by-Ravindra Sikarwar
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में गाजा संघर्ष को समाप्त करने वाले महत्वपूर्ण समझौते पर चर्चा कर रहे एक उच्च स्तरीय सुरक्षा मंत्रिमंडल की बैठक को बीच में ही रोक दिया, ताकि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बातचीत कर सकें। यह घटना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित ’20-सूत्री गाजा शांति योजना’ के पहले चरण की सफलता के ठीक बाद घटी, जिसमें हमास के साथ युद्धविराम और सभी बंधकों की रिहाई पर सहमति बनी है। मोदी ने नेतन्याहू को इस ऐतिहासिक कदम पर बधाई दी और भारत की ओर से पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। यह बातचीत न केवल दोनों देशों के मजबूत संबंधों को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक शांति प्रयासों में भारत की सक्रिय भूमिका को भी रेखांकित करती है।
घटना का संदर्भ और पृष्ठभूमि:
9 अक्टूबर 2025 को इजरायल की सुरक्षा मंत्रिमंडल की बैठक चल रही थी, जिसमें गाजा में युद्धविराम, बंधकों की रिहाई और मानवीय सहायता बढ़ाने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विचार-विमर्श हो रहा था। नेतन्याहू ने बैठक को अस्थायी रूप से स्थगित कर मोदी के कॉल का जवाब दिया। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, यह बातचीत लगभग 10-15 मिनट चली, जिसमें मोदी ने योजना की पहली अवस्था—जिसमें सभी बंधकों की रिहाई और गाजा निवासियों के लिए तत्काल राहत शामिल है—पर संतोष व्यक्त किया।
ट्रंप की शांति योजना का पहला चरण इजरायल और हमास के बीच दो वर्षों से चले आ रहे संघर्ष को रोकने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इस योजना में युद्धविराम के साथ-साथ गाजा में मानवीय सहायता की आपूर्ति बढ़ाना और बंधकों को सोमवार या मंगलवार तक रिहा करने का प्रावधान है। इजरायल सरकार ने इस समझौते को औपचारिक मंजूरी दी है, हालांकि कुछ दक्षिणपंथी मंत्री इसके खिलाफ थे। ट्रंप ने इसे ‘मध्य पूर्व में ऐतिहासिक सफलता’ करार दिया, जो इजरायली सेना की बहादुरी और नेतन्याहू के कठिन निर्णयों का परिणाम है।
बातचीत के मुख्य बिंदु:
मोदी ने नेतन्याहू को ‘मेरा पुराना मित्र’ कहकर संबोधित किया और कहा कि उनकी दोस्ती हमेशा मजबूत रहेगी। उन्होंने बंधकों की रिहाई पर विशेष रूप से बधाई दी और योजना को ‘शांति की दिशा में एक बड़ा कदम’ बताया। मोदी ने जोर दिया कि यह समझौता गाजा के लोगों को राहत प्रदान करेगा और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करेगा। इसके अलावा, उन्होंने आतंकवाद के किसी भी रूप को अस्वीकार्य बताते हुए भारत की ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति दोहराई।
नेतन्याहू ने मोदी के समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि भारत इजरायल का एक विश्वसनीय साझेदार रहा है। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर निकट सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई। इजरायली कार्यालय के अनुसार, बातचीत के बाद बैठक फिर से शुरू हुई और समझौते को अंतिम रूप दिया गया। मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया: “ट्रंप की गाजा शांति योजना के तहत प्रगति पर बधाई। हम बंधकों की रिहाई और गाजा के लोगों के लिए मानवीय सहायता के समझौते का स्वागत करते हैं।”
यह कॉल मोदी की ट्रंप के साथ हुई हालिया बातचीत के बाद आया, जिसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को योजना की सफलता पर बधाई दी थी। मोदी ने ट्रंप से व्यापार वार्ताओं की प्रगति पर भी चर्चा की और आने वाले हफ्तों में निरंतर संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए।
गाजा शांति योजना: विवरण और प्रभाव
ट्रंप की 20-सूत्री योजना गाजा संघर्ष को समाप्त करने का एक बहु-चरणीय प्रयास है। पहला चरण, जो अब लागू हो गया है, निम्नलिखित प्रमुख तत्वों पर आधारित है:
- युद्धविराम: इजरायल और हमास के बीच तत्काल संघर्ष विराम, जो दो वर्षों में 67,000 से अधिक फिलिस्तीनी मौतों का कारण बना।
- बंधकों की रिहाई: हमास द्वारा पकड़े गए सभी बंधकों को रिहा करना, जो 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद से कैद थे।
- मानवीय सहायता: गाजा में भोजन, दवा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में वृद्धि, ताकि मानवीय संकट को कम किया जा सके।
- आगामी चरण: पुनर्निर्माण, आर्थिक सहायता और सीमा सुरक्षा पर फोकस।
यह योजना मध्य पूर्व में स्थिरता लाने की उम्मीद जगाती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पूर्ण क्रियान्वयन के लिए निरंतर निगरानी जरूरी है। इजरायल में विपक्ष और गठबंधन के अधिकांश सदस्यों ने इसे सराहा, जबकि कुछ दक्षिणपंथी नेताओं ने विरोध जताया। बंधक परिवारों ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की मांग की है।
भारत-इजरायल संबंधों में मजबूती:
यह घटना भारत और इजरायल के बीच गहरे रणनीतिक संबंधों को उजागर करती है। मोदी और नेतन्याहू की दोस्ती वर्षों पुरानी है, जो रक्षा, प्रौद्योगिकी और कृषि सहयोग पर आधारित है। भारत ने हमेशा मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया में संतुलित भूमिका निभाई है, जहां वह फिलिस्तीन का भी समर्थन करता है। इस बातचीत ने भारत की कूटनीतिक सक्रियता को दिखाया, जो वैश्विक मंचों पर उसकी बढ़ती प्रभावशाली स्थिति को प्रतिबिंबित करती है।
दोनों नेताओं ने भविष्य में और अधिक सहयोग पर जोर दिया, जिसमें आतंकवाद विरोधी प्रयास, साइबर सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं। मोदी ने योजना को नेतन्याहू की ‘मजबूत नेतृत्व क्षमता’ का प्रमाण बताया, जो द्विपक्षीय संबंधों को नई गहराई प्रदान करता है।
वैश्विक प्रतिक्रियाएं और भविष्य की संभावनाएं:
वैश्विक समुदाय ने इस समझौते का स्वागत किया है। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने शांति प्रयासों की सराहना की, जबकि अमेरिका ने इसे ‘स्थायी शांति’ की दिशा में कदम बताया। हालांकि, संघर्ष की जड़ें गहरी हैं, और योजना के अगले चरणों में आर्थिक पुनर्वास और सीमा विवादों का समाधान चुनौतीपूर्ण होगा।
ट्रंप ने जल्द ही इजरायल यात्रा की योजना बनाई है, जहां वे संसद को संबोधित कर सकते हैं। मोदी ने भी ट्रंप को भारत आने का न्योता दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता न केवल गाजा को राहत देगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में व्यापार और निवेश के नए अवसर खोलेगा।
शांति की ओर एक सकारात्मक कदम:
नेतन्याहू द्वारा बैठक रोककर मोदी से बात करना द्विपक्षीय विश्वास का प्रतीक है। यह घटना दर्शाती है कि कूटनीति में व्यक्तिगत संबंध कितने महत्वपूर्ण होते हैं। गाजा शांति योजना की सफलता से उम्मीद जगी है कि हिंसा का चक्र टूटेगा और मानवीय मूल्यों की जीत होगी। भारत की भूमिका ने एक बार फिर साबित किया कि वह वैश्विक शांति में पुल का काम कर सकता है। उम्मीद है कि ये प्रयास लंबे समय तक स्थिरता लाएंगे।
