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By: Ravindra Sikarwar

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। बीजापुर जिले में मंगलवार को कुल 34 माओवादी कैडरों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें सात महिलाएं और 27 पुरुष शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इनमें से 26 कैडरों पर कुल 84 लाख रुपये का इनाम घोषित था। यह आत्मसमर्पण राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाइयों का नतीजा माना जा रहा है, जिससे नक्सली संगठन की रीढ़ टूटती दिख रही है।

आत्मसमर्पण करने वाले ये माओवादी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी), तेलंगाना स्टेट कमेटी और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर डिवीजन से जुड़े थे। इनकी गतिविधियां तेलंगाना से लेकर आंध्र और ओडिशा की सीमाओं तक फैली हुई थीं। इन कैडरों में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे सदस्य भी शामिल हैं, जैसे पीएलजीए प्लाटून के कमांडर, मिलिशिया सदस्य और एरिया कमेटी के पदाधिकारी। सबसे प्रमुख नामों में पंडरू पूनेम उर्फ संजू (45 वर्ष) हैं, जो केरलापाल एरिया कमेटी के डिविजनल कमेटी मेंबर थे और जिनके सिर पर 8 लाख रुपये का इनाम था। उनके अलावा रूकनी हेमला (25 वर्ष), देवा उईका (22 वर्ष), रामलाल पोयाम उर्फ रामलू (27 वर्ष) और मोटू पूनेम (21 वर्ष) जैसे कैडर भी शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक पर 8 लाख रुपये का इनाम था। ये लोग कई नक्सली घटनाओं जैसे आईईडी विस्फोट, फायरिंग और आगजनी में संलिप्त रहे थे।

बीजापुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि ये कैडर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के सामने आत्मसमर्पण करने आए। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार की ‘पूना मार्गेम’ यानी पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान और नियाद नेल्लानार योजना ने इन कैडरों को प्रभावित किया है। ये योजनाएं दूरदराज के गांवों में विकास पहुंचा रही हैं, जिससे नक्सलियों का जनाधार कमजोर हो रहा है।” एसपी यादव ने आगे अपील की कि अन्य माओवादी भी हिंसक विचारधारा त्यागकर निर्भीक होकर समाज की मुख्यधारा में लौटें। उनके परिवार भी चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन जिएं और विकास के साथ कदम मिलाएं। सरकार की नीति से उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर भविष्य मिलेगा।

आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक कैडर को पुनर्वास नीति के तहत तुरंत 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा कौशल विकास प्रशिक्षण, रोजगार अवसर और अन्य सरकारी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। यह कदम न केवल इन व्यक्तियों के जीवन को नई दिशा देगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति और विकास की बयार बहाएगा।

यह घटना छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में चल रहे प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि छत्तीसगढ़ को शांति, विश्वास और उज्ज्वल भविष्य वाला प्रदेश बनाया जाए। केंद्र सरकार ने भी मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है।

बीजापुर जिले में 2024 की शुरुआत से अब तक की बात करें तो 824 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, 1079 को गिरफ्तार किया गया है और विभिन्न मुठभेड़ों में 220 मारे गए हैं। पूरे राज्य में पिछले दो वर्षों में 2200 से अधिक नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं। सुरक्षा बलों की मेहनत और सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों से बस्तर के जंगलों में अब बंदूकों की गूंज कम हो रही है और स्कूल, अस्पताल, सड़कें जैसे विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

यह आत्मसमर्पण न केवल माओवादी संगठन को कमजोर कर रहा है, बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन रहा है जो गलत राह पर भटक गए हैं। हिंसा छोड़कर शांति का रास्ता अपनाने से न केवल उनका भविष्य सुरक्षित हो रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। आने वाले दिनों में ऐसे और आत्मसमर्पण होने की उम्मीद है, जिससे छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्त राज्य की ओर तेजी से बढ़ेगा।

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