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by-Ravindra Sikarwar

भारत के नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी श्रीलंका की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं, जो 22 सितंबर 2025 से 25 सितंबर 2025 तक चलेगी।

उनका यह दौरा भारत-श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग को और मज़बूत बनाने के उद्देश्य से है।

यात्रा के उद्देश्य और एजेंडा:
यात्रा के दौरान निम्न-लिखित प्रमुख गतिविधियाँ और चर्चाएँ होने की योजना है:

  1. उच्च-स्तरीय बैठकें:

     – श्रीलंका की प्रधानमंत्री डॉ. हारिनी अमारासुरिया से मुलाकात।

     – नौसेना के कमांडर, अन्य तीन रक्षा सेवाओं के प्रमुखों, रक्षा सचिव और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से संवाद।

  1. समुद्री सुरक्षा और क्षमता निर्माण पर चर्चा:

     – समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर विचार-विमर्श।

     – नौसेना एवं नौसैनिक प्रशिक्षण, संसाधनों में सुधार और सहयोग के नए क्षेत्र तलाशने पर फोकस।

  1. “Galle Dialogue 2025” में भागीदारी:

   यह एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है जो कोलंबो में हो रहा है, और इसका विषय है: “Maritime Outlook of the Indian Ocean under Changing Dynamics” yani ‘परिवर्तनशील परिस्थितियों में हिन्द महासागर की समुद्री स्थिति’।

  1. नौसेनाएं और अन्य स्थायी संवाद-प्रक्रियाएँ:

   भारत-श्रीलंका नौसेनाएँ नियमित रूप से वार्षिक रक्षा संवाद (Annual Defence Dialogue), स्टाफ़ टॉक्स, संयुक्त अभ्यास (Naval Exercises) जैसे SLINEX, Passage Exercises आदि के माध्यम से बातचीत और अभ्यास करती हैं।

रणनीतिक महत्व:

  • इस यात्रा से यह संदेश जाता है कि भारत श्री-लंका के साथ समुद्री क्षेत्रों में विश्वास और साझेदारी को और डोर करना चाहता है।
  • यह भारत की ‘पडोसी प्रथम’ नीति और (महासागर) विज़न के अंतर्गत आता है, जिसमें हिन्द महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देना ज़रूरी माना गया है।
  • भारत की ओर से समुद्री सुरक्षा से जुड़े संसाधनों और प्रशिक्षण साझा करना, श्रीलंका की क्षमता को बढ़ाने में सहायक होगा।

पूर्व की यात्राएँ और प्रासंगिक पृष्ठभूमि
भारत-श्रीलंका के बीच नौसैनिक सहयोग एक पुरानी परंपरा है। उदाहरण स्वरुप:

  • दिसम्बर 2022 में एडमिरल आर. हरी कुमार की चार-दिन की यात्रा रही थी, जिसमें उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा रक्षा और नौसेना अधिकारियों से मुलाकात की थी।
  • उस समय उन्होंने श्रीलंका की नेशनल डिफेंस कॉलेज और नेवल & मेरीटाइम अकादमी, त्रिंकोमाली में भी हिस्सा लिया था।
  • भारत ने श्रीलंका को कुछ ऑफशोर पेट्रोल वेसल (OPV) दिए हैं, और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चले हैं ताकि नौसेना के परिचालन संबंधी कौशल विकसित हो सकें।

संभावित चुनौतियाँ और आगे की राह

  • अच्छे समन्वय के लिए राजनीतिक और नौसैनिक नेतृत्व में निरंतर संवाद आवश्यक है, क्योंकि समुद्री सुरक्षा के खतरे सीमापार भी हो सकते हैं।
  • संसाधन, उपकरण, प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निरंतरता सुनिश्चित करना होगा, ताकि साझेदारी सतत बनी रहे।
  • बदलती वैश्विक और क्षेत्रीय राजनीतिक परिस्थितियाँ, समुद्री क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, और अन्य देशों की भागीदारी (जैसे चीन की गतिविधियाँ) इस सहयोग को प्रभावित कर सकती हैं।

नौसेना प्रमुख की यह यात्रा सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं है, बल्कि भारत-श्रीलंका के बीच समुद्री क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को मजबूती देने का अवसर है। यह यात्रा भारत की विदेश नीति की उन पहलों का हिस्सा है जिनका लक्ष्य है कि हिन्द महासागर क्षेत्र में बहुपक्षीय सहयोग, सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ावा मिले।

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