Key Changes & New Rules from October 1, 2025: UPI, LPG, Milk, IRCTC & More | All You Need to Know - 1
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by-Ravindra Sikarwar

भारत में वित्तीय और यात्रा क्षेत्रों में एक नई क्रांति का आगाज हो रहा है, क्योंकि 1 अक्टूबर 2025 से कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव लागू हो रहे हैं। ये परिवर्तन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) से जुड़े हैं, जो आम नागरिकों के दैनिक जीवन को सरल बनाने के साथ-साथ सुरक्षा और पारदर्शिता को मजबूत करेंगे। इन बदलावों का उद्देश्य डिजिटल युग की मांगों को पूरा करना है, जहां लेन-देन की गति, निवेश के अवसर और यात्रा की विश्वसनीयता पर जोर दिया जा रहा है। आइए, इन प्रमुख बदलावों को विस्तार से समझते हैं।

चेक क्लियरिंग प्रक्रिया में क्रांतिकारी सुधार: अब 5 लाख तक के चेक तीन दिनों में साफ
पारंपरिक चेक भुगतान प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में आरबीआई ने एक बड़ा कदम उठाया है। 1 अक्टूबर 2025 से चेक क्लियरिंग की प्रक्रिया में बैच-आधारित सिस्टम से हटकर निरंतर क्लियरिंग (कंटीन्यूअस क्लियरिंग) मोड में बदलाव हो रहा है, जिसका पूर्ण कार्यान्वयन 4 अक्टूबर 2025 से शुरू होगा। इसके तहत 5 लाख रुपये तक के चेक अब अधिकतम तीन कार्य दिवसों में क्लियर हो जाएंगे, जबकि इससे अधिक राशि के चेक के लिए पांच दिनों का समय लगेगा। यह बदलाव दो चरणों में लागू होगा: पहला चरण 4 अक्टूबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक चलेगा, और दूसरा चरण 3 जनवरी 2026 से शुरू होगा।

इस नई व्यवस्था का मुख्य लाभ यह है कि चेक प्रस्तुत करने के बाद लेन-देन की पुष्टि घंटों के अंदर हो सकेगी, जो पहले के समान-दिन या देरी वाले सिस्टम से कहीं बेहतर है। इससे व्यवसायों और व्यक्तिगत लेन-देन में नकदी प्रवाह तेज होगा, जबकि धोखाधड़ी की संभावना भी कम होगी। आरबीआई के अनुसार, यह परिवर्तन चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) को मजबूत करेगा, जहां चेक की इमेज स्कैनिंग के माध्यम से प्रक्रिया तेज की जाएगी। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में जहां डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर है, वहां बैंक शाखाओं को अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान करने की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल पेमेंट्स के युग में चेक को प्रासंगिक बनाए रखने का प्रयास है।

आईआरसीटीसी ई-टिकट बुकिंग में सख्ती: आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य, दुरुपयोग पर अंकुश
रेल यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट आ रहा है, जहां आईआरसीटीसी की वेबसाइट या ऐप के माध्यम से सामान्य टिकटों (जनरल टिकट्स) की ऑनलाइन बुकिंग पर नई गाइडलाइंस लागू हो रही हैं। 1 अक्टूबर 2025 से आधार-प्रमाणीकृत उपयोगकर्ताओं के लिए ये नियम विशेष रूप से प्रभावी होंगे, जिसका उद्देश्य टिकट आरक्षण प्रणाली में अनधिकृत या दुरुपयोगपूर्ण गतिविधियों को रोकना है।

पहले, बिना किसी सत्यापन के बुकिंग संभव थी, लेकिन अब आधार लिंक्ड मोबाइल नंबर या अन्य प्रमाणीकरण के बिना सामान्य श्रेणी की टिकटें बुक करना मुश्किल हो जाएगा। यह कदम टिकट ब्लैकिंग, मल्टीपल बुकिंग्स और फर्जी खातों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए लिया गया है। आईआरसीटीसी के अधिकारियों के अनुसार, यह परिवर्तन रेलवे की क्षमता को बेहतर उपयोग करने में मदद करेगा, खासकर उन यात्रियों के लिए जो दैनिक या छोटी दूरी की यात्रा करते हैं। हालांकि, पीएएन (परमानेंट अकाउंट नंबर) का उल्लेख सीधे नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में अतिरिक्त वेरिफिकेशन के रूप में इसका उपयोग हो सकता है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी आधार डिटेल्स को अपडेट रखें, ताकि बुकिंग प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए। इस बदलाव से लाखों यात्री प्रभावित होंगे, और रेलवे ने हेल्पलाइन नंबरों को सक्रिय कर दिया है।

एनपीएस में निवेश की स्वतंत्रता: गैर-सरकारी सदस्यों के लिए इक्विटी एक्सपोजर 100% तक संभव
रिटायरमेंट प्लानिंग को और लचीला बनाने के लिए पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) ने एनपीएस में बड़ा सुधार किया है। 1 अक्टूबर 2025 से गैर-सरकारी क्षेत्र के सदस्य (जैसे निजी कर्मचारी या स्व-रोजगार वाले) अपनी पेंशन कॉर्पस का 100% तक इक्विटी-लिंक्ड स्कीम्स में निवेश कर सकेंगे, जो पहले 75% की सीमा से एक बड़ा उछाल है।

इसके अलावा, एक ही स्थायी रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (पीआरएएन) के तहत विभिन्न सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियों (सीआरए) जैसे कैम्स, प्रोटियन और केफिनटेक में कई स्कीम्स चुनने की सुविधा मिलेगी। यह मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क गैर-सरकारी क्षेत्र के लिए अपनाया गया है, जो निवेशकों को जोखिम और रिटर्न के आधार पर विविध विकल्प चुनने की आजादी देगा। सरकारी कर्मचारियों के लिए यह सीमा पहले से ही 50% थी, लेकिन गैर-सरकारी सदस्यों के लिए यह बदलाव बाजार की तेजी का फायदा उठाने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगा। वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि इससे लंबी अवधि में रिटर्न बढ़ सकता है, लेकिन बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए सतर्क निवेश जरूरी है। एनपीएस के तहत अब तक करोड़ों सदस्य जुड़ चुके हैं, और यह सुधार सब्सक्रिप्शन को और बढ़ावा देगा।

ये बदलाव न केवल आर्थिक प्रक्रियाओं को तेज करेंगे, बल्कि नागरिकों को अधिक सुरक्षित और कुशल सेवाएं प्रदान करेंगे। हालांकि, इनका पूर्ण लाभ उठाने के लिए बैंकों, रेलवे ऐप और एनपीएस पोर्टल पर नियमित अपडेट चेक करना आवश्यक है। सरकार का यह प्रयास डिजिटल इंडिया की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो आने वाले दिनों में और अधिक नवाचार लाएगा।

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