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By: Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में हाल ही में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित हुआ, जहां राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई बड़ी घोषणाएं कीं। इनमें सबसे प्रमुख थी बैतूल जिले के प्रसिद्ध शहर मुलताई का नाम बदलकर ‘मूलतापी’ करने की घोषणा। यह बदलाव शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, जिले में स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने वाली कई परियोजनाओं का शुभारंभ भी हुआ।

मूलतापी नामकरण: ऐतिहासिक पहचान की बहाली
मुलताई शहर का मूल नाम ‘मूलतापी’ या ‘मुलतापी’ था, जो यहां से उद्गम लेने वाली पवित्र ताप्ती नदी से जुड़ा है। ताप्ती नदी को हिंदू धर्म में सूर्य पुत्री के रूप में पूजा जाता है और इसका उद्गम स्थल मुलताई को धार्मिक महत्व प्रदान करता है। सदियों से इस स्थान को ‘ताप्ती का मूल’ कहा जाता रहा है, लेकिन समय के साथ नाम ‘मुलताई’ में बदल गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैतूल में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि स्थानीय लोगों की लंबी मांग को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने इस नाम परिवर्तन को मंजूरी दे दी है। जल्द ही इस संबंध में केंद्र सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा। यह कदम न केवल शहर की प्राचीन पहचान को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। मुलताई में ताप्ती उद्गम स्थल पर स्थित मंदिर और कुंड पहले से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं, और नाम बदलने से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है।

यह घोषणा बैतूल जिले के लिए एक सांस्कृतिक जीत के रूप में देखी जा रही है, क्योंकि यह क्षेत्र सतपुड़ा की गोद में बसा जनजातीय बहुल इलाका है, जहां प्राकृतिक और धार्मिक विरासत का विशेष महत्व है।

बैतूल मेडिकल कॉलेज: स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांति
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बैतूल में नए मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखी। यह कॉलेज पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर बनाया जाएगा और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में कहा कि दूरदराज के इलाकों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से गरीब और आदिवासी परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं घर के पास मिलेंगी। पहले मरीजों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर ही उन्नत इलाज उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री ने भी इसकी प्रशंसा करते हुए कहा कि नड्डा की मौजूदगी में किए गए इन कार्यों से बैतूल की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल जाएंगी।

इसके अलावा, जिले में लगभग 383 करोड़ रुपये की लागत से कई विकास परियोजनाओं का भूमि पूजन और उद्घाटन किया गया। इनमें सड़कें, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं, जो क्षेत्र के समग्र विकास में योगदान देंगी।

औद्योगिक और अन्य विकास घोषणाएं
बैतूल जिले को औद्योगिक रूप से मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की घोषणा की। साथ ही, गुड़ उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गुड़ क्लस्टर की स्थापना और जनजातीय संग्रहालय बनाने का ऐलान किया गया। इन कदमों से स्थानीय किसानों और उद्यमियों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। मुलताई क्षेत्र में लकड़ी क्लस्टर, कोसमी इंडस्ट्रियल एरिया और अन्य छोटी-बड़ी परियोजनाएं भी शुरू की जाएंगी।

ये सभी घोषणाएं बैतूल को मध्य प्रदेश के विकास मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करेंगी। जनजातीय बहुल इस जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में ये परियोजनाएं स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में सहायक होंगी।

बैतूल की उज्ज्वल भविष्य की ओर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बैतूल यात्रा जिले के लिए यादगार साबित हुई। नाम परिवर्तन से लेकर मेडिकल कॉलेज और औद्योगिक विकास तक की घोषणाएं दर्शाती हैं कि राज्य सरकार जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की उपस्थिति ने इन कार्यक्रमों को राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया। आने वाले समय में बैतूल न केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनेगा, बल्कि स्वास्थ्य और उद्योग का भी एक मजबूत हब बनेगा। यह सब मिलकर जिले के लोगों के लिए नई उम्मीदें जगाता है।

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