by-Ravindra Sikarwar
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से लगभग 170 किलोमीटर दूर दुर्गापुर में एक निजी मेडिकल कॉलेज की एक छात्रा के साथ हुई गैंगरेप की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस जघन्य अपराध के बाद राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को मीडिया से बातचीत में ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे राजनीतिक पटल पर हंगामा मचा दिया। उन्होंने कहा कि लड़कियों को रात में कॉलेज के बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, जिसकी व्यापक रूप से आलोचना हो रही है। यह बयान न केवल संवेदनशून्य लग रहा है, बल्कि पीड़ित को ही दोषी ठहराने जैसा प्रतीत हो रहा है।
घटना की पूरी जानकारी इस प्रकार है: पीड़िता एक 23 वर्षीय दूसरी वर्ष की एमबीबीएस छात्रा है, जो ओडिशा के जलेस्वर जिले की रहने वाली है। वह दुर्गापुर के एक निजी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। शुक्रवार शाम करीब 8:30 बजे वह अपने एक पुरुष मित्र के साथ कॉलेज कैंपस के पास स्थित एक रेस्तरां में डिनर करने गई थी। डिनर के बाद दोनों लौट रहे थे, तभी शोभापुर क्षेत्र के कॉलेज के पीछे वाले जंगली इलाके में तीन अज्ञात युवकों ने उन पर हमला बोल दिया। हमलावरों ने पहले छात्रा का मोबाइल फोन छीन लिया, फिर उसके मित्र को भगा दिया और उसे जबरन घसीटते हुए घने जंगल में ले गए। वहां उन्होंने छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार किया। अपराधियों ने न केवल उसके साथ दुराचार किया, बल्कि उसके फोन को फेंक दिया, जिससे वह मदद के लिए संपर्क नहीं कर सकी।
पीड़िता के मित्र ने तुरंत कॉलेज के अन्य साथियों को सूचना दी। वे लौटे तो छात्रा को जमीन पर घायल अवस्था में पाया। उन्हें फौरन दुर्गापुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसकी हालत गंभीर है। मेडिकल जांच में पुष्टि हुई कि उसके साथ गैंगरेप हुआ है। पीड़िता के माता-पिता ओडिशा से तत्काल दुर्गापुर पहुंचे और न्यू टाउनशिप पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। कॉलेज प्रशासन ने भी एक बयान जारी कर कहा कि वे पीड़िता के साथ खड़े हैं और पुलिस जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। दुर्गापुर कमिश्नरेट के डीसी (ईस्ट) अभिषेक गुप्ता ने बताया कि घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम भेजी गई है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। रविवार को ही पुलिस ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों के नाम शेख रईजुद्दीन, अपू बाउरी और फिरदौस शेख हैं। ये सभी स्थानीय निवासी हैं और इन्हें जंगल क्षेत्र में छापेमारी के दौरान पकड़ा गया। पुलिस का कहना है कि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है और पूछताछ में और सुराग मिल रहे हैं। मामले में आईपीसी की धारा 376डी (गैंगरेप) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाहर पत्रकारों से बातचीत में इस घटना पर पहली बार प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मैं इस घटना से स्तब्ध हूं, लेकिन निजी मेडिकल कॉलेजों को भी अपने छात्रों, खासकर लड़कियों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। लड़कियों को रात में कॉलेज के बाहर जाने की इजाजत ही नहीं दी जानी चाहिए। वे खुद को भी बचाना सीखें। वहां जंगल का इलाका है। रात 12:30 बजे वह कैसे बाहर निकली? पुलिस हर किसी के घर-घर जाकर निगरानी नहीं कर सकती।” बनर्जी ने आगे कहा कि यह निजी संस्थान का मामला है, इसलिए सरकार पर दोष क्यों डाला जा रहा है। उन्होंने ओडिशा के पुरी बीच पर एक महीने पहले हुई तीन लड़कियों के गैंगरेप का जिक्र करते हुए पूछा, “ओडिशा सरकार क्या कार्रवाई कर रही है? वहां भी लड़कियां रात में बीच पर क्यों घूम रही थीं?”
ममता का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में आग की तरह फैल गया। विपक्षी दलों ने इसे महिलाओं की सुरक्षा पर सरकार की विफलता का प्रमाण बताते हुए कड़ी आलोचना की। भाजपा के केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल प्रभारी सुकांत मजुमदार ने कहा, “ममता दीदी पीड़िता को ही जिम्मेदार ठहरा रही हैं। आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड के एक साल बाद भी कानून-व्यवस्था चरमरा गई है। यह बयान न केवल असंवेदनशील है, बल्कि अपराधियों को खुली छूट दे रहा है।” भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी ने दुर्गापुर में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया और पीड़िता के पिता से संपर्क कर न्याय का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा, “ममता सरकार महिलाओं की सुरक्षा में पूरी तरह नाकाम रही है। सांदेशखली, पार्क स्ट्रीट और अब दुर्गापुर—ये घटनाएं साबित करती हैं कि बंगाल असुरक्षित हो गया है।”
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनाते और प्रियंका गांधी ने भी ट्वीट कर नाराजगी जताई, जबकि राहुल गांधी ने कहा कि ऐसी मानसिकता ही महिलाओं के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देती है। पीड़िता के पिता ने भावुक होकर कहा, “मेरी बेटी की सुरक्षा अब खतरे में है। होस्टल सिस्टम कमजोर है, रात 8-9 बजे डिनर करने गई थी, लेकिन कोई सिक्योरिटी नहीं। हमने ओडिशा सरकार से उसे ट्रांसफर करने की मांग की है।” ओडिशा के मुख्यमंत्री ने पीड़िता के परिवार से बात की और पश्चिम बंगाल सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, “हम हर संभव सहायता देंगे और दोषियों को कड़ी सजा दिलाएंगे।”
यह घटना पिछले साल कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक पोस्टग्रेजुएट डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और हत्या की याद दिला रही है, जिसने देशव्यापी आंदोलन छेड़ दिया था। विशेषज्ञों का कहना है कि ममता बनर्जी का बयान पुरानी सोच को दर्शाता है, जहां महिलाओं को ही दोष दिया जाता है, न कि अपराधियों को। बनर्जी ने वादा किया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन विपक्ष सीबीआई जांच की मांग कर रहा है।
यह दर्दनाक प्रकरण पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। क्या राज्य सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगी, या फिर बयानबाजी पर ही रुक जाएगी? पीड़िता के परिवार को न्याय मिलना ही एकमात्र सांत्वना हो सकता है।
