by-Ravindra Siarwar
रीवा (मध्य प्रदेश): भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2025 को मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व ने सशस्त्र बलों को अभियानों के दौरान अभूतपूर्व स्वतंत्रता प्रदान की है, जो इतिहास में कभी नहीं हुआ। यह बयान रीवा के टीआरएस कॉलेज में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान दिया गया, जहां जनरल द्विवेदी ने युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए सैन्य रणनीति, नेतृत्व के गुणों और राष्ट्र की सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उनका यह कथन न केवल वर्तमान सरकार की नीतियों को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि सैन्य इतिहास के संदर्भ में एक नया अध्याय जोड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान सेना-सरकार के बीच बढ़ते विश्वास को दर्शाता है, जो भविष्य की रक्षा तैयारियों के लिए सकारात्मक संकेत है।
कार्यक्रम का माहौल: युवाओं को प्रेरित करने का मंच
रीवा शहर के टीआरएस कॉलेज में आयोजित यह कार्यक्रम ‘युवा सेना संवाद’ के तहत था, जहां जनरल द्विवेदी ने सैकड़ों छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय निवासियों को संबोधित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को सैन्य जीवन, अनुशासन और देशभक्ति की भावना से जोड़ना था। जनरल ने अपनी बातचीत में तीन प्रमुख ‘सी’ – कॉन्फिडेंस (आत्मविश्वास), काल्मनेस (शांति) और क्लैरिटी (स्पष्टता) – पर जोर दिया, जो सैन्य सफलता के मूलभूत तत्व हैं। उन्होंने कहा, “ये तीन गुण न केवल सैनिकों के लिए, बल्कि हर नागरिक के लिए आवश्यक हैं, खासकर जेनरेशन जेड के युवाओं के लिए, जो डिजिटल युग में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।”
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान और दीप प्रज्वलन से हुई। जनरल द्विवेदी ने मंच पर पहुंचते ही छात्रों से सवाल-जवाब सत्र आयोजित किया, जहां उन्होंने साइबर युद्ध, ड्रोन तकनीक और सीमा पर तैनाती जैसे मुद्दों पर खुलकर बात की। स्थानीय सांसद और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे, जिन्होंने जनरल के बयान की सराहना की। यह दौरा जनरल द्विवेदी का मध्य प्रदेश का पहला प्रमुख कार्यक्रम था, जो उनकी नियुक्ति के बाद (जून 2025) सैन्य जनसंपर्क को मजबूत करने का हिस्सा था।
ऑपरेशन सिंदूर: रणनीतिक सफलता का प्रतीक
जनरल द्विवेदी ने अपने संबोधन का मुख्य हिस्सा ऑपरेशन सिंदूर पर केंद्रित किया, जो भारतीय सेना की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कार्रवाई थी। यह ऑपरेशन 2024 के अंत में शुरू हुआ था, जब सीमा पर घुसपैठ की कोशिशों को विफल करने के लिए सेना ने तेज और सटीक हमले किए। ऑपरेशन का नाम ‘सिंदूर’ भारतीय संस्कृति में शुभता और शक्ति का प्रतीक है, जो महिलाओं की मांग में लगाए जाने वाले सिंदूर से प्रेरित है। जनरल ने बताया कि इस अभियान में सेना को राजनीतिक नेतृत्व से पूर्ण समर्थन मिला, जिसकी बदौलत बिना किसी देरी के लक्ष्य हासिल किए गए।
उन्होंने विस्तार से कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारी तीनों सेनाओं ने एकजुट होकर काम किया। राजनीतिक नेतृत्व की सोच स्पष्ट थी। उन्होंने हमें पूर्ण स्वतंत्रता दी, ताकि हम अपनी क्षमता के अनुसार निर्णय ले सकें। इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी प्रधानमंत्री ने सशस्त्र बलों को इतनी खुली छूट दी हो।” इस ऑपरेशन में ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का व्यापक उपयोग किया गया, जिससे न्यूनतम नुकसान के साथ दुश्मन के ठिकानों को नष्ट किया गया। जनरल ने जोर देकर कहा कि इस सफलता का श्रेय न केवल सैनिकों को, बल्कि शीर्ष नेतृत्व के विश्वास को जाता है। ऑपरेशन के परिणामस्वरूप भारत की संप्रभुता मजबूत हुई और सीमा सुरक्षा में नई गहराई आई।
नेतृत्व के तीन स्तंभ: आत्मविश्वास, शांति और स्पष्टता
जनरल द्विवेदी ने सैन्य सफलता के सूत्र के रूप में तीन ‘सी’ पर विस्तृत चर्चा की:
- आत्मविश्वास (कॉन्फिडेंस): उन्होंने कहा कि हर सैनिक को अपनी क्षमता पर भरोसा होना चाहिए। “युद्धक्षेत्र में संकोच घातक साबित होता है। आत्मविश्वास ही हमें जीत दिलाता है।” उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे जवान कठिन परिस्थितियों में भी साहस बनाए रखते हैं।
- शांति (काल्मनेस): युद्ध की अफरा-तफरी में शांत रहना सबसे बड़ा गुण है। जनरल ने बताया, “शांति से ही सही निर्णय लिए जा सकते हैं। हमारी सेना का प्रशिक्षण इसी पर आधारित है।” उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी शांति अपनाएं।
- स्पष्टता (क्लैरिटी): यह तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। “राजनीतिक नेतृत्व की स्पष्ट दृष्टि ने हमें दिशा प्रदान की। वे जानते थे कि सेना क्या कर सकती है, और उन्होंने हमें बंधनमुक्त कर दिया।” जनरल ने इस बिंदु पर विशेष रूप से पीएम मोदी का उल्लेख किया, जिनकी नेतृत्व शैली को उन्होंने “साहसी और दृढ़” बताया।
इस चर्चा से छात्रों में उत्साह भर गया, और कई ने सेना में शामिल होने की इच्छा जताई। जनरल ने कहा कि जेनरेशन जेड को सैन्य चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि साइबर हमले और हाइब्रिड युद्ध नई हकीकत हैं।
सैन्य इतिहास का संदर्भ: एक नया दौर की शुरुआत
जनरल द्विवेदी का यह बयान भारतीय सैन्य इतिहास के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। स्वतंत्रता के बाद कई ऑपरेशनों – जैसे 1962, 1965, 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध – में सेना को राजनीतिक निर्देशों का पालन करना पड़ा, लेकिन कभी इतनी व्यापक स्वतंत्रता नहीं मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव 2014 के बाद की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ और ‘बालाकोट एयरस्ट्राइक’ से प्रेरित है, जहां सेना को त्वरित निर्णय लेने की छूट दी गई। रक्षा विश्लेषक डॉ. अजय सहगल ने कहा, “यह बयान सेना-सरकार तालमेल का प्रतीक है। इससे सैनिकों का मनोबल बढ़ेगा।”
हालांकि, कुछ आलोचक इसे राजनीतिक समर्थन के रूप में देख रहे हैं। विपक्षी दलों ने टिप्पणी की कि सैन्य सफलताओं का श्रेय सेना को जाता है, न कि व्यक्तिगत नेतृत्व को। लेकिन जनरल ने स्पष्ट किया कि यह बयान “संस्थागत समर्थन” पर आधारित है, जो राष्ट्र की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
भविष्य की चुनौतियां और सेना की भूमिका:
जनरल ने संबोधन के अंत में भारत की उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चीन और पाकिस्तान से सीमा विवाद, आतंकवाद और साइबर खतरे बढ़ रहे हैं। “हमारी सेना न केवल पारंपरिक युद्ध के लिए, बल्कि आधुनिक हथियारों और तकनीक के लिए तैयार है। लेकिन इसके लिए राजनीतिक समर्थन अनिवार्य है।” उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सेना में भर्ती हों और राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। कार्यक्रम के समापन पर जनरल ने कॉलेज को सैन्य प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया।
यह बयान राष्ट्रीय मीडिया में छाया रहा, और सोशल मीडिया पर #ArmyChiefPraisesPM ट्रेंड किया। रक्षा मंत्रालय ने इसे “राष्ट्रहित में एकजुटता” का उदाहरण बताया। जनरल द्विवेदी का यह दौरा न केवल रीवा को सैन्य इतिहास से जोड़ता है, बल्कि पूरे देश को प्रेरित करता है। उम्मीद है कि यह विश्वास सेना को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, और भारत की संप्रभुता अटल रहेगी।
