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Report by: Yogendra Singh

Mungeli : शिकारी डेरा में अवैध शराब का कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में आबकारी विभाग ने एक बार फिर यहाँ दबिश दी और भारी मात्रा में महुआ लाहन व कच्ची शराब बरामद की। लेकिन इस पूरी कार्रवाई में सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि पिछले 3 वर्षों से विभाग इसी एक निश्चित स्थान पर लगातार छापेमारी कर रहा है, फिर भी आज तक एक भी मुख्य आरोपी पुलिस या विभाग के हत्थे नहीं चढ़ा है। हर बार की तरह इस बार भी विभाग भारी मात्रा में सामग्री जब्त कर वापस लौट आया, जबकि अवैध शराब बनाने वाले अपराधी मौके से फरार होने में सफल रहे।

कार्रवाई केवल जब्ती तक सीमित: विभाग की मंशा पर सवाल

Mungeli स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि आबकारी विभाग की कार्रवाई केवल आंकड़ों को भरने के लिए की जा रही है। जब विभाग को सटीक सूचना होती है कि शराब कहाँ बन रही है, तो सवाल यह उठता है कि अपराधी हर बार भागने में कैसे कामयाब हो जाते हैं? क्या छापेमारी की सूचना पहले ही लीक हो जाती है? लगातार तीन साल से एक ही स्थान पर अवैध कारोबार का फलना-फूलना यह दर्शाता है कि विभाग की पकड़ ढीली है या फिर कहीं न कहीं मिलीभगत की आशंका है। केवल महुआ लाहन नष्ट कर देने से इस अवैध धंधे पर लगाम नहीं लग रही है।

ग्रामीणों का बढ़ता आक्रोश और सुरक्षा की मांग

Mungeli शिकारी डेरा और आसपास के ग्रामीणों में इस लचर व्यवस्था को लेकर भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शराब के कारण गांव का माहौल खराब हो रहा है और युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में आ रही है। स्थानीय लोगों ने अब सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यक्षमता पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि यदि विभाग वास्तव में इस अवैध धंधे को बंद करना चाहता है, तो उसे केवल सामग्री जब्त करने के बजाय ‘बैकवर्ड लिंकेज’ की जांच करनी चाहिए और उन रसूखदारों को पकड़ना चाहिए जो इस काले कारोबार को संरक्षण दे रहे हैं।

प्रशासनिक विफलता या सोची-समझी रणनीति?

Mungeli आबकारी विभाग की इस कार्यप्रणाली ने जिले के प्रशासनिक तंत्र को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। लगातार तीन साल की विफलता यह साबित करने के लिए काफी है कि विभाग की वर्तमान रणनीति पूरी तरह से नाकाम रही है। ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस मामले की विशेष जांच कराई जाए और उन अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, जिनकी नाक के नीचे सालों से यह अवैध कारोबार बेखौफ चल रहा है।

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