Nautapa 2026 : ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सूर्य देव कृतिका नक्षत्र से निकलकर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो वहां वे अगले 15 दिनों तक रहते हैं। हालांकि, इस गोचर के शुरुआती 9 दिनों में सूर्य की किरणें पृथ्वी पर बिल्कुल सीधी पड़ती हैं, जिससे अत्यधिक गर्मी होती है। इसी अवधि को ‘नौतपा’ (नौ दिनों की तपन) कहा जाता है।
इसके पीछे एक मुख्य ज्योतिषीय कारण भी है:
- चंद्रमा का आधिपत्य: रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं, जिन्हें शीतलता और जल का प्रतीक माना जाता है।
- तपिश का प्रभाव: जब उग्र और अत्यंत गर्म स्वभाव वाले सूर्य देव शीतलता के कारक रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो वे इसके कूलिंग प्रभाव (शीतलता) को पूरी तरह से सोख लेते हैं। इस वजह से पृथ्वी का तापमान तेजी से बढ़ता है और भीषण लू चलती है।
Nautapa 2026 नौतपा का ज्योतिषीय महत्व और मानसून कनेक्शन
ज्योतिष शास्त्र में नौतपा को केवल गर्मी का समय नहीं, बल्कि आने वाले वर्ष की खुशहाली और अच्छी खेती का संकेतक माना गया है।
- मानसून का गर्भकाल: सनातन परंपरा में नौतपा को मानसून का ‘गर्भकाल’ कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन 9 दिनों में जितनी अच्छी और प्रचंड गर्मी पड़ेगी, समुद्र से उतना ही अधिक वाष्पीकरण होगा और आने वाले दिनों में उतनी ही अच्छी बारिश (मानसून) होगी।
- रोहिणी का गलना: यदि नौतपा के दौरान बारिश या तेज आंधी आ जाती है और मौसम ठंडा हो जाता है, तो उसे ज्योतिष की भाषा में ‘रोहिणी का गलना’ कहते हैं। इसे भविष्य में कम या खंडित बारिश का संकेत माना जाता है।
Nautapa 2026 रोहिणी नक्षत्र के चार चरण और उनका प्रभाव
सूर्य जब रोहिणी नक्षत्र में होते हैं, तो वे इसके चार अलग-अलग चरणों से गुजरते हैं, जिनका मानव जीवन पर अलग प्रभाव पड़ता है:
- प्रथम चरण (स्वामी मंगल): लोगों में अपने लक्ष्यों और करियर के प्रति एकाग्रता और प्रबंधन क्षमता बढ़ती है।
- द्वितीय चरण (स्वामी शुक्र): कलात्मक कार्यों में रुचि और भौतिक सुख-सुविधाओं की इच्छा बढ़ती है।
- तृतीय चरण (स्वामी बुध): विद्यार्थियों और व्यापारियों के लिए यह समय तार्किक क्षमता और व्यापार बढ़ाने वाला होता है।
- चतुर्थ चरण (स्वामी चंद्रमा): कलात्मक कार्यों में सफलता मिलती है और पारिवारिक जीवन में बदलाव देखने को मिलते हैं।
Nautapa 2026 नौतपा का धार्मिक महत्व: क्या करें और क्या न करें
धार्मिक दृष्टि से इन 9 दिनों में सूर्य देव की विशेष आराधना और समाज कल्याण के लिए दान-पुण्य का विधान है।
क्या करें (शुभ फल के लिए उपाय)
- सूर्य अर्घ्य: रोज सुबह जल्दी उठकर तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इससे कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और मान-सम्मान बढ़ता है।
- शीतल चीजों का दान: इस भीषण गर्मी में राहगीरों और जरूरतमंदों को जल, शरबत, सत्तू, घड़ा (मिट्टी का बर्तन), छाता, सूती कपड़े और हाथ का पंखा दान करना बेहद पुण्यकारी माना जाता है।
- जीव-जंतुओं की सेवा: अपने घर की छत या बालकनी में पक्षियों और आवारा पशुओं के लिए साफ और ठंडे पानी का इंतजाम जरूर करें।
क्या न करें (वर्जित कार्य)
- मांगलिक कार्य: नौतपा के दौरान अत्यधिक गर्मी और विशिष्ट ग्रहीय स्थिति के कारण शादी-विवाह, मुंडन, सगाई, गृह प्रवेश जैसे बड़े मांगलिक कार्यों की मनाही होती है।
- तामसिक भोजन: इन दिनों शरीर में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से बचने के लिए अत्यधिक तेल-मसाले, मांस और मदिरा के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: खगोलीय विज्ञान के अनुसार भी इस समय सूर्य भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर होता है, जिससे उत्तरी गोलार्ध में सूर्य की किरणें लंबवत (वर्टिकल) पड़ती हैं और वायुदाब (air pressure) कम होने से मानसून विंड्स एक्टिव होने की नींव पड़ती है।

