by-Ravindra Sikarwar
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रसिद्ध विरोध प्रदर्शन स्थल जंतर मंतर पर सोमवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जहां एक व्यक्ति ने भीड़भाड़ वाली जगह पर खुद को गोली मार ली। यह हादसा करीब सुबह 8:15 से 8:30 बजे के बीच हुआ, जब आसपास सैकड़ों लोग मौजूद थे। मृतक की पहचान लोकेश के रूप में हुई है, जो 40 वर्षीय बेरोजगार अविवाहित युवक था और मध्य प्रदेश के मोरेना जिले में अपने परिवार के साथ रहता था। पुलिस को सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची टीम ने शव को अस्पताल ले जाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
लोकेश पिछले कई महीनों से दिल्ली में था और जुलाई से ही वह जंतर मंतर पर अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहा था। उसकी बहन के पति, जो मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग में चपरासी के पद पर कार्यरत थे, की 2019 में अचानक मौत हो गई थी। इसके बाद लोकेश ने अपनी बहन को संवेदनशील आधार पर उसी विभाग में नौकरी दिलाने की मांग की थी। जुलाई में भी वह इसी मुद्दे पर यहां प्रदर्शन कर चुका था। हाल के दिनों में भी वह लगातार जंतर मंतर पर डेरा डाले हुए था, लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने से वह हताश हो गया था। सोमवार को वह दिल्ली सुबह ही पहुंचा था और सीधे जंतर मंतर आ गया। गवाहों के अनुसार, वहां पहुंचने पर उसने चाय पी और आसपास घूमने लगा। अचानक उसने अपनी कनपटी पर देशी बनी पिस्तौल से गोली मार ली, जिसकी आवाज सुनते ही आसपास के लोग दौड़ पड़े।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। करीब 8:40 बजे सूचना पाकर ड्यूटी पर तैनात अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल को घेर लिया। लोकेश का शव जमीन पर पड़ा मिला, जबकि पिस्तौल उसके पास ही बरामद हुई। पुलिस शव को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गई, जहां पोस्टमार्टम के लिए रखा गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच जारी है और लोकेश के परिवार से संपर्क साधा जा रहा है। अभी तक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या लोकेश ने पहले किसी को इस कदम के बारे में बताया था या नहीं।
जंतर मंतर, जो संसद भवन से महज एक किलोमीटर दूर स्थित है, दिन के समय विरोध प्रदर्शनों के लिए नामित जगह है। यहां अक्सर विभिन्न मुद्दों पर लोग इकट्ठा होते हैं, इसलिए घटना के समय वहां काफी संख्या में लोग मौजूद थे। गोली की आवाज से अफरा-तफरी मच गई, लेकिन पुलिस ने जल्दी ही स्थिति को नियंत्रित कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि लोकेश शांत स्वभाव का लग रहा था, लेकिन उसकी आंखों में निराशा साफ झलक रही थी।
यह घटना न केवल जंतर मंतर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सरकारी नौकरियों में संवेदनशील नियुक्तियों की प्रक्रिया में देरी के कारण लोगों की हताशा को भी उजागर करती है। मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन लोकेश के परिवार का कहना है कि वे न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी। फिलहाल, जंतर मंतर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि ऐसी कोई और घटना न हो। यह हादसा पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है, जहां लोग नौकरी की अनिश्चितता और मानसिक स्वास्थ्य पर बहस कर रहे हैं।
