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Report by: Pratap Singh Baghel

Morena : मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में प्रतिबंधित चंबल अभयारण्य से रेत का अवैध उत्खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को चंबल राजघाट पुल के समीप वन विभाग ने पुलिस के साथ मिलकर रेत माफियाओं के खिलाफ एक बड़ी छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया। हालांकि, विभाग की आहट पाते ही माफियाओं के बीच भगदड़ मच गई और वे मौके का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे। इस घटना ने एक बार फिर चंबल क्षेत्र में सक्रिय बजरी माफियाओं के बुलंद हौसलों और वन विभाग की चुनौतियों को उजागर कर दिया है।

गुप्त सूचना पर वन विभाग और पुलिस की संयुक्त दबिश

Morena पिछले काफी समय से वन विभाग को यह शिकायतें मिल रही थीं कि चंबल राजघाट पुल के आसपास के क्षेत्रों में रेत माफिया सक्रिय हैं और बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन कर रहे हैं। इन सूचनाओं की पुष्टि होने के बाद देवरी गेम रेंजर श्याम सिंह चौहान ने रणनीति तैयार की।

कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए सरायछोला थाने से अतिरिक्त पुलिस बल मंगाया गया। इसके बाद वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने पूरी तैयारी के साथ राजघाट पुल के पास घेराबंदी की। प्रशासन का उद्देश्य माफियाओं को रंगे हाथों पकड़कर उनके वाहनों को जब्त करना था।

माफियाओं में मची भगदड़, जान जोखिम में डालकर भगाए ट्रैक्टर

Morena जैसे ही वन विभाग और पुलिस की गाड़ियां राजघाट पुल के नजदीक पहुँचीं, वहां अवैध रेत लोडिंग कर रहे माफियाओं में हड़कंप मच गया। खुद को घिरता देख बजरी माफियाओं ने अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को अत्यधिक तेज गति से दौड़ाना शुरू कर दिया।

कार्रवाई से बचने के लिए माफियाओं ने उबड़-खाबड़ रास्तों और ढलानों पर भी ट्रैक्टरों की रफ्तार कम नहीं की, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस और फॉरेस्ट की टीम ने सूझबूझ दिखाते हुए इन माफियाओं का पीछा किया, लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए माफिया जान जोखिम में डालकर भाग निकले।

जंगल के रास्ते हुए गायब, खाली हाथ लौटी टीम

Morena विभाग की टीम ने हार नहीं मानी और माफियाओं का पीछा करते हुए जंगल के काफी अंदर तक पहुँच गई। लेकिन भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए रेत माफिया घने जंगल और दुर्गम रास्तों के जरिए अधिकारियों की आँखों के सामने से ओझल हो गए।

काफी मशक्कत के बाद भी जब कोई ट्रैक्टर या माफिया पकड़ में नहीं आया, तो अधिकारियों को मायूस होकर खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि माफिया स्थानीय रास्तों से भली-भांति परिचित हैं, जिसका फायदा उन्हें भागने में मिलता है। हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान जारी रहेगा और माफियाओं के नेटवर्क को तोड़ने के लिए गश्त बढ़ाई जाएगी।

चंबल में रेत का अवैध कारोबार प्रशासन के लिए सिरदर्द बना हुआ है। दिन-दहाड़े होने वाली यह भगदड़ दर्शाती है कि माफियाओं के पास सूचना तंत्र कितना मजबूत है। अब देखना होगा कि विभाग आने वाले दिनों में इन पर नकेल कसने के लिए क्या नई रणनीति अपनाता है।

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