By: Ravindra Sikarwar
मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में जल जीवन मिशन के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान भाजपा सांसद रोडमल नागर ने अधिकारियों की देरी पर अनोखे अंदाज में नाराजगी जाहिर की। व्यंग्य के रूप में उन्होंने मंच से उतरकर एक अधिकारी के पैर छूने की कोशिश की, जिससे कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। इस घटना ने प्रशासनिक अनुशासन और समयबद्धता पर सवाल उठाए हैं, साथ ही जल जीवन मिशन जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की जमीनी हकीकत को उजागर किया है।
घटना का पूरा विवरण
यह मामला राजगढ़ जिले के कुंडीबेह गांव का है, जहां जल अर्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यह गांव देश में पहला ऐसा गांव बना जहां 24 घंटे नल से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू हुई। कार्यक्रम में सांसद रोडमल नागर और स्थानीय विधायक अमरसिंह यादव समय पर पहुंच गए थे, लेकिन दिल्ली से आए जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव कमलकिशोर सोम, जल निगम के प्रबंध निदेशक केवीएस चौधरी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी काफी देर से पहुंचे।
इस देरी के कारण सांसद को करीब डेढ़ घंटे इंतजार करना पड़ा। जब अधिकारी अंततः पहुंचे तो सांसद मंच से उतरे और व्यंग्यपूर्ण अंदाज में उनके पैर छूने लगे। उन्होंने कहा कि “बेवकूफों की तरह डेढ़ घंटा इंतजार करवाया गया”। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि केवल आयोजन और इवेंट करने से कुछ हासिल नहीं होता, बल्कि धरातल पर ठोस काम दिखना चाहिए।
सांसद की नाराजगी का कारण
सांसद रोडमल नागर ने बाद में मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी किसी व्यक्ति विशेष से नहीं थी, बल्कि जल जीवन मिशन प्रोजेक्ट में हो रही देरी और लापरवाही से थी। उन्होंने बताया कि कुंडीबेह सहित क्षेत्र के 25 गांवों में 24 घंटे पानी की आपूर्ति पहुंचाना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन ऐसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में समय की पाबंदी और जिम्मेदारी का पालन अनिवार्य है। सांसद का कहना था कि जनप्रतिनिधि और ग्रामीण जनता समय पर पहुंचकर इंतजार करती है, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता से कार्यक्रम प्रभावित होते हैं।
जल जीवन मिशन की उपलब्धि और चुनौतियां
जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से शुद्ध जल पहुंचाना है। कुंडीबेह गांव का यह कार्यक्रम इस दिशा में एक मिसाल बना, जहां अब घरों में चौबीसों घंटे पानी उपलब्ध है। इससे ग्रामीणों विशेषकर महिलाओं को पानी लाने की दैनिक मेहनत से मुक्ति मिली है। हालांकि, सांसद की नाराजगी से यह भी सामने आया कि प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में अभी भी देरी और समन्वय की कमी जैसी समस्याएं बाकी हैं।


राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा हुई। कई लोगों ने सांसद के इस व्यंग्यपूर्ण तरीके की सराहना की, तो कुछ ने इसे अनुशासनहीनता का उदाहरण बताया। भाजपा नेतृत्व ने इसे अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक संदेश माना। वहीं, विपक्षी दलों ने मौके का फायदा उठाते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
यह घटना एक बार फिर समय प्रबंधन और जनकेंद्रित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता को रेखांकित करती है। सांसद रोडमल नागर का यह कदम अधिकारियों को समयबद्धता का पाठ पढ़ाने वाला साबित हुआ, साथ ही जल जीवन मिशन जैसे प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की प्रेरणा भी देता है। मध्यप्रदेश में इस योजना के तहत कई गांवों को लाभ मिल रहा है, और उम्मीद है कि ऐसी घटनाएं प्रशासन को और अधिक सतर्क बनाएंगी।
