रिपोर्टर: नदीम अंसारी
150 Pakistanis brides : भारत और पाकिस्तान के बीच बने तनावपूर्ण राजनयिक संबंधों के बावजूद करीब 150 पाकिस्तानी युवतियां शादी के बंधन में बंधने के लिए भारत पहुंच चुकी हैं। वर्ष 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमले के जवाब में भारत सरकार द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दोनों देशों के बीच सड़क मार्ग और वीजा सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया था।
वीजा पर लगी इस रोक के कारण भारत के अलग-अलग शहरों में रहने वाले पुरुषों से सगाई कर चुकीं कई पाकिस्तानी युवतियों का इंतजार काफी लंबा हो गया था। हालांकि, सामाजिक संगठनों और धार्मिक पीठों के प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने विशेष शर्तों के तहत इन्हें भारत आने की अनुमति दी है।
वाघा-अटारी बॉर्डर बंद होने के बाद तीसरे देशों का लिया सहारा
150 Pakistanis brides ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान के सिंध प्रांत के हिंदू परिवार अपनी बेटियों के रिश्ते भारत में तय करते आए हैं और आवाजाही का मुख्य जरिया पंजाब स्थित वाघा-अटारी बॉर्डर रहा है। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस सड़क मार्ग को पूरी तरह सील कर दिया गया और सीधे वीजा निरस्त कर दिए गए।
नागपुर के सिंधी समुदाय के प्रतिनिधि राजेश झांबिया के अनुसार, जमीनी रास्ता बंद होने के बाद इन दुल्हनों और उनके परिजनों ने अप्रत्यक्ष मार्गों का सहारा लिया। भारत सरकार से अनुमति मिलने के बाद यह परिवार संयुक्त अरब अमीरात (दुबई), ओमान (मस्कट), श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे तीसरे देशों के रास्ते हवाई यात्रा करके भारत पहुंचे हैं।
शदानी दरबार की पहल और केंद्रीय गृह मंत्रालय की सशर्त मंजूरी
150 Pakistanis brides अटके हुए वैवाहिक मामलों को सुलझाने के लिए छत्तीसगढ़ के रायपुर में स्थित शदानी दरबार के आध्यात्मिक प्रमुख संत युधिष्ठिरलाल ने विशेष पहल की। पाकिस्तान के घोटकी स्थित शदानी पीठ से समन्वय स्थापित कर ऐसे मामलों की पूरी सूची तैयार की गई, जिनकी सगाई भारत में हो चुकी थी।
- सूची का हस्तांतरण: 150 से अधिक दुल्हनों और उनके परिजनों का ब्योरा तैयार कर केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को भेजा गया।
- हवाई यात्रा की शर्त: गृह मंत्रालय ने मानवीय आधार पर वीजा जारी करते हुए स्पष्ट शर्त रखी कि प्रवेश केवल स्वीकृत हवाई मार्गों से ही होगा।
- वितरण: इन दुल्हनों की शादियां नागपुर, रायपुर, जोधपुर, पुणे और देश के अन्य शहरों में तय हुई थीं, जिनमें से नागपुर में ही 15 मामले दर्ज किए गए।
300 अन्य युवतियों को भी वीजा मिलने की उम्मीद
150 Pakistanis brides अप्रैल 2026 से शुरू हुआ यह सिलसिला अब भी जारी है और लगभग 150 दुल्हनें अपने परिवारों के साथ भारत आकर विवाह के अटके हुए कार्यों को पूरा कर चुकी हैं। हालांकि, सामुदायिक प्रतिनिधियों का कहना है कि पाकिस्तान में ऐसी करीब 300 अन्य युवतियां भी हैं जो वीजा मिलने की राह देख रही हैं।
सामाजिक संगठनों ने भारत सरकार से अपील की है कि शेष मामलों पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उन्हें वीजा जारी किया जाए, ताकि लंबे समय से रुकी हुई शादियां संपन्न हो सकें।
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