By: Ravindra Sikarwar
भोपाल: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा 6 दिसंबर को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ‘बाबरी मस्जिद’ की तर्ज पर मस्जिद की नींव रखे जाने का विरोध अब मध्य प्रदेश तक पहुँच गया है। मंगलवार को राजधानी भोपाल में हिंदू संगठनों ने जमकर हंगामा किया और साफ कह दिया कि “बाबर के नाम पर मस्जिद किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
श्री हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच के सैकड़ों कार्यकर्ता दोपहर में भोपाल के व्यस्तम इलाके रोशनपुरा चौराहे और बोर्ड ऑफिस क्षेत्र में एकत्र हुए। हाथों में भगवा झंडे, तख्तियाँ और बड़े-बड़े पोस्टर लिए कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की – “बाबर का नाम मिटाओ, देश का अपमान बंद करो”, “अब्दुल कलाम के नाम पर बनाओ, बाबर के नाम पर नहीं”, “जय श्री राम” और “भारत माता की जय”।
संगठनों के संयुक्त अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने मंच से गरजते हुए कहा, “बाबर एक विदेशी आक्रमणकारी था जिसने हमारी सभ्यता, मंदिर और संस्कृति को कुचला। उसके नाम पर मस्जिद बनाना हर भारतीय का अपमान है। अगर मस्जिद बनानी ही है तो डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, क्रांतिकारी अशफाकउल्ला खान या मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे महान सपूतों के नाम पर बनाओ। बाबर का नाम स्वीकार नहीं करेंगे।”
प्रदर्शन की सबसे चर्चित तस्वीर तब बनी जब कार्यकर्ता हाथों में “बाबर शौचालय” लिखे पोस्टर लेकर पहुँचे और उन्हें शहर के सार्वजनिक शौचालयों पर चिपकाने की कोशिश करने लगे। उनका कहना था कि “बाबर का नाम सिर्फ शौचालय के लायक है, मस्जिद के लायक नहीं।” पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और सभी पोस्टर जब्त कर लिए। इस दौरान हल्की धक्का-मुक्की भी हुई, लेकिन स्थिति नियंत्रण में रही।
दरअसल, यह सिलसिला सोमवार को अशोकनगर जिले से शुरू हुआ था। वहाँ बीजेपी के एक मंडल अध्यक्ष ने बायपास रोड किनारे बने सार्वजनिक शौचालय पर बड़ी पट्टी चिपका दी थी, जिस पर लिखा था – “बाबर शौचालय”। उस तस्वीर के वायरल होते ही पूरे प्रदेश में हिंदू संगठनों में आक्रोश फैल गया और मंगलवार को भोपाल में बड़ा प्रदर्शन हुआ।
कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टैग करते हुए सोशल मीडिया पर भी मुहिम चला रखी है कि “मध्य प्रदेश में बाबर के नाम पर कोई स्मारक या धार्मिक स्थल नहीं बनने दिया जाएगा।” कई लोगों ने लिखा, “राम मंदिर बनने के बाद अब बाबर का नाम लेने की हिम्मत भी छोड़ दो।”
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भारी बंदोबस्त रखा था। भोपाल के एएसपी क्राइम राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि शांति भंग न हो, इसके लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए थे। किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया, सिर्फ पोस्टर जब्त किए गए।
विवाद की जड़ पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में है जहाँ हुमायूं कबीर ने अपने निजी जमीन पर ‘बाबरी मस्जिद’ की शक्ल-सूरत वाली मस्जिद का शिलान्यास किया। देश भर के कई हिंदू संगठनों ने इसे “हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़” करार दिया है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने भी केन्द्र सरकार से मांग की है कि ऐसे नामों पर तुरंत रोक लगाई जाए।
भोपाल का यह प्रदर्शन बताता है कि 6 दिसंबर 1992 की यादें अभी भी लोगों के जेहन में जिंदा हैं और बाबर का नाम अब भी भावनात्मक मुद्दा बना हुआ है। आने वाले दिनों में अन्य शहरों में भी इसी तरह के प्रदर्शन होने की संभावना जताई जा रही है।
