by-Ravindra Sikarwar
बोस्टन, अमेरिका: मानव पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) से जुड़े सिर और गर्दन के कैंसर, जो अमेरिका में इस प्रकार के कैंसर के लगभग 70 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार हैं, अब एक क्रांतिकारी रक्त परीक्षण के माध्यम से लक्षण प्रकट होने से बहुत पहले ही पहचाने जा सकते हैं। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और मास जनरल ब्रिगहम के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह नया उपकरण, जिसका नाम एचपीवी-डीपसीक है, रोगियों के रक्त में सूक्ष्म वायरल डीएनए के टुकड़ों का पता लगाकर कैंसर को 10 वर्ष तक पहले डिटेक्ट करने की क्षमता रखता है। यह खोज न केवल निदान को सरल बनाती है, बल्कि उपचार को भी कम आक्रामक और प्रभावी बनाने का वादा करती है, जिससे मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
एचपीवी और सिर-गर्दन कैंसर का बढ़ता खतरा:
एचपीवी एक सामान्य वायरस है जो योनि कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बनता है, और उसके लिए नियमित स्क्रीनिंग उपलब्ध है। हालांकि, सिर और गर्दन के कैंसर, विशेष रूप से ओरल फैरिंजियल कैंसर, के मामले में ऐसी कोई स्क्रीनिंग विधि नहीं है। ये कैंसर धीरे-धीरे विकसित होते हैं – औसतन 10 से 15 वर्षों में – और ज्यादातर तब पकड़े जाते हैं जब लक्षण जैसे गले में दर्द, निगलने में कठिनाई या गांठें दिखाई देने लगती हैं। इस चरण में उपचार अक्सर सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी का संयोजन होता है, जो स्थायी साइड इफेक्ट्स जैसे आवाज खराब होना, निगलने की समस्या और थकान पैदा करता है। अमेरिका में ये कैंसर अन्य सिर-गर्दन कैंसरों की तुलना में तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे प्रारंभिक पहचान की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
एचपीवी-डीपसीक परीक्षण कैसे काम करता है?
यह परीक्षण एक लिक्विड बायोप्सी तकनीक पर आधारित है, जो रक्त नमूने से कैंसर से जुड़े संकेतकों की जांच करता है। पारंपरिक तरीकों में ड्रॉपलेट डिजिटल पीसीआर (डीडीपीसीआर) का उपयोग होता था, जो वायरल जीनोम के केवल एक-दो हिस्सों की जांच करता था। लेकिन एचपीवी-डीपसीक पूरे एचपीवी जीनोम की होल-जीनोम सीक्वेंसिंग करता है, जिससे यह ट्यूमर से अलग होकर रक्तप्रवाह में पहुंचने वाले सूक्ष्म एचपीवी डीएनए के टुकड़ों (सर्कुलेटिंग ट्यूमर एचपीवी डीएनए या सीटीएचपीवीडीएनए) का सटीक पता लगा सकता है।
इसके अलावा, परीक्षण निम्नलिखित आठ अन्य रक्त विशेषताओं की भी जांच करता है:
- एचपीवी16 के उच्च-जोखिम वाले सिंगल न्यूक्लियोटाइड पॉलीमॉर्फिज्म (एसएनपी)।
- एचपीवी जीनोम का होस्ट सेल डीएनए में एकीकरण।
- कैंसर को बढ़ावा देने वाले जीन पीआईके3सीए में उत्परिवर्तन।
- डीएनए की मात्रा और आकार का मूल्यांकन।
ये सभी कारक न केवल डिटेक्शन को मजबूत बनाते हैं, बल्कि कैंसर की प्रगति और पूर्वानुमान के बारे में अतिरिक्त जानकारी भी प्रदान करते हैं। मशीन लर्निंग एल्गोरिदम के एकीकरण से परीक्षण की सटीकता और बढ़ जाती है, खासकर कम ट्यूमर बोझ वाले मामलों में।
अध्ययन की विधि और परिणाम:
मास जनरल ब्रिगहम बायोबैंक से लिए गए 56 रक्त नमूनों पर आधारित एक अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने 28 नमूनों का विश्लेषण किया जो बाद में एचपीवी-संबंधित सिर-गर्दन कैंसर से ग्रस्त व्यक्तियों के थे, और 28 स्वस्थ नियंत्रण नमूनों की तुलना की। प्रारंभिक विश्लेषण में परीक्षण ने 28 में से 22 मामलों में कैंसर मार्करों का पता लगाया, जबकि सभी नियंत्रण नकारात्मक रहे – जो 100 प्रतिशत विशिष्टता दर्शाता है। मशीन लर्निंग के बाद यह सटीकता 27 मामलों तक पहुंच गई। सबसे पुराना सकारात्मक नमूना निदान से 7.8 वर्ष पहले का था, और अनुकूलित मॉडल ने 10 वर्ष पूर्व के नमूनों में भी सफलता दिखाई।
एक अन्य अध्ययन में, 304 रोगियों (152 कैंसर वाले और 152 स्वस्थ) के नमूनों पर परीक्षण किया गया, जहां इसकी संवेदनशीलता और विशिष्टता दोनों 99 प्रतिशत पाई गई। यह अन्य रक्त परीक्षणों (82-90 प्रतिशत सटीकता) और ऊतक बायोप्सी से बेहतर साबित हुआ, यहां तक कि प्रारंभिक चरणों में भी। लक्षणयुक्त मामलों में डिटेक्शन 100 प्रतिशत था, जबकि स्क्रीनिंग अध्ययन में 8 वर्ष पूर्व 79 प्रतिशत और 4 वर्ष पूर्व 100 प्रतिशत सफलता मिली। ये निष्कर्ष क्लिनिकल कैंसर रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।
प्रारंभिक पहचान के लाभ और प्रभाव:
प्रारंभिक डिटेक्शन से कैंसर को उसके शुरुआती चरण में पकड़ा जा सकता है, जब उपचार सरल सर्जरी तक सीमित रह सकता है, बिना भारी साइड इफेक्ट्स के। वर्तमान में, मरीजों को लक्षण दिखने पर आक्रामक थेरेपी की आवश्यकता पड़ती है, जो जीवन भर की जटिलताएं पैदा करती है। अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. डैनियल एल. फाडेन, जो माइक टोथ हेड एंड नेक कैंसर रिसर्च सेंटर के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में ओटोलैरिंगोलॉजी-हेड एंड नेक सर्जरी के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, कहते हैं, “हमारा अध्ययन पहली बार दिखाता है कि हम लक्षणरहित व्यक्तियों में एचपीवी-संबंधित कैंसर को कई वर्ष पहले ही सटीक रूप से पहचान सकते हैं।”
वे आगे जोड़ते हैं, “जब मरीज लक्षणों के साथ क्लिनिक पहुंचते हैं, तो उपचार गंभीर और स्थायी साइड इफेक्ट्स वाले होते हैं। हम आशा करते हैं कि एचपीवी-डीपसीक जैसे उपकरण कैंसर को बहुत शुरुआती चरण में पकड़ लेंगे, जिससे मरीजों के परिणाम और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।” यह परीक्षण सर्जरी के बाद न्यूनतम अवशिष्ट रोग (एमआरडी) की निगरानी के लिए भी उपयोगी है, जिससे अनावश्यक रेडिएशन से बचा जा सकता है।
भविष्य की योजनाएं:
शोधकर्ता राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) द्वारा वित्त पोषित एक द्वितीयक अंधा अध्ययन कर रहे हैं, जिसमें नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के प्रोस्टेट, लंग, कोलोरेक्टल एंड ओवेरियन कैंसर स्क्रीनिंग ट्रायल से सैकड़ों नमूनों का उपयोग किया जा रहा है। वे परीक्षण को अन्य एचपीवी-संबंधित कैंसरों पर विस्तारित करने की भी योजना बना रहे हैं, और कैंसर मॉडलिंग विशेषज्ञों के साथ सहयोग कर रहे हैं ताकि प्रारंभिक डिटेक्शन का मरीजों की देखभाल और उत्तरजीविता पर प्रभाव मूल्यांकन किया जा सके। डॉ. फाडेन कहते हैं, “हम तकनीक को और अधिक संवेदनशील बनाने और इससे अधिक डेटा निकालने पर काम कर रहे हैं।”
निष्कर्ष:
एचपीवी-डीपसीक न केवल एचपीवी-संबंधित सिर-गर्दन कैंसर की दुनिया में एक नया अध्याय खोलता है, बल्कि कैंसर स्क्रीनिंग को क्रांतिकारी रूप से बदलने की क्षमता रखता है। यह परीक्षण रक्त के एक साधारण नमूने से वर्षों पहले खतरे का संकेत दे सकता है, जिससे लाखों जीवन बचाए जा सकते हैं। हालांकि, सकारात्मक स्क्रीन के बाद फॉलो-अप प्रक्रियाओं पर और शोध की आवश्यकता है। यह खोज पांच वर्षों के एनआईएच वित्त पोषण और बहु-विषयक सहयोग का परिणाम है, जो व्यक्तिगत चिकित्सा की दिशा में एक बड़ा कदम है।
