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by-Ravindra Sikarwar

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के टिकैतनगर थाना क्षेत्र में स्थित सराय बरई गांव में एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में अचानक हुए जोरदार धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया। इस भयावह हादसे में दो मजदूरों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री की इमारत का बड़ा हिस्सा धराशायी हो गया, आसपास के घरों की दीवारें कांप उठीं और धमाके की गूंज 2-3 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। यह घटना न केवल स्थानीय लोगों में दहशत पैदा कर गई, बल्कि अवैध पटाखा निर्माण इकाइयों पर सख्ती की आवश्यकता पर फिर से सवाल खड़े कर दी। प्रशासन ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया है, लेकिन प्रारंभिक जांच से साफ हो गया है कि सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी के कारण यह त्रासदी हुई।

घटना का पूरा क्रम और पृष्ठभूमि:
घटना गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे घटी, जब सराय बरई गांव के एक सुनसान इलाके में बनी पटाखा फैक्ट्री में अचानक सीरीज ऑफ विस्फोट शुरू हो गए। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, फैक्ट्री में शादी-ब्याह और त्योहारों के लिए इस्तेमाल होने वाले पटाखे, अनार, फुलझड़ियां और अन्य विस्फोटक सामग्री तैयार की जा रही थी। धमाके की शुरुआत एक छोटे विस्फोट से हुई, जो तेजी से फैल गई और पूरे परिसर को लपेट में ले लिया। आंखों देखा हाल बताने वाले एक ग्रामीण ने कहा, “अचानक धमाका हुआ, तो लगा जैसे भूकंप आ गया। धुआं और आग की लपटें आसमान छूने लगीं, और चीख-पुकार मच गई।” विस्फोट के कारण फैक्ट्री में रखे सैकड़ों किलोग्राम बारूद और रसायनों ने चेन रिएक्शन पैदा कर दिया, जिससे इमारत का छत और दीवारें मलबे में बदल गईं।

फैक्ट्री मालिक खालिद के नाम पर यह इकाई चल रही थी, जिसका पटाखा निर्माण लाइसेंस मार्च 2025 तक वैध था। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि लाइसेंस समाप्त होने के बाद भी यह अवैध रूप से संचालित हो रही थी। स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले कई महीनों से वे इस फैक्ट्री के संचालन की शिकायत प्रशासन से करते आ रहे थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। गांव के सरपंच ने कहा, “यह फैक्ट्री आवासीय इलाके के करीब थी, जहां बिना किसी सुरक्षा उपाय के काम चल रहा था। बार-बार चेतावनी दी गई, लेकिन अफसरों ने अनसुना कर दिया।”

पीड़ितों का विवरण और बचाव कार्य:
मृतकों की पहचान अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक दोनों मजदूर फैक्ट्री में काम करने वाले स्थानीय युवक थे—एक का नाम मोहम्मद शाहिद (25 वर्ष) और दूसरे का नाम अभी अज्ञात है। धमाके के दौरान उनके शरीर बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए, और शवों के टुकड़े फैक्ट्री के बाहर बिखर गए। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिनमें दो महिलाएं और एक बच्चा शामिल है। घायलों को तुरंत टिकैतनगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन चोटों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल बाराबंकी रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार, घायलों को जलन, शॉक और हड्डी टूटने की चोटें आई हैं, और दो का जीवन खतरे में है।

सूचना मिलते ही टिकैतनगर थाने की पुलिस फोर्स, फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां और एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) की टीम मौके पर पहुंची। बचाव कार्य करीब तीन घंटे चला, जिसमें मलबा हटाकर संभावित फंसे लोगों की तलाश की गई। आग बुझाने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि विस्फोटक सामग्री के कारण बार-बार छोटे-मोटे धमाके हो रहे थे। जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि राहत कार्य के दौरान कोई और व्यक्ति फंसने की आशंका नहीं बची है। घायलों के परिवारों को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता और मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई है।

कारण और सुरक्षा लापरवाही का खुलासा:
प्रारंभिक जांच से पता चला है कि धमाका फैक्ट्री में रखे अमोनियम नाइट्रेट और अन्य रसायनों के अनुचित भंडारण तथा मिश्रण के दौरान हुई चिंगारी से हुआ। फैक्ट्री में कोई फायर सेफ्टी उपकरण, वेंटिलेशन सिस्टम या आपातकालीन निकासी मार्ग नहीं था। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध निर्माण और अधिक मात्रा में विस्फोटक सामग्री का स्टॉक ही इस त्रासदी का मुख्य कारण है। एसएसपी (सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) आशीष तिवारी ने कहा, “यह स्पष्ट रूप से मानवीय लापरवाही का मामला है। फैक्ट्री मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है, और लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो गई।” ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से ऐसी इकाइयां फल-फूल रही हैं।

यह हादसा उत्तर प्रदेश में पटाखा उद्योग की बढ़ती दुर्घटनाओं की कड़ी में एक और कड़ी जोड़ता है। पिछले दो वर्षों में राज्य में ऐसी 15 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 50 से ज्यादा मौतें हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि दीवाली जैसे त्योहारों से पहले अवैध फैक्टरियों पर सघन अभियान चलाना जरूरी है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई:
बाराबंकी जिला प्रशासन ने घटनास्थल को सील कर दिया है और फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया है, जो विस्फोट के सटीक कारणों का पता लगाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, “ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी; सभी अवैध फैक्टरियों पर छापेमारी अभियान तेज किया जाएगा।” जिला स्तर पर एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई है, जो 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपेगी। साथ ही, आसपास के गांवों में सतर्कता अभियान चलाया जा रहा है, जहां लोगों को संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है।

सामाजिक प्रभाव और सबक:
यह हादसा न केवल दो परिवारों को orphan कर गया, बल्कि पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ा दी। सराय बरई जैसे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अभाव में युवा ऐसी खतरनाक नौकरियों पर मजबूर हो जाते हैं, जो जानलेवा साबित होती हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि पटाखा उद्योग को नियंत्रित करने के लिए नई नीति लाई जाए, जिसमें वैध लाइसेंसिंग, सुरक्षा प्रशिक्षण और बीमा अनिवार्य हो। यह घटना एक चेतावनी है कि त्योहारों की चकाचौंध के पीछे छिपे खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

घटना के बाद इलाके में शांति बहाल करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन पीड़ित परिवारों का दर्द कम होने में समय लगेगा। अपडेटेड जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों पर नजर रखें। यदि आपको इस घटना से जुड़ी कोई अतिरिक्त जानकारी चाहिए, तो बताएं।

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