Meerut Snakebite Murder CaseMeerut Snakebite Murder Case
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Meerut Snakebite Murder Case:मेरठ जिले में चर्चित अमित कश्यप हत्याकांड में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपनी ही पति की हत्या करने वाली पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को अदालत ने दोषी करार देते हुए सजा का ऐलान कर दिया है। इस सनसनीखेज मामले ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी, क्योंकि हत्या को प्राकृतिक मौत (सर्पदंश) दिखाने की शातिर कोशिश की गई थी।

अवैध संबंध और हत्या की खौफनाक साजिश

Meerut Snakebite Murder Case:मृतक अमित कश्यप बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव का रहने वाला था। आरोपी अमरदीप, अमित के साथ ही टाइल्स और पत्थर लगाने का काम करता था, जिस वजह से उसका अमित के घर आना-जाना था। इसी दौरान अमरदीप और अमित की पत्नी रविता के बीच नजदीकियां बढ़ गईं और दोनों का प्रेम संबंध शुरू हो गया।

जब अमित को इस अवैध रिश्ते की भनक लगी, तो उसने इसका कड़ा विरोध किया। रास्ते का कांटा हटाने के लिए रविता और अमरदीप ने अमित को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रची।

सांप खरीदकर रचा गया था ड्रामा

Meerut Snakebite Murder Case:साजिश के तहत दोनों ने एक सपेरे से 1,000 रुपये में सांप खरीदा था। 12-13 अप्रैल 2025 की रात को जब अमित गहरी नींद में था, तब रविता ने अपने प्रेमी अमरदीप को घर बुलाया। दोनों ने मिलकर पहले अमित की गला दबाकर हत्या कर दी और इसके बाद मामले को आत्महत्या या प्राकृतिक दुर्घटना दिखाने के लिए उसके शव के पास सांप छोड़ दिया ताकि लोगों को लगे कि उसकी मौत सांप के काटने से हुई है।

सुबह जब परिजन जागे, तो रविता ने ऐसा नाटक किया जैसे पति की मौत सांप के काटने से हुई हो। शरीर पर सांप के काटने के करीब 10 निशान भी मिले थे, जिससे परिवार को शुरुआत में यही लगा।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला राज और 17 महीने की कानूनी लड़ाई

Meerut Snakebite Murder Case:घटना के बाद जब पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने लगी, तो रविता ने जमकर विरोध किया और परिवार को धमकाया भी। हालांकि, परिवार की जिद और पुलिस के हस्तक्षेप पर जब पोस्टमार्टम हुआ, तो सच सामने आ गया। रिपोर्ट में साफ हुआ कि अमित की मौत सांप के काटने से नहीं, बल्कि गला घुटने (दम घुटने) से हुई थी।

इस खुलासे के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रविता और अमरदीप को गिरफ्तार कर लिया था। पिछले करीब 17 महीनों से दोनों आरोपी चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में बंद थे। कोर्ट में करीब 87 तारीखों और 12 गवाहों की गवाही के बाद आखिरकार न्याय की जीत हुई है।

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