By: Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश के परिवहन विभाग में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। एक लिपिक ने उच्च अधिकारियों के दिशानिर्देशों को ताक पर रखकर खुद ही प्रश्नपत्र तैयार किया और प्रशिक्षण पूरा कर रहे 13 परिवहन आरक्षकों की परीक्षा करा दी। सभी आरक्षक इस परीक्षा में पास घोषित हो गए, लेकिन जब यह मामला परिवहन आयुक्त तक पहुंचा तो पूरी परीक्षा को रद्द कर दिया गया। अब इन सभी आरक्षकों को नए प्रश्नपत्र के साथ दोबारा परीक्षा देनी होगी, जो नए साल के पहले और दूसरे दिन यानी 1 और 2 जनवरी को आयोजित की जाएगी। साथ ही, इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लिपिक को न केवल पहले से निलंबित किया गया था, बल्कि अब उसे सेवा से बर्खास्त करने का नोटिस भी जारी कर दिया गया है।
यह मामला ग्वालियर स्थित पुलिस प्रशिक्षण केंद्र (पीटीएस) तिघरा से जुड़ा है। विभाग में मैदानी ड्यूटी पर तैनात इन 13 आरक्षकों का लंबे समय से विभागीय प्रशिक्षण पूरा नहीं हुआ था। मीडिया में इसकी खबरें आने के बाद परिवहन आयुक्त ने तत्काल कार्रवाई की और सभी को तीन महीने का अनिवार्य प्रशिक्षण कराया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद नवंबर महीने में इनकी विभागीय परीक्षा आयोजित की जानी थी। सामान्य प्रक्रिया के तहत प्रश्नपत्र किसी विशेषज्ञ अधिकारी या उच्च स्तर से तैयार कराया जाना चाहिए था, लेकिन आरोपी लिपिक मोहन आदिवासी ने खुद ही यह जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली।
उन्होंने स्वयं प्रश्नपत्र बनाया और उसे आधिकारिक बताकर पीटीएस तिघरा भेज दिया। केंद्र में इसी आधार पर परीक्षा हुई और सभी 13 आरक्षक पास हो गए। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि सभी के प्राप्तांक आपस में बहुत करीब थे, जिससे शक पैदा हुआ। जब परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा को इसकी भनक लगी, तो उन्होंने गहन जांच कराई। जांच में खुलासा हुआ कि प्रश्नपत्र पूरी तरह अनधिकृत था और लिपिक ने बिना किसी अनुमति के इसे तैयार किया था। आयुक्त ने तुरंत पुरानी परीक्षा को अमान्य घोषित कर दिया और नए सिरे से वैध प्रश्नपत्र तैयार कराने के आदेश दिए।
यह लिपिक पहले भी विवादों में रहा है। करीब डेढ़ महीने पहले उसने परिवहन आयुक्त के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर एक अन्य मामले में जांच के घेरे में आए क्लर्क राजीव उपाध्याय को क्लीनचिट दे दी थी। उस घटना के सामने आने पर दोनों क्लर्कों को निलंबित किया गया था और जांच के लिए क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब राजीव उपाध्याय 31 दिसंबर को रिटायर हो चुके हैं, लेकिन मोहन आदिवासी पर कार्रवाई और सख्त हो गई है। आयुक्त ने उन्हें निष्कासन का नोटिस जारी कर दिया है, जिसका मतलब है कि जल्द ही उनकी नौकरी जा सकती है।
परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा ने मामले पर स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही खुद के स्तर पर प्रश्नपत्र बनाकर परीक्षा कराने की जानकारी मिली, पुरानी परीक्षा को रद्द कर दिया गया। नया और वैध प्रश्नपत्र तैयार कर लिया गया है, जिसके आधार पर 1 और 2 जनवरी को फिर से परीक्षा होगी। निलंबित लिपिक को बर्खास्तगी का नोटिस भेजा जा चुका है और आगे की कार्रवाई प्रक्रिया के अनुसार होगी।
यह घटना विभागीय अनुशासन और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जहां एक ओर प्रशिक्षण और परीक्षा प्रक्रिया कर्मचारियों की योग्यता सुनिश्चित करने के लिए होती है, वहीं ऐसे फर्जीवाड़े न केवल नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि विभाग की विश्वसनीयता को भी ठेस पहुंचाते हैं। अगर समय रहते उच्च अधिकारियों को जानकारी न मिलती, तो ये 13 आरक्षक फर्जी प्रमाणपत्र के साथ स्थायी सेवा में बने रहते। अब नए प्रश्नपत्र से होने वाली परीक्षा में इन आरक्षकों की असली योग्यता का इम्तिहान होगा।
विभाग के सूत्रों का कहना है कि ऐसे मामलों से बचने के लिए परीक्षा प्रक्रिया को और सख्त करने की जरूरत है। प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर मूल्यांकन तक हर चरण में कई स्तर की जांच और डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। साथ ही, छोटे कर्मचारियों को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपने से पहले उनकी निगरानी बढ़ानी होगी। यह प्रकरण अन्य विभागों के लिए भी सबक है कि लापरवाही और अनधिकृत काम कितने बड़े संकट को जन्म दे सकते हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि दोबारा होने वाली परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, तथा दोषी कर्मचारी को कड़ी सजा मिलेगी।
