मंदिर समिति ने मूर्तिकारों से वार्ता कर प्रतिमा को सम्मानपूर्वक स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की। बातचीत सफल रही और अब इस प्रतिमा को शनिधाम परिसर में स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है।

स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति के अनुसार, मूर्ति को पर्वत पर स्थापित करने के लिए विशेष क्रेन, तकनीकी विशेषज्ञों और श्रमिकों की टीम लगाई जाएगी। 51 फीट ऊंची इस प्रतिमा को स्थापित करना किसी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन समिति ने इसे एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में स्वीकार किया है। प्रतिमा स्थापित होने के बाद शनिधाम न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन के रूप में भी एक बड़ा आकर्षण बन जाएगा।

प्रतिमा के मूर्तिकारों का कहना है कि भले ही छत्तीसगढ़ में भुगतान विवाद ने उन्हें निराश किया, लेकिन यह उनके लिए संतोष की बात है कि भगवान श्रीराम की प्रतिमा अब ऐसे स्थान पर स्थापित होगी, जहाँ इसे श्रद्धा और सम्मान मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रतिमा आने वाले समय में हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगी और उनकी कला को उचित स्थान मिलेगा।

इस तरह एक वर्ष की मेहनत, विवादों और लंबे इंतज़ार के बाद अब यह विशाल प्रतिमा मुरैना के एंती पर्वत पर नई पहचान पाएगी और जंगलों के वनवासी राम का स्वरूप मध्यप्रदेश की धरती पर भक्तों को दर्शन देगा।

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